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दरअसल, इस बीमारी में मस्तिष्‍क में दो प्रोटीन, एमिलॉयड बीटा और टाउ का निर्माण होता है, जो न्यूरॉन्स को परेशान करते हैं और उसे नष्ट करते हैं। इससे मस्तिष्‍क की स्मृति क्षमता में कमी आती है।

कारण

वैज्ञानिक, अल्ज़ाइमर रोग से पीड़ित होने वाले सटीक कारणों को अभी तक समझ नहीं पाये हैं। इस रोग से पीड़ित होने वाले बहु-तथ्यों कारणों को निर्विवाद मान लिया गया है, जैसे कि :
जेनेटिक

अल्ज़ाइमर रोग में अपोलीपोप्रोटीन ई (एपीओई) जीन शामिल है। इस जीन के कई प्रकार हैं। उनमें से एक, एपीओई ε४ है, जो कि व्यक्ति में रोग के ज़ोखिम को विकसित करने के लिए पाया जाता है। हालांकि, इस एपीओई ε४ जीस होने का अर्थ, यह कदापि नहीं है, कि व्यक्ति में अल्ज़ाइमर रोग विकसित हो सकता है। कुछ व्यक्तियों में एपीओई ε४ जीस नहीं होता है, लेकिन उनमें यह रोग विकसित होता है। अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है, कि अतिरिक्त जीन जैसे कि प्रिसिनिलिन १, गुणसूत्र १४ में परिवर्तन, गुणसूत्र २१ में एपीपी (एमिलोयड प्रिकर्सर प्रोटीन) का बदलाव और प्रिसिनिलिन २, गुणसूत्र १ में होने वाला परिवर्तन अल्ज़ाइमर के विकास को प्रभावित कर सकता है। दुनियाभर के वैज्ञानिक व्यक्ति में अल्ज़ाइमर रोग के विकास के ज़ोखिम को बढ़ाने वाले अन्य जीन्स की खोज रहे हैं।
जीवन शैली कारक

अल्ज़ाइमर रोग के साथ, हृदय रोग, स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा और हाइपरलिपिडीमिया जैसे बीमारियाँ जुड़ी हो सकती हैं।

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