Login
$zprofile = 'profile'; $zcat = 'category'; $zwebs = 'w'; $ztag = 'tag'; $zlanguage = 'language'; $zcountry = 'country'; ?>
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
बलगम वाली खांसी
खांसी एक परेशान कर देने वाली समस्या है, जो संक्रमण, एलर्जी व अन्य कई कारणों से हो सकती है। खांसी होने पर आमतौर पर दो से तीन दिन का इंतजार किया जाता है और फिर उसके लिए दवाएं ली जाती हैं। लेकिन कई बार दवाएं लेने के बाद भी खांसी कम नहीं होती है और ऐसे में हम उलझन में पड़ जाते हैं। लेकिन आपको जानकारी होना जरूरी है कि खांसी भी अलग-अलग प्रकार की हो सकती हैं और इनमें से एक है बलगम वाली खांसी। इसे प्रोडक्टिव कफ (Productive cough) भी कहा जाता है, जो खांसी का एक अलग प्रकार है। इस खांसी में बलगम व कफ अधिक मात्रा में बनता है और इसलिए ही इसे बलगम वाली खांसी कहा जाता है। इस तरह की खांसी फेफड़ों में जमी बलगम को बाहर निकालने में मदद करती है और इसलिए इसे नियंत्रित नहीं किया जा जाना चाहिए। खांसी के साथ अधिक मात्रा में बलगम आने के साथ-साथ छाती में भारीपन महसूस होना और सांस लेने में दिक्कत होना आदि इसके प्रमुख लक्षणों में से एक हैं। यह आमतौर पर वायरल व बैक्टीरियल संक्रमण समेत कई समस्याओं के कारण हो सकती है।
बलगम वाली खांसी के लक्षण
जैसा कि इसके नाम से पता चलता है खांसी के साथ बलगम या कफ निकलना ही बलगम वाली खांसी सबसे प्रमुख लक्षण माना जाता है। खांसी के दौरान निकलने वाले इस बलगम व कफ में आमतौर पर बैक्टीरिया, मृत ऊतक और कोशिकाओं के टुकड़े होते हैं। बलगम वाली खांसी से कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्न को शामिल किया जाता है -
छाती में बलगम जमना (छाती में भारीपन महसूस होना)
सांस लेने में दिक्कत होना (थोड़ी बहुत या गंभीर रूप से)
बुखार होना
नाक बहना
नाक का बलगम बार-बार गले में जाना
डॉक्टर को कब दिखाएं
अगर थोड़ी बहुत खांसी है तो एक दो दिन घर पर ही उपाय करें और अगर इससे आराम नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर से बात करें। वहीं अगर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।
बलगम वाली खांसी के कारण
बलगम वाली खांसी के निम्न कारण हो सकते हैं -
सामान्य सर्दी-जुकाम (फ्लू) के रूप में फेफड़ों में वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन होना
अस्थमा, निमोनिया, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों में घाव बनने जैसी कोई समस्या होना
गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी) जिसमें पेट के मौजूद अम्ल वापस भोजन नली (इसोफेगस) में आ जाएं। गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज के एक लक्षण के रूप में भी बलगम वाली खांसी विकसित हो सकती है।
पोस्टनेजल ड्रिप जिसमें नाक का द्रव लगातार गले की तरफ बहता रहता है और इस कारण से भी व्यक्ति को बलगम वाली खांसी के लक्षण विकसित हो सकते हैं। ऐसे में आपको बार-बार गला साफ करने की आदत भी पड़ जाती है।
इसके अलावा कुछ अन्य कारक भी हैं, जो बलगम वाली खांसी होने के जोखिम बढ़ा सकती है। सिगरेट पीना या तंबाकू का सेवन करना दोनों स्थितियों में गला खराब हो जाता है और फेफड़ों को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
बलगम वाली खांसी के जोखिम कारक
बलगम वाली खांसी होने का खतरा आमतौर पर निम्न स्थितियों में ज्यादा होता है, जैसे -
सिगरेट पीना या सिगरेट पी रहे किसी व्यक्ति के संपर्क में आना
श्वसन तंत्र में होने वाले किसी संक्रमण के संपर्क में आना
किसी प्रकार की एलर्जी होना (ऐसे में एलर्जन के संपर्क में आना आपको खांसी होने का खतरा बढ़ा सकता है)
वातावरण में भी कई ऐसे कारक मौजूद हो सकते हैं, जो आपको खांसी होने का खतरे को बढ़ा सकते हैं।
फेफड़ों से संबंधित रोग होना भी आपको बलगम वाली खांसी होने के खतरे को बढ़ा देते हैं, इनमें आमतौर पर फेफड़ों में संक्रमण व सीओपीडी जैसी बीमारियां शामिल हैं।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को बलगम वाली खांसी होने का खतरा अधिक रहता है, ऐसा इसलिए क्योंकि महिलाएं खांसी के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।
बलगम वाली खांसी का निदान
बलगम वाली खांसी एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जिसका निदान करना भी काफी आसान होता है। निदान के दौरान डॉक्टर मरीज से उसको हो रहे लक्षणों के बारे में पूछते हैं और साथ ही स्टेथोस्कोप की मदद से खांसी के दौरान आ रही ध्वनि का करीब से सुना जाता है। हालांकि, बलगम वाली खांसी के कारण का पता लगाने के लिए कुछ अन्य टेस्ट किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए अस्थमा जैसी समस्याओं का पता लगाने के लिए मेथाकोलाइन चैलेंज नामक टेस्ट किया जा सकता है।
बलगम वाली खांसी का इलाज
बलगम वाली खांसी के इलाज का मुख्य लक्ष्य छाती में जमे हुए बलगम को निकालना होता है। डॉक्टर कुछ प्रकार दवाएं देते हैं, जो बलगम निकालने का काम करती हैं इन दवाओं को एक्सपेक्टोरेंट्स (Expectorants) के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि, अगर बलगम वाली खांसी किसी अन्य बीमारी के कारण विकसित हुई है, तो साथ ही साथ इसका इलाज भी किया जाता है। उदाहरण के रूप में अगर अस्थमा के कारण बलगम वाली खांसी विकसित हुई है, तो इसका इलाज करने के लिए इनहेल्ड ब्रोंकोडायलेटर्स का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं निमोनिया और फेफड़ों में घाव बनने की स्थिति या इलाज आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ किया जाता है। ठीक इसी प्रकार अगर किसी अन्य स्वास्थ्य समस्याके कारण बलगम वाली खांसी हो गई है, तो उसके अनुसार ही इलाज शुरू किया जाता है औऱ साथ ही ही साथ बलगम को निकालने वाली दवाएं दी जाती हैं।
इलाज के दौरान डॉक्टर इन बातों का ध्यान रखने की सलाह भी देते हैं -
पर्याप्त पानी पिएं और शरीर में पानी की कमी न होने दें
सोते समय सिर को नीचे अतिरिक्त तकिए लगाएं ताकि रात के समय खांसी कम हो
कमरे के तापमान को सामान्य रखें
कोई भी ऐसी गतिविधि न करें जिससे आपको खांसी हो दौड़ना या उंची आवाज में बोलना
सिगरेट व अन्य प्रकार के धूम्रपान न करें और न ही धुएं वाली जगह पर जाएं
रात को सोने से आधा घंटा पहले एक टेबलस्पून शहद लें, लेकिन एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद न दें
अगर आपको संक्रमण के कारण खांसी हुई है, तो जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते तब तक भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर न जाएं
नियमित रूप से भाप लें और एयर वैपोराइजर का इस्तेमाल करें। साथ ही गर्म पानी में नहाना भी मदद बलगम को बाहर निकालने में मदद कर सकता है।
बलगम वाली खांसी की जटिलताएं
बलगम वाली खांसी आमतौर पर किसी अंदरूनी समस्या के कारण विकसित होती है और इसलिए अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह गंभीर स्थितियां पैदा कर सकती है। उदाहरण के लिए अगर फेफड़ों में संक्रमण के कारण बलगम वाली खांसी विकसित हुई है और इसका समय पर इलाज शुरू नहीं किया गया है, तो ऐसे में संक्रमण अन्य अंगों में फैल सकता है। वहीं अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों की समय पर देखभाल न करने पर उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगती हैं। वहीं समय पर खांसी का इलाज न करने पर खांसी गंभीर हो जाती है और इससे पेट में दर्द, बेहोशी और यहां तक कि दबाव के कारण इसोफेगस में क्षति भी हो सकती है।
| --------------------------- | --------------------------- |