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इसके पीछे का मुख्य कारण है मोटापा और ज्यादा मीठा या ऐसा खाना लेना जिससे शरीर में ग्लुगोज की मात्रा बढ़े या मोटापा बढ़े। मधुमेह का यह प्रकार भी कई जोखिमों को बढ़ा सकता है, लेकिन इसे आहार में और जीवनचर्या में बदलाव करके बड़ी आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
डायबिटीज एक क्रोनिक यानी लंबे समय तक चलने वाली या कभी न ठीक होने वाली हेल्थ कंडीशन है। मधुमेह यानी डायबिटीज में आपके द्वारा सेवन किये गए खाद्य पदार्थों को ऊर्जा में परिवर्तित होने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। बता दें कि आपका शरीर आपके द्वारा लिए जाने वाले आहार को शुगर (ग्लूकोज) में तोड़ देता है और इसे आपके ब्लड स्ट्रीम में रिलीज़ कर देता है।
जब आपका ब्लड शुगर स्तर बढ़ता है, तो यह आपके पैंक्रियाज को इंसुलिन (पैंक्रियाज में बीटा सेल्स द्वारा बनने वाला हार्मोन है) रिलीज़ करने का संकेत देता है। इंसुलिन आपके शरीर की कोशिकाओं में ब्लड शुगर को पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है, जिससे कि शरीर शुगर को ऊर्जा के रूप में उपयोग कर सके।
वहीं, जब आपका शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता है या पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उपयोग नहीं कर पाता तो इससे आपके रक्तप्रवाह में ब्लड ग्लूकोज या शुगर का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में ज्यादा ब्लड शुगर के कारण डायबिटीज की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
बता दें डायबिटीज के तीन प्रकार हैं, टाइप 1, टाइप 2 और जेस्टेशनल। मधुमेह के लगभग 90-95% मामलें टाइप 2 डायबिटीज के होते हैं और 5-10% मामलें टाइप 1 डायबिटीज के होते हैं। ऐसे में यह माना जा सकता है कि टाइप 2 डायबिटीज सामान्य है और टाइप 1 दुर्लभ। वहीं, जेस्टेशनल डायबिटीज गर्भावस्था के दौरान बढ़े हुए शुगर स्तर के कारण होती है।
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