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लकवे का क्या है इलाज
प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, ताड़ासन, कोणासन, गोमुखासन आदि नियमित करने से काफी हद तक बचाव होता है। इसके अलावा, जो लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, उन्हें फिजियोथेरपी के साथ धीरे-धीरे अनुलोम विलोम और गर्दन और कंधे के हल्के व्यायाम करने चाहिए।
लकवा के घरेलू उपचार... :-
वहीं लकवे के संबंध में आयुर्वेद के डॉ. राजकुमार का कहना है कि पैरालिसिस यानि कि लकवे की बीमारी आजकल काफी सुनने को मिलती है। किसी की पूरी बॉडी पैरालिसिस का शिकार हो जाती है तो किसी की आधी बॉडी इस बीमारी के चपेट में आ जाती है। कुछ लोगों के शरीर के किसी विशेष अंग को भी पैरालिसिस हो जाता है।
उनके अनुसार कई बार अधिक टेंशन लेने से या अचानक कोई सदमा लगने से भी व्यक्ति पैरालिसिस का शिकार हो जाता है। क्योंकि जब अचानक कोई बड़ी घटना हो जाए, तो दिमाग पर इसका असर हो जाता है जिसकी वजह से तंत्रिका तंत्र नष्ट हो जाता है।
प्राकृतिक तरीका
डॉ. राजकुमार का कहना है कि बहुत कम लोग यह जानते हैं कि प्राकृतिक रूप से लकवा जैसी बीमारी का इलाज संभव है। प्राकृतिक चिकित्सा से हर प्रकार के लकवा रोग का उपचार पाया जा सकता है। केवल जरूरत है तो एक-एक करके इस रोग के कारण और उपचार को समझने की।
नींबू पानी का एनिमा
लकवा रोग को दूर करने का एक और इलाज मौजूद है, जो पूर्ण रूप से प्राकृतिक है। इसके अनुसार पीड़ित रोगी को प्रतिदिन नींबू पानी का एनिमा लेकर अपने पेट को साफ करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को ऐसा इलाज कराना चाहिए जिससे कि उसके शरीर से अधिक से अधिक पसीना निकले। क्योंकि पसीना इस रोग को काटने में सहायक होता है।
भापस्नान
एक अन्य उपाय के अनुसार लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन भापस्नान करना चाहिए। स्नान के बाद उसे गर्म गीली चादर से अपने शरीर के रोगग्रस्त भाग को, यानि कि जिस भाग को लकवा हुआ है केवल उसी भाग को ढकना चाहिए। यह करने के बाद अंत में कुछ देर के बाद उसे धूप में बैठना चाहिए। उसके रोगग्रस्त भाग पर धूप पड़ना बेहद जरूरी है।
गर्म चीजों का सेवन
लकवा रोग से पीड़ित रोगी यदि बहुत अधिक कमजोर हो तो रोगी को गर्म चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। इससे उसे रोग से लड़ने की शक्ति मिलेगी। लेकिन पैरालिसिस के जिन रोगियों को उच्च रक्तचाप की समस्या है, वे गर्म चीजों से पूरी तरह से परहेज करें।
रीढ़ की हड्डी को सही रखें
लकवा रोग से पीड़ित व्यक्ति को अपनी रीढ़ की हड्डी को दुरुस्त बनाए रखने की भी कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि मस्तिष्क की इंद्रियां यहीं से हो गुजरती हैं। यहां रोजाना गर्म या ठंडे पानी से सिकाई करनी चाहिए। जरूरी नहीं है कि गर्म पानी से ही सिकाई हो, यदि रोगी को ठंड़ा पानी सही लगे तो वह उससे भी सिकाई कर सकता है।
अन्य उपाय
प्राकृतिक चिकित्सा के भीतर एक और उपाय मौजूद है, जिसे लकवा रोग के मामले में रामबाण समझा जा सकता है। यह उपाय मिट्टी के प्रयोग से किया जाता है। आयुर्वेद ने मिट्टी को उत्तम माना है। क्या आप जानते हैं कि यह मिट्टी कैंसर जैसी बीमारियों को भी काटने की सक्षमता रखती है?
गीली मिट्टी का लेप
लकवा रोग को काटने के लिए लकवा रोग से पीड़ित रोगी के पेट पर गीली मिट्टी का लेप करना चाहिए। यदि रोजाना ना हो सके, तो एक दिन छोड़ कर यह उपाय जरूर करना चाहिए। इसके उसके बाद रोगी को कटिस्नान कराना चाहिए। यदि यह इलाज प्रतिदिन किया जाए, तो कुछ ही दिनों में लकवा रोग ठीक हो जाता है।
ये भी है खास उपाय
डॉ. राजकुमार का कहना है कि इनके अलावा एक थोड़ा अनूठा उपाय भी है, लेकिन अगर सही तरीके से किया जाए तो इसकी सफलता में संदेह नहीं रहता।
इसके तहत लकवा रोग से पीड़ित रोगी को सूर्यतप्त पीले रंग की बोतल का ठंडा पानी दिन में कम से कम आधा कप 4-5 बार पीना चाहिए तथा लकवे से प्रभावित अंग पर कुछ देर के लिए लाल रंग का प्रकाश डालना चाहिए और उस पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से रोगी का लकवा रोग कुछ ही दिनों में ठीक तक हो जाता है।
खानापान का ध्यान रखें
इन उपायों के बाद अगले कुछ उपाय रोगी के खानपान से जुड़े हैं। यदि आगे बताए जा रहे खाद्य पदार्थों को रोगी की रोजाना डायट में जोड़ा जाए, तो उपरोक्त सभी उपाय अपना असर शीघ्र दिखाएंगे।
फ्रूट जूस
सबसे पहले रोगी को जितना हो सके फलों का रस पिलाएं। कम से कम 10 दिनों तक फलों का रस, नींबू का रस, नारियल पानी, सब्जियों के रस या आंवले के रस में शहद मिलाकर पीना चाहिए। इसका अलावा एक और खास प्रकार का रस है जिसमें अंगूर, नाशपाती तथा सेब के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर रोगी को पिलाना है।
पका हुआ ना खाएं
इसके अलावा रोगी को क्या नहीं खाना चाहिए यह भी जानना जरूरी है। रोगी को बाहर का तला-भुना खाना नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा जब तक उसका उपचार चल रहा है और इलाज में कोई उन्नति ना दिखी हो, तब तक उसे पका हुआ भोजन बिलकुल ना दें।
ना लें स्ट्रेस
डॉ. राजकुमार का कहना है कि लकवे रोग के कारण मस्तिष्क का चाहे कोई भी भाग नष्ट हुआ है तो रोग के बढ़ने की संभावना बनी रहती है। इसलिए उपचार के दौरान रोगी के दिमाग को किसी प्रकार की कोई चोट ना पहुंचे, इस बात का खास ख्याल रखा जाना चाहिए।
नहीं तो उपाय हो जाएंगे असफल...
रोगी को किसी प्रकार का कोई मानसिक तनाव ना होने पाए, यह भी ध्यान रखें। यदि वह मानसिक रूप से स्वस्थ होगा, तो जल्द ही उसके ठीक होने की संभावना बनेगी। नहीं तो उपरोक्त बताए सही उपाय एक के बाद एक असफल होते चले जाएंगे।
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