Login
$zprofile = 'profile'; $zcat = 'category'; $zwebs = 'w'; $ztag = 'tag'; $zlanguage = 'language'; $zcountry = 'country'; ?>
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
Neurological Disorder: हाथ कांपने की समस्या है इस बीमारी का इशारा
कुछ लोगों को सामान पकड़ते समय, कुछ लिखते समय या अन्य काम करते समय हाथ कांपने की दिक्कत होती है। आमतौर पर इस तरह की दिक्कत बड़ी उम्र के लोगों में देखने को मिलती है। लेकिन कई केसेज में यह समस्या किसी टीनेजर बच्चे को भी हो सकती है...
कोई सामान पकड़ते समय या कुछ समय के लिए हाथ सीधा रखने की कोशिश के दौरान लगातार हाथ का कांपना और इस पर चाहकर भी नियंत्रण ना कर पाना ट्रेमर्स के लक्षण होते हैं। यह एक ऐसी समस्या है, जो हाथ कांपने से शुरू होती है और ध्यान ना दिए जाने पर पार्किंसन डिजीज में बदल सकता है। यहां जानें क्यों होती है हाथ कांपने की ऐसी समस्या...
इन कामों में होती है दिक्कत
-जिन लोगों को हाथ कांपने की दिक्कत होती है वे कैंची का उपयोग करने, सुईं में धागा डालने, सब्जी काटने, लिखने, देर तक टाइपिंग करने जैसे उन कामों को करने में दिक्कत का अनुभव करते हैं, जिनमें हाथों और ब्रेन के बीच अधिक सामंजस्य बनाए रखने की जरूरत होती है।
हाथ कांपने की समस्या
-हाथ का कांपना, उंगलियों में कंपन्न होना। पूरी बांह का कांपना या फिर सिर्फ कलाई से लेकर ऊंगलियों में कंपन्न होना। ये कुछ इस तरह की दिक्कते हैं, जो किसी व्यक्ति के शरीर में बहुत धीरे-धीरे शुरू होती हैं। लेकिन आगे चलकर ये इस तरह गंभीर हो जाती हैं कि व्यक्ति कोई भी ध्यान लगाकर करने वाला काम या सधा हुआ काम नहीं कर पाता।
क्यों होती है हाथ कांपने की दिक्कत?
-किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह की दिक्कत ब्रेन की ऐक्टिविटीज से जुड़ी होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब शरीर की कुछ खास कोशिकाएं किसी भी चोट या बीमारी के कारण दब जाती हैं, तब व्यक्ति में इन दिक्कतों की शुरुआत होती है।
इस बीमारी की वजह
-चोट के अलावा इस बीमारी के कारण वंशानुगत भी होते हैं। यदि माता के परिवार में यह दिक्कत किसी को रही होती है तो बेटे में यह बीमारी जाने के चांस बढ़ जाते हैं। वहीं, अगर पिता के परिवार में किसी को इस तरह की दिक्कत होती है तो बेटी में इस बीमारी के ट्रांसफर होने की आशंका अधिक होती है।
ध्यान ना देने पर
-यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान ना दिया जाए तो आगे चलकर यह पार्किंसन रोग में बदल सकती है। इस बीमारी में व्यक्ति की चाल धीमी हो जाती है। वह चाहकर भी तेज गति से नहीं चल पाता है। हाथों में कंपन्न की स्थिति अधिक गंभीर रूप ले लेती है।
-चेहरे के एक्सप्रेशंस पर नियंत्रण नहीं रहता है। पलक झपकने, बात करने, चलने, मुड़ने यहां तक कि उठने-बैठने में भी दिक्कत होने लगती है। ऐसा लगने लगता है, जैसे अपने शरीर के जोड़ों पर और कुछ अंगों पर अपना नियंत्रण ही नहीं रह गया है।
खाना खाने में होती है दिक्कत
-रोगी को शुरुआत में खाना चबाने में दिक्कत होती है और फिर खाना निगलने में भी समस्या होने लगती है। पानी का गिलास पकड़ना आदि संभव नहीं हो पाता है। अगर इन सब लक्षणों के बाद भी बीमारी को अनदेखा किया जाए तो आगे चलकर व्यक्ति को बोलने में भी दिक्कत होने लगती है।
इलाज से संबंधित बातें
-अगर आप हाथ में कंपन्न की समस्या होने पर ही डॉक्टर से मिल लेंगे तो इलाज गंभीर रूप नहीं ले पाएगा। यदि किसी व्यक्ति में यह दिक्कत गंभीर रूप ले चुकी है तो दवाइयों और सर्जरी के जरिए इसका इलाज संभव है।
-इस समस्या के निदान के लिए आप फिजिशियन, न्यूरॉलजिस्ट, सायकाइट्रिस्ट से मिल सकते हैं। आपकी स्थिति के हिसाब से ये आपकी बीमारी से जुड़ी सलाह और दवाई आपको सुझाएंगे।
| --------------------------- | --------------------------- |