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महिला के शरीर के अंदर: डिंब (अंडा) कैसे बनता है
महिलाओं में गर्भधारण की प्रक्रिया अंडाशयों से शुरु होती है। ये दो छोटे अंडाकार अंग होते हैं, जो गर्भाशय के दोनों तरफ जुड़े होते हैं। अंडाशय डिंब (अंडों) से भरे होते हैं, जो कि आपके पैदा होने से पहले ही बन जाते हैं।
हर नन्ही बच्ची अपने अंडाशयों में 10 से 20 लाख अंडों के साथ पैदा होती है। बहुत से डिंब तो लगभग तुरंत ही खत्म होना शुरु हो जाते हैं और बाकि बचे हुए भी उम्र बढ़ने के साथ-साथ कम होते जाते हैं। जब पहली बार आपके पीरियड्स शुरु होते हैं, आमतौर पर करीब 10 से 14 साल की उम्र के बीच, तो लगभग छह लाख अंडे अभी भी जीवनक्षम होते हैं। वैज्ञानिकों की गणना है कि 30 साल की उम्र तक केवल 72000 अंडे ही जीवनक्षम बचते हैं।
आप शायद अपने जननक्षम सालों के दौरान यानि कि आपकी पहली माहवारी से रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) तक करीब 400-500 अंडे जारी करेंगी।
हर मासिक चक्र के दौरान, आपकी माहवारी के कुछ समय बाद, तीन से 30 अंडे आपके किसी एक अंडाशय में परिपक्व होना शुरु हो जाते हैं। इसके बाद सर्वाधिक परिपक्व डिंब जारी कर दिया जाता है, इस प्रक्रिया को ओव्यूलेशन (डिंबोत्सर्जन) कहा जाता है। यह डिंब निकटतम डिंबवाही नलिका (फैलोपियन ट्यूब) के ट्यूलिप आकार के मुख द्वारा खींच लिया जाता है।
महिला के शरीर में दो डिंबवाही नलिकाएं होती हैं। इनमें से प्रत्येक की लंबाई तकरीबन 10 सें.मी. होती है और ये अंडाशय से होकर गर्भाशय तक जाती हैं।
ओव्यूलेशन आमतौर पर आपके अगले पीरियड्स आने से 12 से 14 दिन पहले होता है। ओव्यूलेशन का एकदम सटीक समय आपके मासिक चक्र की अवधि पर निर्भर करता है।
बहुत से अलग-अलग हॉर्मोन एक साथ मिलकर आपके मासिक चक्र की अवधि, अंडे की परिपक्वता और ओव्यूलेशन के समय को नियंत्रित करते हैं। माहवारी चक्र पर हमारे लेख में आप इन हॉर्मोन के बारे में विस्तार से पढ़ सकती हैं।
जारी होने के बाद एक औसत अंडा करीब 24 घंटों तक जीवित रहता है। गर्भाधान के लिए डिंब को इसी समयावधि में शुक्राणु द्वारा निषेचित किए जाने की आवश्यकता होती है। अगर डिंब गर्भाशय में जाते हुए रास्ते में स्वस्थ शुक्राणु से मिल जाता है, तो नई जिंदगी के सृजन की प्रक्रिया शुरु होती है। यदि, ऐसा नहीं होता, तो अंडा गर्भाशय तक जाकर अपनी यात्रा समाप्त कर देता है और विघटित हो जाता है।
अगर, आपका गर्भधारण नहीं हुआ है, तो अंडाशय ईस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टीरोन हॉर्मोन बनाना बंद कर देती है। ये वे दो हॉर्मोन हैं, जो गर्भावस्था को बरकरार रखने में मदद करते हैं। जब इन हॉर्मोनों का स्तर घट जाता है, तो गर्भाशय की मोटी परत माहवारी के दौरान निकल जाती है। साथ ही अनिषेचित अंडे के अवशेष भी उसी समय निकलते हैं।
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