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नसें हमारे शरीर में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। ये शरीर में मौजूद सभी अंगों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त संचारण करती हैं। शरीर को व्यवस्थित और स्वस्थ बनाए रखने में नसों का बड़ा योगदान है। लेकिन, कुछ कारणों के चलते हमारी नसें कमजोर पड़ जाती हैं, जो शारिरिक समस्याओं का कारण बन जाती हैं। इन्हें ही नसों का दर्द यानी नर्व पेन कहा जाता है।
क्या कहते हैं एक्पर्ट्स

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नर्व पेन या न्यूरॉल्जिया किसी खास नस या नर्व में होता है। वहीं न्यूरॉल्जिया में जलन, संवेदनहीनता या एक से अधिक नर्व में खिचाव या दर्द फैलने से होता है। न्यूरॉल्जिया के कारण शरीर की कई नसें प्रभावित हो सकती है। आयुर्वेद में इसका बेहतर इलाज है। नसों के दर्द के कई कारण होते हैं। इनमें से कई कारण तो ऐसे भी हैं, जिनके बारे में समय पर पता ही नहीं चल पाता।

क्रॉनिक समस्या है नर्व पेन

नर्व पेन एक बहुत ही गंभीर और क्रॉनिक समस्या है, जिसमें वास्तविक समस्या समाप्त हो जाने के बाद भी दर्द स्थायी रूप से बना रहता है। नर्व पेन में दर्द शुरू होने और रोग की पहचान होने में कुछ दिन से लेकर कुछ महीने लग सकते हैं। नर्व को थोड़ा सा भी नुकसान पहुंचने पर या पुराने चोट ठीक हो जाने पर भी दर्द शुरू हो सकता है। सबसे पहले जान लेते हैं नसों के दर्द के मुख्य कारण।


ये हैं मुख्य कारण

ड्रग्स, रसायनों के कारण परेशानी, क्रॉनिक रिनल इनसफिशिएंशी, मधुमेह, संक्रमण जैसे-शिंगल्स, सिफलिस और लाइम डिजीज, पॉरफाइरिया, नजदीकी अंगों (ट्यूमर या रक्त नलिकाएं) से नर्व पर दबाव पड़ना, नर्व में सूजन या तकलीफ, नर्व के लिए खतरे या गंभीर समस्याएं(इसमें शल्यक्रिया शामिल है) के अलावा कई बार तो अधिकतर मामलों में कारण का पता नहीं चलता।

इस वजह से नसें हो जाती हैं कमजोर

- यदि आपकी याददास्त घटने लगे तो समझ लीजिये की आपकी नसें कमजोर पड़ने लगी हैं।
- चक्कर आना भी एक संकेत है कि आपकी नसें कमज़ोर है क्योंकि रक्त संचारित नही हो पा रहा।
- रक्त जब शरीर में सही ढंग से नही सर्क्युलेट होता तो आंखों के आगे उठने-बैठने के समय अंधेरा छाने लगता है।
- अपच होना भी एक संकेत है।
- अनिद्रा भी दर्शाता है आपके नसों की कमज़ोरी।
- हदय-स्पंदन
- खून की कमी।

मिलने लगते हैं ये संकेत

-गहरी टेंडन रिफ्लैक्स में कमी या मांसपेशियों का कम होना।
-प्रभावित क्षेत्र में पसीना कम निकलना। क्योंकि, पसीना निकलना भी नर्व द्वारा ही नियंत्रित होता है।
-नर्व के पास स्पर्श से दर्द या सूजन महसूस होना।
-ट्रिगर प्वाइंट या ऐसे क्षेत्र जहां हल्के से छू देने से भी दर्द शुरू हो जाए।
-दांतों की जांच, जिसमें फेशियल पेन को जन्म देने वाली दांतों की समस्याएं शामिल नहीं हैं(जैसे-दांतों में ऐबसेस या फोड़े)।
-प्रभावित क्षेत्र के लाल हो जाने या सूजन आने जैसे-लक्षण, जिससे संक्रमण, ह़ड्डी टूटने या रयूमेटॉइड अर्थाराइटिस की स्थिति की पहचान में सहायता मिले।

इन बातों का रखें खास ध्यान

- दबी हुई नस को दबाने या मोड़ने से बचें।
- यदि सूजन हो तो सूजन कम करने के लिए बर्फ और गर्म चीज़ों से बारी-बारी से मसाज करें।
- दर्द के समय जितना हो सके आराम करें।
- आराम पाने के लिए ज्यादा दबाव न डालें हल्की मालिश ही करें।
- अधिक दर्द होने पर चिकित्सकीय परामर्श के साथ दर्द निवारक दवा लें, अथवा अपनी मर्जी से कोई भी दवा लेने से बचें।

नसों के दर्द का घरेलू इलाज

-पुदीने का तेल

यदि आपके नसों में बहुत दर्द होता है, तो दर्द से प्रभावित क्षेत्र में पुदीने के तेल से मालिश करें। इससे आपको नसों के दर्द से राहत मिलेगी।

-सरसो का तेल

सरसों के तेल से नसों के दर्द से छुटकरा पाया जा सकता है। सरसों के तेल को गरम करके इससे मालिश करे। ऐसा करने से आपको निश्चित ही लाभ होगा।


-लेवेंडर का फूल

लेवेंडर का फूल तथा सुइया को नहाने के पानी में मिला कर नहाएं ।


-व्यायाम

यदि आपकी नसों में बहुत दर्द होता है तो आपको नियमित व्यायाम करना चाहिए जिससे नसों को बहुत लाभ होता है और इसमें पड़ी हुई गांठ भी धीरे-धीरे ठीक हो जाती है।


-मसाज

नस में होने वाले दर्द पर दबाव डालने से तनाव को मुक्त करने और दर्द कम करने में मदद मिल सकती है। पूरे शरीर की मालिश करने से सभी मांसपेशियों की शिथिलता को बढाने में और साथ ही प्रभावित हिस्से को आराम देने में हेल्प मिलती हैं।

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