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मनुष्य की पशुता को जितनी बार काटा जाता है, उतनी बार जन्म लेती है, और मनुष्य है कि वह अपने से पशुता को निकाल कर सच्चे अर्थों में मनुष्य बना रहना चाहता है। अत: पशुता के प्रतीक नाखून जब भी बढ़ जाते हैं, जब तब ही मनुष्य ने काट डालता है।

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