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बुखार के साथ झटके आना
५ वर्ष से कम उम्र के २-४% बच्चों को बुखार के साथ झटके आ जाते हैं.
ये झटके अक्सर १-२ मिनट ही रहते हैं, कभी लम्बे भी चल सकते हैं.
अधिकतर झटके १ से १. ५ साल की उम्र में आते हैं .
ये झटके अक्सर पालकों को भयभीत करते हैं, खासकर पहली बार. लेकिन इनसे कोई दूरगामी नुकसान नहीं होता. इसका बुद्धि पर या मस्तिष्क के विकास पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता.
ये झटके संक्रमण के बुखार या टीकाकरण के बाद के बुखार से आ सकते हैं.
झटके आने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, खास कर बुखार का कारण जानने के लिए, और एक वर्ष से कम उम्र के बच्चो में तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि मष्तिष्क की झिल्लियों के संक्रमण (मैनिंजाइटिस) की सम्भावना का आंकलन किया जाये.
जिन्हे एक बार बुखार के साथ झटके आते हैं, उनमे ऐसा दोबारा होने का खतरा ३०-३५% होता है. खतरा सबसे अधिक पहले २ सालों में ही होता है.
आगे चलकर मिर्गी होने का खतरा अन्य लोगों के लगभग बराबर ही होता है और सामान्यतः इन्हे झटके रोकने की दवाएं नहीं देनी पड़ती है. आम तौर पर विशेष जाँच की आवश्यकता भी नहीं होती।
बुखार के साथ आने वाले झटकों में हम अपने बच्चे की मदद कैसे कर सकते हैं ?
झटके आने पर :
बच्चे को करवट पर लेटा दें.
मुँह में अंगुली, पानी या चम्मच न डालें.
झटके रोकने के लिए बल प्रयोग न करें.
अगर झटके ५ मिनट में न रुकें तो नजदीक उपलब्ध अस्पताल में जाएं.
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