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गर्भावस्था में दिल की धड़कन तेज होने के कारण
ऐसे में हृदय 30 से 50 प्रतिशत तक ज्यादा पंप करता है। इसलिए इस दौरान दिल की धड़कन 10 bpm से 20 bpm तक बढ़ जाती है, जो आमतौर पर 60 से 80 bpm होती है। यह तीसरी तिमाही के आसपास और भी ज्यादा बढ़ सकती है।
गर्भावस्था हर महिला के लिए एक सुखद पल होता है। इस दौरान एक मां अपने बच्चे के लिए कई सपने संजोती है लेकिन यह अवस्था कई बार चुनौतियों से भरी होती है। गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं का दिल सामान्य से तेजी गति से धड़कता है। इस अवस्था में दिल का तेज धड़कना नॉर्मल बात नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान हार्ट रेट लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। हार्ट रेट में यह वृद्धि गभर्वती महिलाओं में एपीसोडिक हार्टबीट का कारण बन सकती है। इसे टैचीकार्डिया कहते हैं, इसके लक्षणों को तेज, रेसिंग या स्पंदन की भावना के रूप में देखा जा सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि शिशु को पोषण और ऑक्सीजन देने के अलावा बाकी कामों के लिए दिल को ज्यादा पंप करना पड़ता है। कई बार अंतनिर्हित चिकित्सा स्थितियों के कारण भी दिल की धड़कन तेज हो सकती है। वैसे इससे कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन स्थिति को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। यहां हम आपको गर्भवती होने पर तेज दिल की धड़कन के कारणों, लक्षणों और इलाज के बारे में बता रहे हैं।
गर्भावस्था में दिल की धड़कन तेज होने के कारण
हृदय और ब्लड सकुर्लेशन में बदलाव - गर्भाशय को बच्चे के विकास के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए ज्यादा खून की जरूरत होती है। ऐसे में हृदय 30 से 50 प्रतिशत तक ज्यादा पंप करता है। इसलिए इस दौरान दिल की धड़कन 10 bpm से 20 bpm तक बढ़ जाती है, जो आमतौर पर 60 से 80 bpm होती है। यह तीसरी तिमाही के आसपास और भी ज्यादा बढ़ सकती है।
अन्य कारण
गर्भाशय के आकार में बदलाव - भ्रूण के बढ़ने पर गर्भाशय का आकार भी बढ़ जाता है। इससे गर्भाशय में अतिरक्त रक्त पंप करने के लिए हार्ट सामान्य से ज्यादा धड़कता है।
ब्रेस्ट में बदलाव - जब आप गर्भवती होती हैं, तो ब्रेस्ट ग्लैंड काम करना शुरू कर देते हैं और शरीर को स्तनपान के लिए तैयार करते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डायजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के अनुसार जैसे-जैसे स्तन बढ़ते हैं और टिशू बड़े होते हैं, ब्रेस्ट में ब्लड सकुर्लेशन भी बढ़ता है। इसका मतलब है कि इस समय दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
जीवनशैली कारक - सिगरेट, शराब, धूम्रपान, व्यायाम और कैफीन का जरूरत से ज्यादा सेवन भी हार्ट की गति को बढ़ा सकता है।
गर्भवती महिलाओं में धड़कन तेज होने के लक्षण
गर्भावस्था के दौरान दिल की धड़कन के तेज होने के कई लक्षण हैं, जैसे -
सांस लेने में दिक्कत होना
चक्कर आना
बार-बार बेहोशी आना
यदि आप इन लक्षणों को बार-बार महसूस कर रही हैं, तो डॉक्टर को दिखाएं।
गर्भावस्था के दौरान तेज हृदय गति से कैसे निपटें
दिल की धड़कन का तेज होना सामान प्रक्रिया है लेकिन इसकी वजह से आपको और आपके बच्चे को कोई परेशानी न हो, इसके लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव कर सकते हैं।
स्ट्रेस होने पर कैमोमाइल टी ले सकते हैं। इससे तनाव कम होता है।
रात को पर्याप्त नींद लें।
योग, गहरी सांस लेने और ध्यान जैसी रिलेक्सेशन टेकनीक का अभ्यास करें।
शरीर को हाइड्रेट रखें।
अनदेखा ना करें
गर्भावस्था के दौरान दिल की धड़कन तेज होना स्वभाविक रूप से शरीर में आ रहे बदलावों का एक हिस्सा है। इससे कोई नुकसान नहीं है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आपको इससे संबंधित किसी भी लक्षण को अनदेखा करना है। डॉक्टर इस दौरान पर्याप्त आराम और तनाव से दूर रहने की सलाह देते हैं।
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