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जब आप जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं तो यह दैनिक जीवन को प्रभावित करना शुरू कर देता है. इससे नींद न आना, भूखन लगना, अवसरों की कमी होना, रिश्तों और वर्कप्लेस पर समस्याएं होने लगती हैं. यह समस्या तह और भी बढ़ जाती है, जब यह आपके कामकाज पर असर डालने लगता है. अफवाह नेगेटिविटी को जन्म देता है.

बहुत ज़्यादा सोचने से हो सकती हैं ये 6 बीमारियां !

1.यह आपके मस्तिष्क को प्रभावित करता है

आप शायद यह कहें कि यह बात किसे नहीं पता लेकिन सोच और तनाव के सबसे बड़े शिकारों में से एक मस्तिष्क है। तनाव का आपके दिमाग पर गहरा असर पड़ता है। कोर्टिसोल आपके मस्तिष्क की हिप्पोकैम्पस (hippocampus) कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और उन्हें खत्म कर सकता है। बहुत ज़्यादा सोचने से दिमाग के काम करने के तरीके में बदलाव आ सकता है क्योंकि यह उसकी कनेक्टिविटी में बदलाव का कारण बन सकता है। लगातार तनाव चिंता और मूड स्विंग जैसी मानसिक समस्याओं का कारण बनता है।

2.यह आपके पाचन तंत्र को प्रभावित करता है

बहुत ज़्यादा सोचने से तनाव पैदा कर सकता है, जिसका असर आपके पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है। जठरांत्र या गैस्ट्रोइंस्टेटाइनल समस्याएं जैसे पेट में जलन, इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम, जठरांत्र के काम करने के तरीके में बदलाव और गैस्ट्रिक सीक्रेशन में परिवर्तन, इंस्टेटाइनल पर्मीबिलिटी और आंतों की सूक्ष्मजीविका में परिवर्तन भी तनाव के कारण होता है।.

3.यह आपके दिल को प्रभावित करता है

सोच और चिंता से आपके दिल की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है और वह आपको कई बीमारियों के ख़तरे में डाल सकता है। छाती के दर्द, टैचीकार्डिया (tachycardia), चक्कर आना ऐसी ही कुछ समस्याएं हैं जो बहुत अधिक सोचने की वजह से होती हैं। डिप्रेशन, लत और सोने से जुड़ी परेशानियां लगातार चिंता करने की आदत का नतीज़ा होती हैं और ये समस्याएं लगातार कठिन भी होती रहती हैं।.

4.यह आपकी त्वचा पर बुरा असर डाल सकता है

लगातार चिंता, तनाव और बहुत अधिक सोचने से आपकी स्किन या त्वचा भी प्रभावित होती है। चिंता के कारण भावनात्मक तनाव बढ़ सकता है या यह सोरायसीस (alopecia), एपोटीक डर्माटिटाइस (areata) गंभीर खुजली, एलोपेशिया एरियाटा (alopecia areata), और सीब्रोरहाइक डर्माटाइटिस (seborrheic dermatitis) जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। तनाव शरीर में सूजन का भी कारण बनता है, जो त्वचा पर दानों या पिम्पल के रुप में दिखायी पड़ती है।.

5.यह प्रतिरक्षा प्रणाली को गड़बड़ा सकता है

क्या आपने गौर किया है कि जब आप तनाव या चिंतित होते हैं तो आप अक्सर बीमार पड़ जाते हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि तनाव शरीर में कोर्टिसोल को उत्पन्न करता करता है, जिससे रोगप्रतिरोधक प्रणाली कमज़ोर हो जाती है। जब आपके शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था दब जाती है, तो यह संक्रमण और रोगों की संभावना बढ़ने की वजह बन जाता है।.

6.यह कैंसर के खतरे को बढ़ाता है

ज़्यादा सोचने से हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-एड्रेनल एक्सिस के निरंतर सक्रिय होने और तनाव होता है। इसकी वजह से आपका इम्यून रिस्पॉन्स कमज़ोर हो जाता है और इसके चलते कुछ विशेष प्रकार के कैंसर की संभावना बन जाती है।.

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