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जन्म से पहले का आपका जीवन –
परिचय
आप और आपके परिचितों ने जन्म से पहले के जीवन में बताए गए जीवन से पहले की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करके अपने जीवनों की शुरुआत की है। अपनी यात्रा के बारे में और ज़्यादा जानने और यह बेहतर तरीके से समझने के लिए कि प्रसवपूर्व अनुभव सभी के लिए इतना ज़रूरी क्यों है, आगे पढ़ें।
मूवी और आगामी छवियों को केवल दोस्ती के तौर पर उन लोगों से शेयर करके, जिन्होंने इससे पहले ऐसी छवियां कभी नहीं देखी थीं, आप उन्हें उन बढ़ते हुए लोगों के साथ जुड़ने में सक्षम बनाते हैं जो प्रत्येक गर्भावस्था के आश्चयों, खूबसूरती और महत्व के ज्ञान से परिचित और शिक्षित हो चुके हैं।
मैंने यह काम बस कौतुहलवश शुरू किया था, मैं इसमें एक निरंतर रुचि के साथ अब तक लगा रहा/लगी रही हूं और इस बढ़ती हुई भावना के साथ यहां तक पहुंच चुका हूं कि मैं [मानव] प्रजाति और लोगों के भविष्य के लिए बेहद ज़रूरी विषय पर काम कर रहा हूं
“गर्भ के भीतर के इस रोमांचक संसार में आपका स्वागत है जहां हर शिशु विकसित होता है और जन्म के बाद के जीवन के लिए तैयार होता है। यही वह जगह भी है जहां मां और शिशु के बीच लगाव पनपना शुरू होता है और जहां प्रत्येक शिशु के पूरे जीवन के स्वास्थ्य की आधारशिला आंशिक रूप से रखी जाती है।”
एक बेहद व्यस्त समय और जगह
यह सक्रिय शिशु अभी हाल में बस इतना बड़ा हुआ है कि यह पहली बार अपने दोनों हाथों को एक साथ छू सकता है। आप बाएं निपल को भी देख सकते हैं (0:05–0:07), उसकी नाभि रज्जु का बेस (0:09–0:11) और उसके दोनों हाथ। धड़ के दो हिस्से जुड़ते वक्त पेट के बीच की रेखा के साथ एक सीधी सफ़ेद रेखा बनी। स्रोत: प्रसवपूर्व विकास DVD का जीव-विज्ञान (BPD वीडियो)
प्रसवपूर्व उम्र के बारे में कुछ शब्द
इस पृष्ठ के संपूर्ण प्रसवपूर्व समय निषेचन से शुरू करके संदर्भित किया गया है, महिला की पिछली मासिक अवधि (LMP) से नहीं। महिला के LMP से संदर्भित समकक्षी प्रसवपूर्व उम्र की गणना करने के लिए, यहां दिए गए निषेचन समय में दो हफ़्ते जोड़ लें।
तैयारी का समय
वास्तव में गर्भावस्था का नौ महीनों का समय जन्म के बाद के जीवन की तैयारी का समय है। कुछ अपवादों को छोड़कर, एक नवजात शिशु जितने काम करता दिखता है लगभग उन सभी का अभ्यास जन्म से हफ़्तों या महीनों पहले बारंबार कर लिया गया होता है।
अतुलनीय संबंध
निषेचन (या गर्भाधान) के समय से लेकर, विकसित होते शिशु और मां निरंतर साथ में काम करते हैं और एक-दूसरे के साथ अनेक और ऐसे जटिल तरीकों से संवाद करते हैं जिन्हें अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है। गर्भावस्था मां और शिशु के बीच स्वार्थरहित टीमवर्क की अद्वितीय अभिव्यक्ति है जिसमें दोनों एक स्वस्थ पूर्णकालिक गर्भावस्था और सुरक्षित प्रसव से गुज़रते हुए साथ-साथ सब कुछ करते हैं, सब कुछ शेयर करते हैं और सब कुछ अनुभव करते हैं।
जैसी कि आपको अपेक्षा हो सकती है, एक मां का स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती शिशु के स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती से गुंथी होती है। कुछ अपवादों को छोड़कर, जो मां के लिए अच्छा होता है वह शिशु के लिए भी अच्छा होता है और जो उसके शिशु के लिए अच्छा होता है वही मां के लिए भी अच्छा होता है। इसी तरह से, मां के लिए जो नुकसानदायी होता है वह शिशु के लिए भी नुकसानदायी होता है और जो शिशु के लिए नुकसानदायी होता है वह मां के लिए भी नुकसानदायी होता है।
मां और शिशु के बीच का विशेष टीमवर्क लगभग तुरंत ही शुरू हो जाता है। पहला गर्भावस्था हार्मोन, जिसे गर्भावस्था का शुरुआती घटक कहते हैं, वह निषेचन के 24 घंटे बाद ही मां के खून में दिख जाता है। यह हार्मोन शिशु की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए मां का शरीर बनाना शुरू कर देता है।1
प्रसवपूर्व वृद्धि और विकास जीवन भर के स्वास्थ्य पर असर डालते हैं
पिछले 30 सालों में हुए अनुसंधान से ऐसे कई तरीके ज़ाहिर हुए हैं जिनमें शिशु का प्रसवपूर्व वातावरण और बढ़ने का तरीका जीवन भर के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
समाज वृद्धि और विकास की अच्छी राहें बनाकर आगामी पीढ़ी को सबसे बढ़िया तोहफ़ा दे सकता है।
कुछ उदाहरण ये रहे, प्रसवपूर्व विकास के दौरान खराबी अनुभव करने वाले शिशुओं को अपने बाद के जीवन में दिल का दौरा,2 आघात(स्ट्रोक),3 उच्च रक्तचाप,4 और टाइप II मधुमेह(डायबिटीज़)5 होने की संभावना ज़्यादा होती है। गर्भावस्था के समय तंबाकू का सेवन करने से कुछ व्यवहार संबंधी विकार6 और मोटापा,7 मधुमेह होते हैं8 और फेफड़ों के काम में कमी रहती है।9
यह साबित हो चुका है कि विकास अवधि के दौरान भ्रूण के आसपास का वातावरण उसके जीवन भर के स्वास्थ्य के निर्धारण के हिसाब से बहुत महत्व रखता है।
निषेचन – एक नए व्यक्ति की शुरुआत
“ 'मानव विकास की शुरुआत निषेचन से होती है10' जब पुरुष और महिला की प्रजनन संबंधी कोशिकाएं आपस में जुड़कर एक अद्वितीय, एकल-कोशिकायुक्त भ्रूण बनाती हैं।”11
निषेचन के दौरान कई क्रियाएं होती हैं, जो मानवों में (एक क्षण के बजाय) लगभग 24 घंटों तक चलती रहती हैं।12 निषेचन आमतौर पर महिलाओं के गर्भाशय नली (यूटेरिन ट्यूब) में होता है, ये महिला के अंडाशय के प्रत्येक छोर से लेकर उसके गर्भाशय तक फैलता है।
मानव निषेचन
निषेचन के शुरू होने पर एकल-कोशिकीय मानव भ्रूण बनता है।
एकल-कोशिकीय भ्रूण (सिंगल-सेल एंब्रियो)
यह एकल-कोशिकीय भ्रूण केंद्र में पुरुष और महिला के प्राक्केंद्रक (प्रोन्यूक्लि) (दो घुमावदार संरचनाओं) को मिलते हुए दिखाता है। प्रत्येक प्राक्केंद्रक में मां/बाप का DNA होता है। [कार्नेगी चरण 1b मानव भ्रूण]
मानव विकास और मानव जीवन एक साथ शुरू होते हैं
मानव निषेचन और एकल-कोशिकीय मानव भ्रूण के बारे में ऐसे कई अकाट्य वैज्ञानिक तथ्य हैं जिनकी आपको जानकारी होनी चाहिए। सभी महत्वपूर्ण हैं। स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण होने के बावजूद, कई विवादित रहते हैं।
निषेचन या गर्भाधान मानव विकास की शुरुआत, एकदम नए, अद्वितीय, आनुवांशिक रूप से स्पष्ट इंसान की शुरुआत; और गर्भावस्था के वास्तविक प्रारंभ को चिह्नित करता है।
निषेचन के समय बना जीवित, एकल-कोशिकीय मानव भ्रूण एक नए मानव के जीवन के मानव विकास का पहला चरण होता है।13
भ्रूणीय जीवन निषेचन से शुरू होता है...
ये याद रखा जाना चाहिए कि प्रत्येक चरण में भ्रूण एक जीवित जीवधारी होता है, यानी, इसका सरोकार, उस वक्त पर अपने रखरखाव के लिए पर्याप्त विधियों से होता है।
विवादित होने की वजह से, इस विषय पर लंबी बहस की ज़रूरत है।
मानव जीवन की शुरुआत को निषेचन के बाद किसी समय पर होना परिभाषित करने से पुराने वैज्ञानिक तथ्य का विरोध होता है। यह बहुत आसानी से समझा जा सकता है। केवल एक निरंतर जीवित रहने वाला भ्रूण ही एक कोशिका से दो में, दो कोशिकाओं से चार में और इस तरह से पूरी गर्भावस्था के दौरान असंख्य कोशिकाओं में बदल सकता है। यह भी उतना ही सच है कि एक मृत भ्रूण न बढ़ सकता है, न बंट सकता है, न बदल सकता है, न ऑक्सीजन ग्रहण कर सकता है, न कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ सकता है, न DNA को दोहरा सकता है और न ही भविष्य में किसी समय ज़िंदा हो सकता है।
चरण 1 में केवल एक कोशिका वाला भ्रूण होता है.... ये भ्रूणीय जीवन की शुरुआत होती है...
वैज्ञानिक प्रश्न के तौर पर, यह तर्क देना कि मानव भ्रूण निषेचन के बाद किसी समय पर ज़िंदा होता है स्वैच्छिक पीढ़ी के सिद्धांत के आधुनिक संस्करण का समर्थन करना है। एक बार मशहूर हुए इस सिद्धांत के प्रस्तावक ये मानते थे कि जीवधारी चीज़ें मृत चीज़ों से भी बन सकती हैं। यह सिद्धांत 160 साल पहले धूल में मिला दिया गया था।
मानव जीवन और मानव विकास कब शुरू होते हैं इन दोनों के बीच का अंतर केवल एक अकादमिक या सैद्धांतिक प्रश्न ही नहीं है। इसका स्वास्थ्य पर असर होता है। निषेचन होते वक्त, शुरुआती लचकदार भ्रूण आसपास के वातावरण से आसानी से प्रभावित होकर नष्ट हो सकता है, इस ख़तरे में मां के गर्भाशय नली (यूटेरिन ट्यूब) या गर्भाशय के अंदर के वातावरण में मौजूद विषैले पदार्थों का भ्रूण के सामने आ जाना भी शामिल है।14
एक अद्भुत कौशल समूह
मां के साथ नज़दीकी से काम करने की क्षमता के अलावा, सरल से दिखने वाले, एकल-कोशिकीय भ्रूण अपने DNA में मौजूद निर्देश समूह का इस्तेमाल करके अपने पूरे जीवन के विकास को दिशा देता है।15
समझने की कोशिश करें, कि जीवन का एक छोटा सा हिस्सा—केवल एक कोशिका, जो सूक्ष्म दुनिया के किसी कोने में पड़ा रहता है—किस तरह से शिशु के शरीर को बनाने के लिए वह बारंबार विभाजित हो सकता है। मिट्टी के इस शुरुआती कण से निकल कर बने असंख्य कोशिकाओं और अंगों के बारे में सोचें: बाल, नाखून, त्वचा, दिमाग, आंखें, वाहिनीहीन ग्रंथि (डक्टलेस ग्लैंड)। सृजनात्मक प्रक्रिया के हर चरण में नज़ाकत भरी जटिल घटनाओं की श्रृंखलाएं होती हैं, जो एक-दूसरे से एक बाल बराबर के अंतर से क्रम में समयबद्ध तरीके से होती रहती हैं।
गुणन और विभाजित होना
“लगभग 24 घंटों में, एक कोशिका वाला भ्रूण दो कोशिकाओं में बंट जाता है, फिर चार और इस तरह से आगे बंटता चला जाता है। इस तरह से एक कोशिका वाले भ्रूण की अनमोल नवजात शिशु के रूप में असाधारण परिवर्तन होने की शुरुआत होती है।”
मानव भ्रूण टाइम-लैप्स (1–8 कोशिकाएं)
यह टाइम-लैप्स वीडियो मानव के शुरुआती भ्रूण में मौजूद गतिशील स्वभाव को दिखाता है। नोट करें कि कैसे एकल कोशिकाएं पूर्ण आकार के गोलों से दूर-दूर हैं जैसा कि आमतौर पर चित्रित किया जाता है।
कोशिकाओं का विभाजन जारी रहता है। लगभग तीन दिनों में भ्रूण 12–16 कोशिकाओं में बंट चुका होता है और कोशिकाओं की गेंद जैसा एक अस्थायी आकार ले लेता है। इस चरण में, भ्रूण को मोरुला कहा जाता है।16
10-कोशिकीय मानव भ्रूण
स्वच्छ अस्तर (ज़ोना पेलुसिडा) भ्रूण के आसपास एक सुरक्षा आवरण बनाता है।
मानवीय मोरुला
मोरुला चरण की अवधि लगभग एक दिन या इसके आसपास ही रहती है।
चूंकि कोशिकाओं का विभाजन जारी रहता है-तरल पदार्थयुक्त कैविटी उभरता है और अब एंब्रियो को ब्लास्टोसिस्ट कहा जाता है।
मानव का शुरुआती ब्लास्टोसिस्ट भ्रूण
यह शुरुआती ब्लास्टोसिस्ट भ्रूण निषेचन के लगभग 4 दिन बाद का है। कोशिकाओं के भीतरी पिंडों का भ्रूण के शरीर में परिवर्तित होना निर्धारित होता है। नोट करें कि सुरक्षा आवरण अभी भी अपनी जगह है।
परिपक्व मानवीय ब्लास्टोसिस्ट
ऐसा अधिक परिपक्व ब्लास्टोसिस्ट भ्रूण निषेचन के लगभग 5वें दिन बनता है। बाहरी कोशिकाएं नाल (प्लेसेंटा) बनाने में मदद करती हैं। नोट करें कि सुरक्षा आवरण (ज़ोना पेलुसिडा) ख़त्म हो चुका है।
आगे सामान्य विकास के लिए, ब्लास्टोसिस्ट को अपने सुरक्षा आवरण से बाहर निकलना होता है। माइक्रोस्कोप में देखा जाए तो, इस प्रक्रिया को “हैचिंग” कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां दिखाई गई “हैचिंग” प्रक्रिया के होने के बजाय गर्भाशय के भीतर प्राकृतिक रूप से बनने वाले मानव भ्रूण का सुरक्षा आवरण टूट कर अलग होकर गिर जाता है।
शुरुआती हैचिंग ब्लास्टोसिस्ट
यहां हम देखते हैं कि भ्रूण ज़ोना पेलुसिडा के किनारों से “बाहर निकल” रहा है।
यह महान निकासी है
यहां आप फिर से देख सकते हैं कि मानव भ्रूण खुद को अपने सुरक्षा आवरण से अलग कर रहा है।
एक बार अलग होने के बाद, भ्रूण अगले बड़े चरण: इंप्लांटेशन, के लिए तैयार है।
मुक्त ब्लास्टोसिस्ट
तुलनात्मक रूप से बड़ा यह ब्लास्टोसिस्ट पहले बगल के सुरक्षा आवरण के अंदर था।
इंप्लांटेशन ऐसी प्रक्रिया है जिसमें भ्रूण खुद को गर्भाशय की दीवार से एम्बेड करते हुए गर्भाशय की कैविटी को छोड़ देता है। यह प्रक्रिया 6ठे दिन से गर्भाशय दीवार से जुड़ने के साथ शुरू होती है और निषेचन के लगभग 12वें दिन ख़त्म होती है।
मानव विकास की गति और जटिलता आपको हैरान कर सकती है। लगातार कोशिका विभाजन और विभिन्न विशेष प्रकार की कोशिकाएं बनने के साथ, नन्हा शिशु बढ़ता और लगातार आकार बदलता रहता है। मानव विकास बेहद व्यवस्थित तरीके से तीव्र गति से होता है।
दिमाग के विकास का पहला लक्षण 18वें दिन दिखाई देता है।17
उस कोशिका [यहां मानव मस्तिष्क को बनाने वाली कोशिका की बात की जा रही है] के केवल अस्तित्व को इस धरती की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होना चाहिए। लोगों को सारा दिन घूमते रहना चाहिए, जब वे जागे होते हैं, बेहद हैरानी से एक दूसरे को कॉल करना चाहिए, केवल उसी कोशिका के बारे में बात करनी चाहिए और किसी बारे में नहीं… अगर कोई मेरे इस जन्म में इसे समझाने में सफल हो गया, तो मैं एक धूम्रलेखी विमान (स्काइराइटिंग एयरप्लेन) चार्टर करूंगा, शायद उसका एक पूरा बेड़ा ही लूंगा और उन्हें ऊंचाई पर भेजकर एक के बाद एक बड़े विस्मयकारी चिह्न, पूरे आकाश में तब तक लिखवाता रहूंगा, जब तक कि मेरा सारा पैसा ख़त्म न हो जाए!
निषेचन के केवल 4 हफ़्तों में ही शरीर के अलग-अलग हिस्सों की शुरुरूआती योजना जैसे सिर, छाती, पेट और हाथ और पैरों का बनना अच्छे से स्थापित हो चुके होते हैं।18
प्रसवपूर्व विकास की प्रमुख अवधियां
“आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है कि शरीर के ज़्यादातर हिस्से पहले 8 हफ़्तों में ही बनकर काम करना शुरू कर देते हैं, हालांकि गर्भावस्था की संपूर्ण अवधि 38 हफ़्तों में जाकर पूरी होती है।”
जन्म से पहले मानव विकास एक आगे से लोड हुई प्रक्रिया है। पहले 8 हफ़्तों में आकार और रूप-रंग में तीव्र गति से बदलाव होते हैं, साथ में शरीर के पहचाने जा सकने वाले हिस्सों की संख्या एकदम से बढ़ जाती है। इसके बाद मानव विकास शरीर के मौजूदा हिस्सों की वृद्धि और कामों की परिपक्वता से चिह्नित होता है।
इसलिए, जन्म से पहले मानव विकास को दो अवधियों में बांटा जाता है।
भ्रूणीय अवधि(एंब्रियोनिक पीरियड) निषेचन से शुरू होकर 8 हफ़्तों या 56 हफ़्तों के पूरा होने पर ख़त्म होती है।19 पूरे समय के दौरान, विकास करते मानव को भ्रूण (एंब्रियो) कहा जाता है, जिसका मतलब “अंदर से विकास होना” होता है।20 इस समय तक शरीर के अधिकतर हिस्से और प्रणालियां पहले दिख जाते हैं और काम करना शुरू कर देते हैं।21
भ्रूण संबंधी अवधि (फ़ेटल पीरियड) एंब्रियोनिक अवधि के खत्म होने के बाद यह जल्द-से-जल्द शुरू हो जाती है और शिशु के जन्म लेने तक चलती रहती है। इस समय तक, विकास करता मानव भ्रूण (फ़ेटस), कहलाता है, जिसका मतलब “अजन्मी संतान” होता है।22 इस अवधि में, शिशु और ज़्यादा बड़ा हो जाता है और उसके शरीर की प्रक्रियाएं और ज़्यादा जटिल होती जाती हैं।23
तेज़ी से बनता धड़कता हुआ दिल
“22 दिनों तक, दिल धड़कना शुरू कर देता है... और तुरंत नवजात शिशु के दिल की तरह दिखने लगता है।”
दिमाग के विकास का पहला लक्षण लगभग 20वें दिन दिखाई देता है।24 22 दिनों में, नली के आकार का दिल धड़कना शुरू कर देता है।25लगभग तुरंत, नीचे दिखाए गए अनुसार दिल आकार बदलने लगता है।26 जैसा कि हम बाद में बार बार देखेंगे, कि विकास करता मानव जैसे ही मौका मिलता है, नए काम करना शुरू कर देता है।
जल्दी-जल्दी परिपक्व होता दिल
एक बार जब नली के आकार का मानवीय दिल बन जाता है, तो यह लगभग तुरंत आकार बदल लेता है। इसके 4 हफ़्तों के बाद (या निषेचन के 7 हफ़्तों के बाद) यह अनिवार्य रूप से पूरा बन चुका होता है।
शिशु के दिल की धड़कन की इस पहली शुरुआत को सन् 1962 में ही रिपोर्ट कर दिया गया था और ये केवल सैद्धांतिक नहीं है।27 अन्वेषकों ने अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल करके निषेचन के 23वें दिन28 और 25वें दिन29 के बाद मानव के धड़कते नन्हे दिल की हल्की संकुचन के दिखने को रिपोर्ट किया है। हालांकि कभी इसे सच माना जाता था, लेकिन इस बात का समर्थन करने के लिए कोई भरोसेमंद आधुनिक प्रमाण मौजूद नहीं है कि दिल धड़कने की शुरुआत 18वें दिन या उससे पहले हो जाती है, जैसा कि कुछ लोगों ने प्रस्ताव किया है।
स्क्रिप्ट से: “4 हफ़्तों में, शिशु एक तरल पदार्थयुक्त थैली से घिर जाता है और उसका दिल उसके पूरे शरीर को पोषक तत्व पहूंचा रहा होता है।”
तरल पदार्थ से भरी थैली उल्व (एमनियन) नामक एक सख्त झिल्ली (मेम्ब्रेन) होती है। थैली के भीतर के तरल पदार्थ को एमनियोटिक तरल पदार्थ (फ़्लुड) कहा जाता है।30 साथ में, यह बढ़ते शिशु की सदमे से रक्षा करता है, गर्भावस्था के पहले आधे समय में तरल पदार्थीय संतुलन कायम रखने में मदद करता है और शिशु को हिलने के लिए गुरुत्वाकर्षण शक्ति से पूरी तरह से मुक्त जगह प्रदान करता है।
रक्तसंचार (सर्कुलेशन)
“यहां आप निषेचन के केवल 4½ हफ़्ते बाद ही उसके दिल को धीमी गति से धड़कते हुए देख सकते हैं। आप देख रहे हैं ना कि दिल के प्रकोष्ठों में रक्त के घुसने और उससे बाहर निकलने के दौरान दिल की प्रत्येक धड़कन के साथ कैसे उसका रंग बदल रहा है?”
दिल जितना जल्दी हो सके उतनी जल्दी धड़कना शुरू कर देता है। 4 हफ़्तों में, इस एकदम नन्हे दिल द्वारा संचारित रक्त दिमाग और शरीर के विभिन्न हिस्सों तक जीवनदायी ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचा रहा होता है।31 यह नन्हा दिल जिस सटीकता से अपना महत्वपूर्ण काम करता है उसे नोट करें!
दिमाग और धड़कता दिल
दिमाग, दिल और यकृत इस चरण की सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण संरचनाएं होती हैं। ये सभी यहां अच्छे से दिखाई दे रही हैं।
धीमी गति से धड़कता दिल
यह दुर्लभ क्लिप रक्त संचार की निरंतरता बनाए रखने के लिए ज़रूरी सटीक सामयिकता और तालमेल को खूबसूरती से चित्रण करती है।
चतुर्प्रकोष्ठीय धडकता हुआ दिल
अगर आप नज़दीक से देखें, तो आप दिल के सभी चारों प्रकोष्ठों में संकुचन की गतिविधि देख सकते हैं। नोट करें कि यकृत कैसे पेट को भरता है। बड़ी लाल रक्त नलिका (रेड ब्लड वैसल) जो यकृत में प्रवेश करती प्रतीत हो रही है वो नाभि रज्जु (अंबिलिकल कॉर्ड) के भीतर की नाभि संबंधी शिरा (अंबिलिकल वेन) है। ये नाल (प्लेसेंटा) से शिशु तक ऑक्सीजनयुक्त खून ला रही है। शुक्रिया, मां!
रक्तसंचार तंत्र को विकास का चुनौतीपूर्ण काम करना होता है और भ्रूण के समग्र विकास के साथ बने रहने के लिए उसे बारंबार रीमॉडल होते रहना होता है, इसके साथ ही भ्रूण की कोशिकाओं की ज़रूरतों की आपूर्ति करने के काम को पूर्णत: करते रहना पड़ता है।
हलचल और मस्तिष्क की तरंगें
“6 हफ़्तों में शिशु हलचल करने लग जाएगा और अगर उसके चेहरे को हल्के से छुआ जाएगा तो वह अपना चेहरा घुमा लेगा। 6 हफ़्तों और 2 दिनों की छोटी सी अवधि में ही मस्तिष्क की तरंगें रिकॉर्ड की जा चुकी हैं।
हरकतों की शुरुआत
हरकतें होना निषेचन से केवल 5½ से 6 हफ़्तों में ही शुरू हो जाती हैं।32 ये सबसे पहली गतिविधियों में से एक होती हैं और ये सबसे ज़्यादा प्राकृतिक काम है जिन्हें हम कर सकते हैं।
चेहरे पर हल्के स्पर्श को भी महसूस करके प्रतिक्रिया देने की क्षमता होना व्यावाहरिक प्रतिक्रियात्मक क्रिया के विकास का पहला प्रमाण होता है।33
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि नसों, हड्डियों और जोड़ों के सामान्य विकास के लिए जन्म से पहले हरकतों का होना ज़रूरी है। यहां तक कि, गर्भावस्था के शुरू में अगर शिशु हरकत न करे, तो सामान्य जोड़ों का बनना असंभव हो जाता है।34 मानव स्वास्थ्य की दृष्टि से हरकतों का होना बहुत ज़रूरी है, जन्म से बहुत पहले से शुरू करके और फिर हमेशा हर उम्र में मानव के अंगों का हरकतें करना ज़रूरी होता है।35
नए फ़ीचर्स के बारे में छानबीन करना
इस वीडियो में दिमाग अच्छी तरह से दिख रहा है और आंखें तेज़ी से बदल रही हैं।
सबसे पहली रिकॉर्ड की गई मस्तिष्क तरंगें
सबसे पहली मस्तिष्क की तरंगों की रिपोर्ट एक ऐसे भ्रूण से सीधे मापन करके हासिल की गई थी, निेषेचन के बाद जिसकी उम्र अनुमानत: 44 दिन (या 6 हफ़्ते और 2 दिन) थी।36
7-हफ़्ते का भ्रूण
“7 हफ़्तों में, शिशु अपना सिर हिलाने लगता है और उसके हाथों में हरकत होने लगती है।”
सक्रिय रूप से व्यस्त
गर्भाशय में सक्रिय चाल मां के महसूस किए जाने से कई हफ़्ते पहले शुरू हो जाती है। यहां आप निषेचन के लगभग 7 हफ़्ते के बाद शिशु के दिमाग के सामने वाले हिस्से को, धड़कते हुए दिल को और दोनों हाथों को चलते हुए सक्रिय रूप से सिर को घूमते हुए देख सकते हैं। एक बार फिर, आप देख सकते हैं कि कैसे यकृत पेट को पूरा भरता है।
हरकतें शुरू होने के बाद, ज़्यादा जटिलता से युक्त कई अन्य हरकतों के शुरू होते देर नहीं लगती। इन हरकतों में शरीर के अंदर की मांसपेशियों की गतिविधि भी शामिल होती हैं। क्रमाकुंचन (पेरिस्टालसिस) मांसपेशी की समन्वित शिथिलता की और अंतड़ियों की दीवार (इंटेस्टाइनल वॉल) के संकुचन की एक जटिल यात्रारत तरंग होती है, जो निगले गए पोषक तत्वों को पाचन पथ (डाइजेस्टिव ट्रैक) के ज़रिए आगे बढ़ाती है। पेरिस्टालसिस बड़ी अंतड़ी (लार्ज इंटेस्टाइन) में 8वें हफ़्ते से शुरू होती है37 और छोटी अंतड़ी में 9वें हफ़्ते से।38
उंगलियां और पंजे, अद्भुत आंखें
“उसके हाथों की प्लेटों से एक-एक उंगलियां उभर कर आ रही हैं… और उसकी आंखों का विकास तेज़ी से हो रहा है।”
उंगलियों और पंजों की व्युत्पत्ति
निषेचन के 10 या 11 दिनों के बाद अलग-अलग उंगलियां और पंजे हाथ और पैर की प्लेटों से उभरने लगते हैं, इनकी शुरुआत निषेचन से लगभग 6 हफ़्तों के बाद हो जाती है। ये जाना माना तथ्य है कि उंगलियों और पंजों के बीच की कोशिकाएं, अपना उद्देश्य पूरा करने के बाद, नियोजित कोशिका मृत्यु की प्रक्रिया से खुद को ख़त्म कर लेंगी।39
हाथ और पैरों की कोपलें
हाथ और पैरों की कोपलें लगभग क्रमश: 26 और 28 दिनों में, पहली बार दिखती हैं। यहां फिर से, कोमल से दिखने वाली ये कोपलें तीव्र गति से शानदार संरचनाएं बना लेती हैं।
हाथ की प्लेट और कलाई
केवल 7 दिनों के अंदर, हाथ और कलाई के क्षेत्र स्पष्ट हो जाते हैं और हाथ की प्लेट का आकार गोल पैनकेक की तरह हो जाता है। किनारे की शिराएं (मार्जिनल वेन्स) हाथ की प्लेट की रूपरेखा तैयार करती हुई यहां दिख रही हैं।
अब, और ज़्यादा नाटकीय बदलाव होने वाले हैं।
हाथ की प्लेट
जैसे जैसे उंगलियां उभरती हुई दिखने लगती हैं, हाथ की गोल प्लेट डिजिटल किरणों के बीच में चपटी होने लगती है, जिससे वो सीधी रेखाओं के संग्रह जैसी दिखती हैं। प्रत्येक डिजिटल किरण उंगली (या अंगूठे) की हड्डियां और करभिका हड्डी (मेटाकार्पल बोन) बनाएगी।
उभरती हुई उंगलियां
कई दिन बीतने पर, हाथों की विकासशील “नॉचिंग” खुलती जाती है और रोज़ बदलाव दिखने लगते हैं। स्रोत: प्रसवपूर्व विकास वीडियो का जीव-विज्ञान (BPD वीडियो)
उंगलियां
7½ हफ़्तों में, उंगलियों के बीच के ऊतक (टिश्यू) गायब हो जाते हैं। उंगलियों को अब अलग-अलग हिलने की आज़ादी मिल जाती है। नोट करें कि इस 8 हफ़्ते के भ्रूण के हाथ की उंगलियों के पैड कितने मोटे हैं [तीर देखें]। स्रोत: BPD वीडियो
उंगलियों की हरकतें
अगर आप नीचे वीडियो 13 में इस हाथ को ध्यान से देखें, तो आपको अलग अलग उंगलियां हल्के से एक दूसरे के बगल में चेष्टा करती हुई दिखेंगी। इससे हाथ की कुछ “अंदरूनी” मांसपेशियों (इंटरोशियस मसल्स) के शुरुआती काम का पता चलता है।
अलग अलग पंजों का विकास उंगलियों की नकल करता है लेकिन कई दिनों बाद घटित होता है।
आंखें
7 हफ़्तों में आंखें अच्छी तरह से बन जाती हैं लेकिन अभी भी पूर्ण नहीं होतीं। प्रत्येक आंख के पीछे रेटिना की अनेक परतों के साथ उन आंखों की नसें (ऑप्टिक नर्व्स) बन रही हैं।40 प्रत्येक आंख से जुड़ी और उन्हें चलाने वाली कई मांसपेशियां भी उभर रही हैं।
परिपक्व होते लेंस
इस चरण की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है विकसित होते लेंस (लेंस वेसिकल/लेंस पुटिका)। लेंस आखिर में जाकर पारदर्शी बन जाएंगे। उनका काम रोशनी को इस तरह से झुकाना (मोड़ना) होता है कि रेटिना पर दूर और पास रखी वस्तुओं की स्पष्ट और साफ़ छवियां प्रोजेक्ट हों।
“डरने की प्रतिक्रिया के साथ-साथ... पैरों की हरकतें भी देखी जाती हैं।”41
पैर और जननांगीय गांठ (जेनिटल टृयूबर्कल)
यहां आप नीचे से पैर देख सकते हैं। इस चरण में पुरुष और महिला भ्रूणों की जननांगीय गांठें बाहर से एक समान दिखती हैं।
पैर की हरकत, डरने की प्रतिक्रिया
यहां आप देख सकते हैं कि जब उंगलियां लगभग पूरी तरह से अलग हो जाती हैं तो पंजों के बीच एक समय पर हल्की नॉचिंग हो रही है।
“शिशु का चतुर्प्रकोष्ठीय दिल अब लगभग पूरा बन चुका है42 और उसके भीतर जीवनोपयोगी गतिविधि सुचारु रूप से चलने लगी है, दो धड़कनों के बीच में दिल सिर्फ़ थोड़ी देर के लिए ही आराम करता है।”
दिल की धड़कन
यहां आप दोनों निलयों (वेंट्रिकल्स) को देख सकते हैं।
जन्म से पहले मानव का दिल लगभग 54 करोड़ बार धड़क लेता है।43 और यह तो बस शुरुआतशुरूआत है, क्योंकि EHD के अनुमान के मुताबिक मानव का दिल अपनी 80 साल की एक आम ज़िंदगी में 3.2 अरब से ज़्यादा बार धड़कता है।44
अन्वेषकों ने निषेचन के बाद 7½ हफ़्तों में मानव के दिल की विद्युतीय ट्रेसिंग रिकॉर्ड की है। इस उम्र में, दिल का संवाही (कंडक्टिंग) सिस्टम बहुत अच्छे से विकसित हो चुका होता है और इस वक्त की EKG ट्रेसिंग बहुत हद तक नवजात शिशुओं और वयस्कों से प्राप्त EKG से मिलती-जुलती है।45
“7½ हफ़्तों में, शिशु की उंगलियां अलग हो जाती हैं। उसके हाथ और... पैर दोनों मध्यरेखा (मिडलाइन) को छूना शुरू कर देते हैं।”46
हाथ की प्लेटों के बढ़ने के साथ, उभरती उंगलियों (और पैर) के बीच की कोशिकाओं की नियोजित कोशिका मृत्यु होती है ताकि उंगलियां अलग हो सकें।47 शिशु के हाथ (और वैसे ही पैर भी) अब मध्यरेखा में एक-दूसरे तक पहुंचकर एक-दूसरे को छू सकते हैं। उंगली के स्पर्श के साथ उसकी संसार की यात्रा की शुरुआतशुरूआत हो जाती है।
“यहां आप उसकी उभरती पलकों के आसपास उसकी खूबसूरत दाईं आंख देख सकते हैं।”
इस चरण की मानवीय आंख नवजात शिशु और वयस्क की आंख से बहुत हद तक मिलती-जुलती है। यहां आप विकसित होते लेंस और अग्र प्रकोष्ठ (एंटीरियर चैंबर) को देख सकते हैं, जिनके पीछे तुलनात्मक रूप में बड़ा पिछला प्रकोष्ठ (पोस्टीरियर चैंबर) दिख रहा है।
पलकें
पलकें बस अभी दिखना शुरू हुई हैं। ये एक दुर्लभ मौका है जब आप यह महसूस कर सकते हैं कि पलकों के अस्थायी रूप से एक दूसरे से मिलने से एकदम पहले, 7½ हफ़्तों में आंख कितनी उन्नत दिखती है। इस चरण में ओवरबाइट का होना सामान्य और अस्थायी होता है।
आंख के पिछले चैंबर में, आप मानवीय रेटिना का गाढ़ा रंगद्रव्य (पिगमेंट) देख सकते हैं। हालांकि अभी इसने अंतिम स्वरूप नहीं लिया है, यहये पहले से ही अपनी जगह पर हफ़्तों से बना हुआ है!48 आप ऊपर और नीचे की पलकों को भी साफ़-साफ़ देख सकते हैं। इस समय, पलकें आंख की पूरी सतह को जल्दी जल्दी कवर करना शुरू करती हैंहै और जल्दी ही जुड़ जाएंगी।
8-हफ़्ते का अद्भुत भ्रूण
“7 और 8 हफ़्तों के बीच में, शिशु के शरीर के लगभग 2000 अतिरिक्त हिस्से बनकर तैयार हो जाते हैं।”49
7-दिन की अवधि के दौरान 7 हफ़्तों से (या 49 दिनों) से लेकर 8 हफ़्तों (56 दिनों तक) के बीच 7 दिनों में उभरने वाले नए पहचाने जा सकने वाले शरीर के स्थायी हिस्सों की संख्या किसी को भी चकित कर सकती है। शिशु के छोटे आकार और उम्र के बावजूद, एक नए स्तर के सूक्ष्म अंग जैसे कई अस्थिबंध (लिगामेंट), शिराएं (टेंडन), मांसपेशियां, नसें उभरने लगती हैं और रक्तवाहिनी शिराएं (ब्लड वैसल) पहली बार पहचानी जाने लायक बन जाती हैं।शिशु के छोटे आकार और उम्र के बावजूद, एक नए स्तर के सूक्ष्म अंग जैसे कई अस्थिबंध (लिगामेंट), शिराएं (टेंडन), मांसपेशियां, नसें उभरने लगते हैं और रक्तवाहिनी शिराएं (ब्लड वैसल) पहली बार पहचानी जाने लायक बन जाती हैं।
हाथ की धमनियां (आर्टरीज़)
हाथ में खून पहुंचाने वाली धमनियां 8-हफ़्ते के भ्रूण में सूक्ष्म अंग की मौजूदगी का उत्कृष्ट उदाहरण देती हैं। इस स्क्रीनशॉट में उन छोटी धमनियों को कैप्चर किया गया है जो हाथ और उंगलियों में खून भेजती हैं।
हाथ की धमनियां (आर्टरीज़)
हथेली और उंगलियों में खून पहुंचाने वाली धमनियां इस मूवी क्लिप में देखी गईं। यहां दिख रहा धमनियों का पैटर्न हूबहू नवजात शिशुओं और वयस्कों में पाए जाने वाले पैटर्न जैसा है। (अंगूठे के मोटे पैड और कुहनी को नोट करें।)
हाथ की धमनियां (आर्टरीज़)
वयस्क के हाथ की तरह ही, प्रमुख चाप (सुपरफ़िशियल आर्क) हथेली की डिजिटल धमनियों को खून पहुंचाता है। हथेली की प्रत्येक डिजिटल धमनी (पाल्मर डिजिटल आर्टरी) यहां दिखाए गए अनुसार टूट कर दो डिजिटल धमनियों में बदल जाती है। क्या आप देख पा रहे हैं कि हथेली की डिजिटल धमनी (पाल्मर डिजिटल आर्टरी) कहां पर दो डिजिटल धमनियों में बदलती है?
भ्रूणीय प्रॉपर के अंत (स्त्रीबीजजनन के (पोस्टओव्यूलेटरी) 8 हफ़्तों) तक, सभी प्रमुख अस्थिपिंजर, जोड़, मांसपेशी, स्नायु और अंगों के नाड़ी संबंधी (वैस्कुलर) तत्व वयस्क जैसे ही दिखने वाले स्वरूप और व्यवस्था में आ जाते हैं।
8-हफ़्ते के भ्रूण के विवरण
यहां आप एक 8-हफ़्ते के मानवीय भ्रूण के क्रॉस-सेक्शन में दिखने वाली कुछेक विस्तृत संरचनाएं देख सकते हैं। स्रोत: आभासी मानवीय भ्रूण प्रोजेक्ट, कार्नीज चरण 23, खंड 102
8-हफ़्ते का मानवीय मस्तिष्क
“8वें हफ़्ते तक, शिशु का दिमाग इतना जटिल बन चुका होता है कि उसके कुछ हिस्से बिल्कुल नवजात शिशु के दिमाग जैसे दिखने लगते हैं।”50
मस्तिष्क स्तंभ (ब्रेनस्टैम) (मेरुदंड से सबसे नज़दीक मौजूद दिमाग का बेस) के हिस्से और दिमाग का धमनीय रक्तसंचार नवजात शिशु के समान ही दिखते हैं।
अनुपात में अंतर के अलावा, धमनीय पैटर्न वयस्क के समान ही दिखता है। [निषेचन के 8 हफ़्ते बाद मानव मस्तिष्क की धमनीय रक्त आपूर्ति को उद्धृत करते हुए]
8 हफ़्तों में रॉम्बेन्सेफ़लिक न्यूक्लियाई और क्षेत्रों की व्यवस्था नवजात शिशु के समान होती है।
चूंकि मानव मस्तिष्क 8 हफ़्तों में इतना उन्नत हो जाता है, इसलिए कुछ विशेषज्ञों का माना है कि मस्तिष्क का विकास पहले से ही हो रहा होता है।क्योंकि मानव मस्तिष्क 8 हफ़्तों में इतना उन्नत हो जाता है, कुछ विशेषज्ञों का माना है कि मस्तिष्क का विकास पहले से ही हो रहा होता है।
मस्तिष्क के 23वें चरण [निषेचन के 8 हफ़्तों के बाद] की जितनी सराहना होती है, आकृति-विज्ञान की दृष्टि से वह उससे कहीं अधिक उन्नत है, इतना उन्नत कि कार्यात्मक विचार ज़रूरी हो जाते हैं....भ्रूण की सटीक अवधि में रॉम्बेन्सेफ़लिक के तीव्र विकास के तदनुरूपी शुरुआतीशुरूआती व्यावहारिक गतिविधियों से संबंधित होने की संभावना होती है।
“गर्भाशय के भीतर कोई हवा नहीं होती फिर भी शिशु सांस लेने और छोड़ने की हरकतें करना शुरू करता है। इस शुरुआतीशुरूआती वक्त में भी, ज़्यादातर शिशु आपकी ही तरह दाएं या बाएं हाथ के इस्तेमाल को तरजीह देना शुरू कर देते हैं।”
पहली सांस और पहले रुदनरूदन की तैयारी करना
जन्म से पहले की श्वसन हरकतें खून को दिल में वापसवापिस लौटने में और जन्म के बाद श्वसन मांसपेशियों की उनके ज़रूरी कर्तव्यों को पूरा करने में मदद करती हैं। 8वें हफ़्ते में, श्वसन हरकतें कुल समय की केवल 2% दिखती हैं।51 शिशु के बढ़ने के साथ, ये हरकतें वक्त के हिसाब से लगभग 30%–40% दिखती हैं।52
एक पूर्णकालिक नवजात लड़की अपनी पहली गहरी सांस ले सकती है और पहली बार ज़ोर से रो सकती है क्योंकि वो इस क्षण के लिए 30 हफ़्तों से तैयारी कर रही थी! कई घंटों का उसका श्वसन हरकतों का अभ्यास सांस लेते रहने के लिए धैर्य देता है।
दायां और बायां हत्था बनना
अल्ट्रासाउंड के अध्ययन दिखाते हैं कि 75% शिशु निषेचन के 8 हफ़्ते बाद से अपने दाएं हाथ हिलाने को निश्चित प्राथमिकता देना शुरू कर देते हैं। शेष शिशु दो बराबर के आकार के समूहों में बांट दिए जाते हैं, जिनमें से एक समूह बाएंबायां हाथ को प्राथमिकता देने वालों का होता है और दूसरा समूह कोई प्राथमिकता नहीं दिखाता।53
पलकें
यहां आप देख सकते है कि पलकें लगभग पूरी जुड़ चुकी हैं। कुछेक दिनों में ही, यहां दिख रही सफ़ेदसफेद मिलन रेखा पूरी दाईं आंख तक फैल जाएगी। आप दाएं जबड़े और दाएं कान के बगल में हल्के रंग की हंसुली (कॉलर बोन) भी देख सकते हैं।आप दाएं जबडे़ और दाएं कान के बगल में हल्के रंग की हंसुली (कॉलर बोन) भी देख सकते हैं।
उपलब्धि की सराहना होते हुए
“केवल 8 हफ़्तों में, विलक्षण एकल-कोशिकीय भ्रूण, विकसित होकर एक अरब कोशिकाओं में परिवर्तित हो जाता है, जिसमें शरीर के 4,000 हिस्से54 और एक दर्जन प्रणालियां बन चुकी होती हैं।”
केवल 8 हफ़्तों में होने वाला विस्मयकारी रूप-परिवर्तन बेहद जटिल है और असंख्य चरणों का होने के बावजूद, आश्चर्यजनक रूप से त्रुटिरहित है।
उस रोमांच की बस कल्पना करें जब आपको पता चलेगा कि महज़ एक 5 हफ़्ते के भ्रूण की, जो बमुश्किल 1 सेमी लंबा था, आपने उसकी कितनी सारी संरचनाओं को पहचाना। लेकिन हमारा आकर्षण यहीं नहीं रुकता। अगले 3 हफ़्तों में होने वाले बदलावों की प्रगति इतनी तेज़ी से होगी कि उस वक्त जब भ्रूण कीका लंबाई 3 सेमी पहुंचेगी, हमारे लिए परिचित सभी संरचनाओं को न केवल हम पहचानेंगे, साथ ही वे अपनी शारीरिक स्थिति में भी पहले ही पहुंच चुके होंगे। यह महसूस करने के बाद हम अपनी हैरानी को कैसे छिपा सकते हैं कि हमारी सबसे छोटी उंगली की बाहरी अंगुलास्थि (डिस्टल फ़ेलेंक्स) के जितने लगभग लंबे भ्रूण में कितनी उत्कृष्टता मौजूद है?
इस नाटकीय विकासात्मक प्रगति का तुरंत परिणाम ये होता है कि 8-हफ़्ते के मानवीय भ्रूण का समग्र स्वरूप, अब नवजात शिशु के आकृति से पहले से ज़्यादा मिलता-जुलता लगता है, जबकि उसका आकार नवजात शिशु के आकार का एक बहुत छोटा हिस्सा भर होता है।
यह अखंडनीय समानता अचानक से नहीं आती। बल्कि, यह इस तथ्य का अनिवार्य परिणाम होता है कि 8-हफ़्ते के प्रत्येक भ्रूण और प्रत्येक नवजात शिशु में शरीर के हज़ारों एक समान हिस्से मौजूद होते हैं, और वे सभी हिस्से लगभग समान तरीके से व्यवस्थित होते हैं। ये तथ्य दिमाग में रखते हुए, एक समान बाहरी स्वरूपरूप-रंग अपेक्षित रहता है।
भ्रूणीय अवधि
भ्रूणीय अवधि निषेचन के 8 हफ़्तों और एक दिन बीतने के बाद शुरू होती है और जन्म न होने तक चलती रहती है।
“9 हफ़्तों में, शिशु अपने अंगूठे को चूसना,55 निगलना,56 आह भरना,57 और अंगड़ाइयां लेना शुरू कर देता है।58 उसके चेहरे, हाथ और पैरों में अब संवेदना आ चुकी होती है और इन्हें हल्का सा स्पर्श करने से भी प्रतिक्रिया मिलती है।”59
सक्रिय चाल
नाक 13 या 14 हफ़्ते न होने तक सामान्यत: ऊपर की ओर लगी रहती है।नाक 13 या 14 हफ़्तों के न बीतने तक सामान्यत: ऊपर की ओर लगी रहती है। उंगलियों की हल्की साथ-साथ चलने वाली हरकतों को नोट करें (0:05–0:06), घुमावदार नाभि-रज्जु (अंबिलिकल कॉर्ड) (0:07) और जुड़ी हुई पलकें (0:11)।
शुरुआतीशुरूआती भ्रूण नए तरीकों से अपने वातावरण को प्रतिक्रिया देता रहता है। निगलना एक जटिल प्रक्रिया है जो जन्म से पहले अभ्यास की जाने वाली क्षमताओं की बढ़ती सूची में जुड़ जाता है।
त्वचा और मेरुदंड (स्पाइनल कॉर्ड) के रास्ते की लगभग हर नस और यहां तक कि दिमाग के हिस्सों की नसें भी सही जगह पर लगने पर, शिशु पहले ही बेहद उन्नत हो चुका होता है और तीव्र विकास की अवधि में प्रवेश करता है।
“9½ हफ़्तों में शिशु जम्हाई लेना शुरू कर देता है।60 10वें हफ़्ते में, वह चलने की हरकतों का अभ्यास करता है और उसकी उंगलियों की छाप बनने लगती है।”
जम्हाई लेना
जम्हाई लेना कोई आसान बात नहीं है। इसमें असामान्य रूप से सांस को खींचकर सिर को हल्का सा ऊपर उठाकर, सांस छोड़ना होता है।
मनोहारीमनोहर फ़ुटवर्क
आप यहां जो मनोहारीमनोहर फ़ुटवर्क देख रहे हैं, बेशक, यह तो बस शुरूआत है। चलने की समन्वित हरकतें जन्म से बहुत पहले शुरू हो जाती हैं, लेकिन बच्चे के बढ़ने के साथ उसका अभ्यास करना उसके लिए मुश्किल हो जाता है, क्योंकि गर्भाशय के भीतर की जगह जन्म से पहले तक एकदम सीमित रहती हैहै्।
लोग किसी भी उम्र में नाच लेते हैं।
नाचने की शुरुआत
चलने और नाचने की क्रियाएं जन्म से बहुत पहले शुरू हो जाती हैं!
उंगलियां के निशान
उंगलियों के छाप या निशान अद्वितीय पहचानकर्ता होते हैं और 10 हफ़्ते से बनने लगेलग पड़े हैं।61
हाथों और पैरों के नाखून भी बढ़ना शुरू हो चुके हैं।62
“11 हफ़्तों तक, शिशु के मुंह और होंठ पूरी तरह से बन चुके होते हैं63 और उसका आकार और बड़ा होता रहता है।”
चेहरों की भंगिमाओं के साथ लगभग 30 मांसपेशियां शामिल होती हैं।6411वें हफ़्ते से, शिशु इनमें से कई मांसपेशियों का समन्वय करना शुरू करके विभिन्न भंगिमाएं बनाने लगता है।65
“12वें हफ़्ते में, शिशु अपना मुंह खोलने और बंद करने लगता है और अपनी जीभ हिलाता है। उसके हाथ पूरी तरह से बन चुके हैं।”
अगली कैप्चर हुई स्क्रीनों में, हम मुंह की जीभ और तालु देख सकते हैं। परिचित लगती हैं न? ये नवजात शिशुओं की तरह ही दिखाई देते हैं।
मुंह की ऊपरी सतह
मुंह के भीतर का तालूतालु पहले से ही नवजात शिशुओं के तालूतालु के समान दिखता है। मध्यरेखा “मिलन” रेखा दिखाती है कि दाएं और बाएं दोनों छोर कहां आकर मिले थे। आप दाएं गाल के अंदर भी झांक सकते हैं।
मुंह के भीतर की जीभ और तालूतालु
यह चित्र मुंह के भीतर के तालू (हार्ड पैलेट) में स्पष्ट उभार दिखाता है।यह चित्र मुंह के भीतर के तालु (हार्ड पैलेट) में स्पष्ट उभार दिखाता है। ये उभार (जिन्हें रुगी कहा जाता है) सामान्य होते हैं और पूरी ज़िंदगी बने रहते हैं।
तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) परिपक्व होता रहता है। 13 हफ़्तों में, वह खोपड़ी के हिस्सों के अलावा अपने शरीर पर अन्य किसी भी हिस्से में किए गए हल्के स्पर्श को पहचानने लगती है।66
बच्ची अब वसा (फ़ैट) जमा करना शुरू कर देती है।67 वसा की जगहों के उभरने से शिशु को उसे भरने में मदद मिलती है। वसा संचित ऊर्जा होती है जिससे बच्ची जन्म के बाद अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है।
“गर्भावस्था के जारी रहने के साथ, बच्ची बढ़ती रहती है और नए गुण हासिल करती रहती है। सुनना,68 सोने-उठने के चक्र,69 आवाज़ और रोशनी पर प्रतिक्रिया देना70 और रोशनी,71 स्वाद की प्राथमिकताएं तय होना,72 मां की आवाज़ पहचानना,73 और बहुत सारी ऐसी चीज़ें हैं, जो दिलचस्प से भरी प्रसवपूर्व यात्रा का एक आम हिस्सा हैं।”
अभी ज़्यादा साल नहीं गुज़रे हैं कि डॉक्टर ये मानते थे कि शिशु जन्म के 6 हफ़्तों तक मुस्कुराना शुरू नहीं करता।74 अब हम यह जानते हैं कि शिशु मुस्कुराना भी, अन्य आम मानवीय व्यवहारों की तरह, जन्म से काफ़ी पहले शुरू करके, उसका अच्छी तरह से अभ्यास कर चुका होता है।
“वास्तव में गर्भावस्था जन्म के बाद के जीवन की तैयारी करने का समय है। यह खुशी मनाने का वक्त भी होता है और इसमें प्रत्येक नए जीवन के आगमन के साथ मिलने वाली खुशियों, हैरानियों और चुनौतियों की उम्मीद रहती है।”
नवजात शिशु
यह छोटा साथी अब हर नई चुनौती के लिए तैयार है। फिर से शुक्रिया, मां। तुम अद्भुत हो!
“कृपया इस फ़्री वीडियो को अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करें। आप इसे यहां से डाउनलोड कर सकते हैं
अद्भुत गर्भनाल (प्लेसेंटा) और नाभि-रज्जु (अंबिलिकल कॉर्ड)
नाभि-रज्जु मां और बच्चे के बीच एक महत्वपूर्ण इंटरफ़ेस का काम करती है। यह हार्मोन बनाती है, शिशु के शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करती है, ऑक्सीजन पहुंचाती है, कार्बन डाइऑक्साइड निकालती है और बहुत से अन्य काम करती है।
नाभि-रज्जु का गर्भनालीय मूल
यह दुर्लभ चित्र गर्भाशय में कार्यरत गर्भनाल के वैसल्स और नाभि-रज्जु का मूल दिखाता है। स्क्रीन से दाईं ओर को जाते दो वैसल्स नाभि संबंधी पुटिका (वेसिकल), (जिसे पहले पीतक कोष यानी योक सैक कहते थे) से जुड़ता है।
अंदर से गर्भनाल (प्लेसेंटा)
यहां आप गर्भनाल का अंदरूनी दृश्य देख सकते हैं। गर्भनाल के वैसल नाभि-रज्जु के मूल के इर्द-गिर्द केंद्रित रहते हैं। बच्ची, जब गर्भाशय के अंदर दूसरी ओर घूमती है तो, पुरानी टेलीफ़ोन तार की तरह, घुमावदार नाभि-रज्जु अपनी “लंबाई” बदलकर बढ़ती हुई बच्ची तक पहुंच जाती है। स्रोत:
नाभि-रज्जु का मूल
जीवित मानवीय गर्भनाल की छोटी सी झलक सतही वैसल्स की एक जटिल सरणीसारणी दिखाती है जिससे बढ़ती हुई बच्ची को सहारा मिलता है।
नाभि-रज्जु के विवरण
नाभि-संबंधी शिरा (अंबिलिकल वेन) गर्भनाल (प्लेसेंटा) से बढ़ते हुए शिशु में ताज़ा ऑक्सीजनीकृत खून लाती है।नाभि-संबंधी शिरा (अंबिलिकल वीन) गर्भनाल (प्लेसेंटा) से बढ़ते हुए शिशु में ताज़ा ऑक्सीजनीकृत खून लाती है। यहां आप बड़ी नाभि-संबंधी शिरा (अंबिलिकल वेन) और दो छोटी नाभि-संबंधी धमनियों (आर्टरीज़) के रंगों के बीच के असाधारण अंतर को देख सकते हैं।यहां आप बड़ी नाभि-संबंधी शिरा (अंबिलिकल वीन) और दो छोटी नाभि-संबंधी धमनियों (आर्टरीज़) के रंगों के बीच के असाधारण अंतर को देख सकते हैं। यहां आप पृष्ठभूमि में अनेक अपरा संबंधी नसें (प्लेसेंटल वैसल्स) भी देख सकते हैं।
नाभि-रज्जु का बेस
अंतड़ी (इंटेस्टाइन) के घुमावदार चक्र नाभि-रज्जु के बेस के आगे शरीर के बाहर अस्थायी रूप से इकट्ठा हो जाते हैं। ये पूरी तरह से सामान्य प्रक्रिया एकदम ज़रूरी है क्योंकि बड़ा यकृत लगभग पूरे पेट को भर देता है।
लय का मूल
हर बार जब शिशु का दिल धड़कता है, तब उससे पूरी नाभि-रज्जु में एक स्पन्दन (पल्सेशन) बनता है।
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