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महिलाओं में एचपीवी

ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) एक वायरल इंफेक्शन होता है, जो ज्यादातर यौन संबंध बनाने को दौरान फैलता है। यह वायरस त्वचा से त्वचा के संपर्क या संक्रमित व्यक्ति के व्यक्तिगत सामान के माध्यम से भी हो सकता है। इस वायरस वार्ट्स से लेकर कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं। हालांकि, कम जोखिम वाले एचपीवी संक्रमण अक्सर अपने आप ही ठीक हो जाते हैं। वहीं, उच्च जोखिम वाले एचपीवी संक्रमण के परिणामस्वरूप गर्भाशय ग्रीवा(सर्वाइकल), योनि(वैजाइनल), योनिमुख (वल्‍वर), ऑरोफैरिंक्‍स और नोएडा स्थित मदरहुड हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट और प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ.मनीषा रंजन ने महिलाओं में एचपीवी के फैलने से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों को हमारे साथ शेयर किया है जिन्हें हर महिला को जरूर जानना चाहिए।
​कैसे करें एचपीवी की पहचान?

डॉक्टर बताती हैं कि आमतौर पर महिलाओं को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि उन्हें एचपीवी हो सकता है। एचपीवी इंफेक्शन के होने पर कई बार लक्षण नजर नहीं भी आते हैं। एचपीवी के वह प्रकार जो वॉर्ट्स का कारण बनते हैं, जेनिटल एरिया समेत हाथ पैर में भी नजर आ सकते हैं। ये वॉर्टस उभरे हुए, सपाट, गुलाबी, या त्वचा के रंग के हो सकते हैं। इसके अलावा वे फूलगोभी के आकार के भी होते हैं। ये एक या कई मस्से के समूह में भी नजर आ सकते हैं।
​HPV के लक्षण कितने दिनों में नजर आते हैं

डॉक्टर बताती हैं कि जननांग पर होने वाले वार्ट्स एचपीवी वायरस से संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध बनाने के हफ्ते, महीने या सालभर बाद भी नजर आ सकते हैं। हो सकता है उन्हें इस बात का पता ना हो कि वे संक्रमित हैं।
​जांच और उपचार के विकल्प

एचपीवी से अधिकांश लोगों जीवन में कभी न कभी संक्रमित होते हैं। लेकिन, ज्यादातर मामलों में यह अपने आप ही दूर हो जाता है। पुरुषों के लिये कोई एचपीवी की जांच उपलब्ध नहीं है। लेकिन महिलाएं एचपीवी जांच करा सकती हैं। हालांकि, यह केवल 30 वर्ष से अधिक उम्र में करवाने की सलाह दी जाती है। लेकिन असामान्य कोशिका वृद्धि की जांच के लिये महिलाओं को रेग्यूलर चेकअप और सालाना पैप स्मीयर करवाना चाहिए, जिससे गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर का समय से पता लग सके।
कितना प्रभावी है पैप टेस्ट

पैप टेस्ट असामान्य कोशिका वृद्धि की तरफ इशारा करता है। यदि आपका पैप स्मीयर टेस्ट में कुछ गड़बड़ी नजर आती है तो इसके आधार पर डॉक्टर निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए कोल्पोस्कोपी कर सकते हैं। इसमें यदि एचपीवी की किसी भी प्रकार की पूर्ति होती है तो डॉक्टर आवश्यकता के अनुरूप उपचार के विकल्प दवा, इलेक्ट्रोकॉटरी या लेजर रिमूवल, लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल का चुनाव कर सकते हैं।
​टीका लगवाना क्यों जरूरी है?

डॉक्टर बताती हैं कि कई अध्ययन स्पष्ट रूप से साबित करते हैं कि 80% अशिक्षित आबादी अपने जीवन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एचपीवी वायरस के संपर्क में आती है। इसलिए, एचपीवी के कैंसर वाले स्ट्रेन से बचाव के लिये टीके लगवाना महत्वपूर्ण होता है। वैसे तो यौन संबंध बनाने से पहले टीका लगवाना एचपीवी संक्रमण को रोकने का आदर्श तरीका है। हालांकि, लोग 45 वर्ष की आयु तक बाद में भी टीका लगवा सकते हैं।
​HPV के वैक्सीनेशन के बाद भी जांच जरूरी

डॉक्टर के माने तो एचपीवी का टीकाकरण करवाने वाले लोगों को संक्रमण के जोखिमों को नियंत्रित रखने के लिए कुछ एहतियात बरतना जरूरी होता है। ऐसे मेंमहिलाओं को टीकाकरण के बाद हर 2-3 साल में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) की जांच करवाते रहना चाहिए।

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