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वायरल या फ्लू होने पर गले में कफ बनता है और खांसी के साथ निकलने लगता है. एलर्जिक रिएक्शन की वजह से भी गले में कफ बनने की समस्या होती है. अगर लंबे समय तक कफ बनता रहे तो ये फेफड़ों से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं. कफ का निर्माण फेफड़ों और निचले श्वसन तंत्र के द्वारा किया जाता है.


अक्सर सर्दी-खांसी, जुकाम और बुखार होने पर गले में कफ जमा होने लगता है. वायरल या फ्लू होने पर गले में कफ बनता है और खांसी के साथ निकलने लगता है. एलर्जिक रिएक्शन की वजह से भी गले में कफ बनने की समस्या होती है.

अगर लंबे समय तक कफ बनता रहे तो ये फेफड़ों से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं. कफ का निर्माण फेफड़ों और निचले श्वसन तंत्र के द्वारा किया जाता है. शरीर में अधिक कफ बनने पर ये गले में जमा हो जाता है और कफ में बैक्टीरिया, वायरस जमा होने लगते हैं.

क्यों होता है कफ का असंतुलन

शरीर में कफ के असंतुलन के कई कारण होते हैं। आमतौर पर उन लोगों को कफ दोष का ज्यादा खतरा होता है जो दूध और दूध से बनी चीजों का अधिक सेवन करते हैं या मीठे का बहुत अधिक सेवन करते हैं। इसलिए अगर आप ढेर सारी मिठाइयां खाते हैं तो आपके शरीर में कफ दोष हो सकता है। इसके अलावा साइनस, फेफड़ों का संक्रमण या कोई बीमारी, साइनोसाइटिस से होने वाले सिरदर्द, बुखार, ब्रोंकियल अस्थमा आदि के कारण भी शरीर में कफ का असंतुलन हो सकता है।

कफ के असंतुलन के लक्षण

हाई कोलेस्ट्रॉल
जल्दी-जल्दी जुकाम होना
शरीर का वजन बढ़ना
मुंह में मीठा स्वाद लगना
एलर्जी का प्रभाव
खांसी के साथ कफ आना
डायबिटीज
साइनस का दर्द
शरीर में सूजन
त्वचा में पीलापन
अर्थराइटिस
निमोनिया के कारण सीने में जकड़न
टीबी होना
शरीर फूलने लगना
बेचैनी होना
हर काम सुस्ती के साथ करना और शरीर में ऊर्जा की कमी होना
गले में खराश के साथ कफ आना
शरीर में खुजली होना
पेशाब और पसीना असंतुलित हो जाना

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