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उच्च रक्तचाप को प्रबंधित करने के लिए जीवनशैली में क्या बदलाव आवश्यक हैं-

कम सोडियम लें जो स्टेज 1 उच्च रक्तचाप में बेहद मददगार है। लगभग 3-6 मिमी एचजी द्वारा रक्तचाप को कम करता है।
वजन कम करें और इसे बनाए रखें। लगभग 20 पौंड वजन में कमी से सिस्टोलिक रक्तचाप को लगभग 10 से 20 मिमी एचजी तक कम किया जा सकता है। यह आपके बॉडी मास इंडेक्स या कमर हिप अनुपात पर काम करके हासिल किया जा सकता है।
अल्कोहल का सेवन कम करें- इससे ब्लड प्रेशर में 2–4 mm Hg की कमी पाया गया है।
योग, प्राणायाम और व्यायाम जैसे एक्सरसाइज को नियमित रूप से करें। इसने रक्तचाप 5 से 8 मिमी एचजी तक कम होता है।
धूम्रपान छोड़ना- दोनों सिस्टोलिक और डायस्टोलिक उच्च रक्तचाप की सीमा को कम करने पर बड़ा प्रभाव डालता है।

इन 3 योग के जरिये हाई बीपी को कर सकते हैं जड़ से खत्म-

अनुलोम विलोम (anulom vilom):अनुलोम-विलोम एक ऐसी एक्सरसाइज है जिसे करने से लंग्स हेल्दी रहते हैं और बॉडी में ऑक्सीजन का प्रवाह सुचारु रूप से होता है। इसे करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है और सांस संबंधी बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है। ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिए लगातार अनुलोम विलोम का अभ्यास किया जा सकता है।

भ्रामरी प्राणायाम (bhramari pranayama): ब्लड प्रेशर को जड़ से खत्म करने में भ्रामरी प्राणायाम बेहद असरदार है। इसे करने से मरीज तनावमुक्त रहता है। इस प्राणायाम को रोजाना दोहराने से ब्लड प्रेशर. थायराइड, माइग्रेन और साइनस की समस्या से राहत मिलती है।

शीतली प्राणायाम (sheetali pranayama): ये प्राणायाम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में बेहद मददगार है। बाबा राम देव के मुताबिक जो लोग इस प्राणायाम को रेगुलर करते हैं उनका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। इसे करने से एसिडिटी और पेट के अल्सर की समस्या दूर होती है। ये प्राणायाम पाचन को दुरुस्त करता है और ब्लड प्रेशर को भी कम करता है। इसे करने से तनाव दूर होता है और दिल के रोगों का खतरा भी कम होता है।

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