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संकेत तथा लक्षण
मानसिक विकलांगता वाले बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में बाद में बैठना, घुटनों के बल चलना और पैरों पर चलना या बोलना सीख पाते हैं। मानसिक विकलांगता वाले वयस्कों और बच्चों दोनों में निम्नलिखित विशेषताएं देखी जा सकती हैं:
मौखिक भाषा के विकास में देरी
स्मृति कौशल की न्यूनता
सामाजिक नियमों को सीखने में कठिनाई
समस्या का हल करने के कौशल में कठिनाई
स्वयं-सहायता या खुद अपनी देखभाल करने की क्षमता जैसे कौशल के अनुकूल व्यवहार के विकास में देरी.
सामाजिक निषेध का अभाव
संज्ञानात्मक कामकाज की सीमाएं मानसिक विकलांगता वाले बच्चे में एक सामान्य बच्चे की तुलना में धीमी गति से सीखने और विकसित होने का कारण बनती हैं। ये बच्चे भाषा सीखने, सामाजिक कौशल विकसित करने और अपने निजी जरूरतों जैसे कपड़ा पहनने या खाने जैसी जरूरतों का ख्याल रखने में ज्यादा समय ले सकते हैं। वे सीखने में ज्यादा समय ले सकते हैं और पुनरावृत्ति की जरूरत होती है और उनके सीखने के स्तर दक्षता की जरूरत पड़ सकती है। फिर भी, वस्तुत: लगभग हर बच्चा सीखने, विकसित होने और समुदाय में हिस्सा लेने वाला एक सदस्य बन जाता है।
बचपन के प्रारंभ में हल्की मानसिक विकलांगता (आईक्यू 50-69) समझी नहीं जा सकती और जब तक कि बच्चे स्कूल नहीं जाते, इसकी पहचान नहीं हो सकती. यहां तक कि जब खराब शैक्षणिक प्रदर्शन की पहचान कर ली जाती हो तो भी सीखने की क्षमता कम होने के आधार पर हल्की मानसिक विकलांगता और भावनात्मक/व्यवहार संबंधी गड़बड़ियों का आकलन करने के लिए विशेषज्ञता की जरूरत पड़ सकती है। हल्की मानसिक विकलांगता वाले व्यक्ति जब वयस्क होते हैं तो उनमें से बहुत स्वतंत्र रूप से रहने और लाभकारी रोजगार करने में सक्षम हो सकते हैं।
औसत मानसिक विकलांगता (आईक्यू 35-49) लगभग जीवन के पहले साल के भीतर स्पष्ट होती है। औसत मानसिक विकलांगता वाले बच्चों को विद्यालय, घर और समुदाय में काफी समर्थन की आवश्यकता होती है, ताकि वे उन जगहों पर पूरी तरह से भागीदारी कर सकें. वयस्क के रूप में वे एक सहायक सामूहिक घर में अपने मां-बाप के साथ रह सकते हैं या महत्वपूर्ण सहायक सेवाओं के जरिये उनकी मदद की जा सकती हैं, जैसे उनका वित्तीय प्रबंधन.
अधिक गंभीर मानसिक विकलांगता वाले व्यक्ति (उसके या उसकी) को पूरे जीवन काल तक और अधिक गहन समर्थन और निगरानी की आवश्यकता होगी.
कारण
डाउन सिंड्रोम, घातक अल्कोहल सिंड्रोम और फर्जाइल एक्स सिंड्रोमये तीन सबसे आम जन्मजात कारण होते हैं। हालांकि, डॉक्टरों को कई अन्य कारण भी मिले हैं। सबसे आम हैं:
आनुवंशिक स्थितियां. विकलांगता कभी कभी माता पिता से विरासत में मिले असामान्य जीन की वजह से, त्रुटिपूर्ण जीन गठबंधन या अन्य कारणों से भी होती है। सबसे अधिक प्रचलित आनुवंशिक स्थितियों में डाउन सिंड्रोम क्लिनफेल्टर्स सिंड्रोम,फर्जाइल एक्स सिंड्रोम, न्यूरोफाइब्रोमेटोटिस, जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म, विलियम्स सिंड्रोम, फनिलकेटोन्यूरिया (पीकेयू) और प्रैडरर-विली सिंड्रोमशामिल हैं। अन्य आनुवंशिक स्थितियों में शामिल है: फेलेन मैकडर्मिड सिंड्रोम (22क्यू 13 डीईएल), मोवेट-विल्सन सिंड्रोम, आनुवांशिक सिलियोपैथी[2] और सिडेरियस टाइप एक्स से जुड़ी मानसिक विकलांगता (OMIM 300263), जो पीएचएफ8 जीन में परिवर्तन के कारण होती है।OMIM 300560[3][4] कुछ दुर्लभ मामलों में, एक्स और वाई गुणसूत्रों में असामान्यताएं विकलांगता का कारण बनती हैं। 48 XXXX और 49 XXXX, XXXXX सिंड्रोम पूरी दुनिया में छोटी संख्या में लड़कियों को प्रभावित करता है, जबकि लड़कों को 47 XYY,49 XXXXY या 49 XYYYY प्रभावित करता है।
गर्भावस्था के दौरान समस्याएं. जब भ्रूण का विकास ठीक तरह से नहीं होता है तो मानसिक विकलांगता आ सकती है। उदाहरण के लिए, भ्रूण कोशिकाओं के बढ़ने के समय जिस तरीके से उनका विभाजन होता है, उसमें समस्या हो सकती है। जो औरत शराब पीती है (देखें घातक अल्कोहल सिंड्रोम) या गर्भावस्था के दौरान रूबेला (एक वायरल रोग, जिसमें चेचक जैसे दाने निकलते हैं) जैसे रोग से संक्रमित हो जाती है तो उसके बच्चे को मानसिक विकलांगता हो सकती है।
जन्म के समय समस्याएं. प्रसव पीड़ा और जन्म के समय अगर बच्चे को लेकर समस्या हो, जैसे उसे पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिले तो मस्तिष्क में खराबी के कारण उसमें (बच्चा या बच्ची) विकास की खामी हो सकती है।
कुछ खास तरह के रोग या विषाक्तता. अगर चिकित्सा देखरेख में देरी हुई या अपर्याप्त चिकित्सा हुई तो काली खांसी, खसरा और दिमागी बुखार के कारण दिमागी विकलांगता पैदा हो सकती है। सीसा और पारे जैसी विषाक्तता से ग्रसित होने से दिमाग की क्षमता कम हो सकती है।
आयोडीन की कमी, जो दुनिया भर में लगभग 20 लाख लोगों को प्रभावित कर रहा है, विकासशील देशों में निवारणीय मानसिक विकलांगता का बड़ा कारण बना हुआ है, जहां आयोडीन की कमी एक महामारी बन चुकी है। आयोडीन की कमी भी गण्डमाला का कारण बनती है, जिसमें थाइरॉयड की ग्रंथि बढ़ जाती है। पूर्ण रूप में क्रटिनिज्म (थायरॉयड के कारण पैदा रोग) जिसे आयोडीन की ज्यादा कमी से पैदा हुई विकलांगता कहा जाता है, से ज्यादा आम है बुद्धि का थोड़ा नुकसान. दुनिया के कुछ क्षेत्र इसकी प्राकृतिक कमी और सरकारी निष्क्रियता के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। भारत में सबसे अधिक से 500 मिलियन लोग आयोडीन की कमी, 54 लाख लोग गंडमाला और 20 लाख लोग थायरॉयड से संबंधित रोग से पीड़ित हैं। आयोडीन की कमी से जूझ रहे अन्य प्रभावित देशों में चीन और कजाखस्तान ने व्यापक रूप से आयोडीन से संबंधित कार्यक्रम चलाये, पर 2006 तक रूस में इस तरह का कोई कार्यक्रम नहीं चलाया गया।[5]
दुनिया के अकालग्रस्त हिस्सों, जैसे इथियोपिया में कुपोषण दिमाग के विकास में कमी का एक आम कारण है।[6]
धनुषाकार पुलिका की अनुपस्थिति.[7]
निदान
डायग्नोस्टिक एंड स्टेटिकल मैन्युअल ऑफ मेंटल डिजआर्डर्स (डीएसएम IV)[8] के नवीनतम अंक के मुताबिक मानसिक विकलांगता की पहचान के लिए तीन तरह के मानदंडों को अपनाया जाना चाहिए: आईक्यू 70 से कम हो, दो या दो से अधिक क्षेत्रों में अनुकूलन व्यवहार (अनुकूलन व्यवहार की दर मापने वाले स्केल के मुताबिक, जैसे संचार, स्वयं सहायता कौशल, पारस्परिक कौशल और अधिक) और वह सबूत, जिससे 18 वर्ष की उम्र से पहने सीमाएं स्पष्ट हो जायें.
इसका औपचारिक रूप से बुद्धि और अनुकूलन व्यवहार के पेशेवर आकलन से पता लगाया जा सकता है।
बुद्धि 70 से नीचे
अंग्रेजी भाषा का पहला बुद्धि परीक्षण द टरमैन-बिनेट फ्रांस के बिनेट द्वारा उपलब्धि की क्षमता को मापने के लिए एक उपकरण के रूप में विकसित किया गया। टर्मन ने इस परीक्षण का रूपांतरण किया और इसे मौखिक भाषा, शब्दावली, संख्यात्मक तर्क, स्मृति, मोटर की रफ्तार और विश्लेषण की क्षमता पर आधारित बौद्धिक क्षमता को मापने के एक साधन के रूप में स्थापित किया। इस तरीके से बुद्धि परीक्षण की संख्या 100 है, जिसमें एक मानक विचलन 15 (wais / Wisc-IV) या 16 (बिनेट-स्टैनफोर्ड) है। उप औसत बुद्धि के मौजूद होने पर विचार तब किया जाता है, जब दो मानक विचलनों का व्यक्तिगत स्कोर परीक्षण के अंक से कम हों. संज्ञानात्मक क्षमता (अवसाद, चिंता आदि) के अलावा दूसरे कारणों से भी बुद्धि परीक्षण अंक कम हो सकता है। मूल्यांकन करने वाले के लिए यह महत्वपूर्ण है कि बुद्धि परीक्षण की माप "औसत से काफी नीचे" तय करने से पहले वह व्यक्ति को अलग करे.
मानक बुद्धि परीक्षण अंकों पर आधारित निम्नलिखित श्रेणियां अमेरिकन एसोसियेशन ऑफ मेडिकन रिटार्डेशन, डायग्नोस्टिक एंड स्टेटिकल मैन्युअल ऑफ मेंटल डिजआडर्र्स-IV-टीआर और इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजिजेज-10 पर आधारित है :[तथ्य वांछित]
वर्ग बुद्धि लब्धि
गहरी मानसिक विकलांगता 20 के नीचे
गंभीर मानसिक विकलांगता 20-34
मध्यम मानसिक विकलांगता 35-49
हल्की मानसिक विकलांगता 50-69
औसत बौद्धिक कार्य 70-84
चूंकि रोग की पहचान केवल बुद्धि परीक्षण अंक पर ही आधारित नहीं है, इसलिए एक व्यक्ति के अनुकूल कार्य करने के लक्षणों को भी ध्यान में रखना चाहिए और रोग की पहचान कठोर रवैये के साथ नहीं होना चाहिए। इसमें बौद्धिक परीक्षण अंक, अनुकूली व्यवहार की दर मापने के स्केल के आधार पर निर्धारित अनुकूलित कार्य अंक शामिल होता है, जो व्यक्ति के किसी परिचित द्वारा प्रदान की गईं क्षमताओं के विवरण पर आधारित होता है। यह मूल्यांकन परीक्षक की राय पर भी आधारित होता है, जो उसने सीधे उस व्यक्ति (पुरुष या महिला) की समझ, बातचीत के माध्यम या पसंद वाली भाषा के जरिये बात कर हासिल की है।
अनुकूली व्यवहार की दो या अधिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सीमाएं
अनुकूलनशील व्यवहार या अनुकूली कार्य स्वतंत्र रूप से रहने (या उम्र के न्यूनतम स्वीकार्य स्तर पर) के कौशल को दर्शाता है। अनुकूलित व्यवहार के आकलन के लिए पेशेवर व्यक्ति समान उम्र के अन्य बच्चों की कार्यात्मक क्षमता की तुलना करते हैं। अनुकूलित व्यवहार के आकलन के लिए पेशेवर संरचनात्मक साक्षात्कार का उपयोग करते हैं, जिसके माध्यम से वे व्यक्ति के समुदाय में व्यवहार के बारे में उन लोगों से व्यवस्थित जानकारी हासिल करते हैं, जो उसे अच्छी तरह जानते हैं। अनुकूली व्यवहार को मापने के लिए कई स्केल हैं और किसी के अनुकूल व्यवहार की गुणवत्ता का सटीक मूल्यांकन के सटीक आकलन के लिए नैदानिक निर्णय की आवश्यकता होती है। अनुकूली व्यवहार के लिए कुछ कौशल का होना महत्वपूर्ण है : जैसे:
दैनिक जीवनयापन का कौशल, जैसे कपड़े पहनना, बाथरूम का उपयोग और खुद खाना;
बातचीत का कौशल, जैसे, जो कहा गया उसे उसने समझा और उसके अनुरूप जवाब देने में सक्षम होना,
साथियों, परिवार के सदस्यों, दंपतियों, वयस्कों व अन्य के साथ सामाजिक कौशल,
इस बात के सबूत हैं कि सीमाएं बचपन में ही स्पष्ट हो जाती हैं।
इस तीसरी स्थिति का उपयोग अल्जाइमर रोग या मस्तिष्क की क्षति के साथ गहरा आघात जैसे उन्माद की स्थितियों से अलग करने के लिए किया जाता है।
देख-रेख
ज्यादातर परिभाषाओं के मुताबिक मानसिक विकलांगता बीमारी के बजाय सही तौर पर विकलांगता मानी जाती है। एमआर (मानसिक विकलांगता) मानसिक बीमारी के कई रूपों जैसे स्कीजोफ्रेनिया या अवसाद से अलग किया जा सकता है। वर्तमान में एक स्थापित विकलांगता का कोई "इलाज" नहीं है, हालांकि उचित समर्थन और शिक्षण के साथ ज्यादातर व्यक्ति कई बातें सीख सकते हैं।
पूरी दुनिया में हजारों एजेंसियां हैं जो विकासमूलक विकलांगताओं वाले लोगों के लिए सहायता प्रदान करती हैं। उनमें सरकार द्वारा चलाई जाने वाली, लाभ के लिए और बिना लाभ की निजी एजेंसियां शामिल हैं। एक एजेंसी में बहुत सारे विभाग शामिल हो सकते हैं, जिनमें पर्याप्त कर्मचारियों वाले आवासीय घर, दिन के पुनर्वास कार्यक्रम, जिसमें अनुमानित रूप से स्कूल, कार्यशालाएं हो सकती हैं, जिसमें विकलांग लोगों को रोजगार मिल सकता है, वैसे कार्यक्रम, जिनके जिरये विकासात्मक विकलांग लोगों की मदद के लिए समुदाय में काम मिल सकता हो, वैसे लोगों द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम जिनेके अपने अपार्टमेंट हैं और उसके माध्यम से विकासात्मक विकलांग लोगों की मदद कर सकते हों, वैसे कार्यक्रम, जिनसे उनके बच्चों की परवरिश में मदद की जा सकती हो और इसके अलावा बहुत कुछ हो सकता है। इसमें भी कई विकासात्मक विकलांग बच्चों के माता पिता के लिए कई एजेंसियां और कार्यक्रम होते हैं।
इसके अलावा, कुछ विशेष कार्यक्रम हैं, जिसमें विकासात्मक विकलांग लोग बुनियादी जीवन कौशल सीखने के लिए भाग ले सकते हैं। इन "लक्ष्यों" को पूरी तरह कामयाब होने में काफी समय लग सकता है, लेकिन अंतिम लक्ष्य स्वतंत्रता है। यह स्वतंत्रता दांत साफ करने से लेकर स्वतंत्र रूप से रहने तक कुछ भी हो सकती है। विकासात्मक विकलांग लोग अपने पूरे जीवनकाल तक सीखना जारी रख सकते हैं और यहां तक कि जीवन के आखिरी चरणों में अपने परिवारों, देखरेख करने वालों, चिकित्सकों और इन लोगों के सभी प्रयासों में समन्वय लाने वालों की मदद से नये कौशल सीख सकते हैं।
यद्यपि मानसिक विकलांगता के लिए कोई विशेष चिकित्सा नहीं है, फिर भी विकासात्मक विकलांगों में चिकित्सा संबंधी जटिलताएं होती हैं और वे कई दवाएँ ले सकते हैं। उदाहरण के लिए विकासात्मक देरी वाले मंद बच्चों को एंटी-साइकोटिक्स या मनोदशा को स्थिर करने वाली दवाएं दी जा सकती हैं, ताकि व्यवहार को सामान्य रखा जा सके. मानसिक विकलांगता वाले लोगों में बेंजोडाएजेपिन के प्रयोग जैसी नशीली दवाओं के प्रयोग के बाद निगरानी और सतर्कता की जरूरत होती है, क्योंकि आम तौर पर इसके पार्श्व प्रभाव होते है, जिसे अक्सर व्यवहार संबंधी और मानसिक समस्या के रूप में गलत पहचान कर ली जाती है।
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