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गुस्से में क्यों रहता है बच्चा :-

बच्चों को क्रोधित बनाने के जिम्मेदार कहीं न कहीं वयस्क ही होते है। इसीलिए वयस्कों द्वारा खड़ी की गई डिफिकल्ट सिचुएशंस के साथ जब बच्चा एडजस्ट व स्वयं को व्यक्त नहीं कर पाता तो गुस्सा करता है। किन्हीं विशेष परिस्थितियों के कारण ही बच्चों में क्रोध पनपता है।

उपेक्षा-अगर बच्चे के जन्म के समय घर में कोई दुर्घटना हो जाए। जैसे-किसी सदस्य की मृत्यु या आर्थिक नुकसान तो उसके लिए बच्चे को दोषी मान उसकी उपेक्षा की जाती है। जहां दंपति बच्चा नहीं चाहते या लड़के की चाह में लड़की का जन्म हो जाता है, तब उसे 'अनवांटेड' की संज्ञा दे दी जाती है। ऐसी स्थिति में भी बच्चे रिबेलियस बन जाते हैं। उनका यह बिहेवियर क्रोध के रूप में फूटता है।

क्रेडिट न मिलना- कई अभिभावक बच्चे के हर काम का क्रेडिट लेना चाहते है। वह पढ़ाई में अच्छे नंबर लाता है तो मां कहती है कि चूंकि मैं अच्छी तरह से पढ़ाती हूं इसलिए यह फ‌र्स्ट आता है। जब बच्चे की मेहनत या काबलियत का मां क्रेडिट लेती है तो बच्चा महसूस करता है कि अच्छे नंबर तो मैं अपनी योग्यता से लाया हूं और मां मेरी तारीफ के बजाय स्वयं प्रशंसा बटोर रही है तो वह 'स्ट्रेस सिचुएशन' में आ जाता है। बच्चा मां को दुश्मन मानने लगता है। उसे यह कहकर एनकरेज करना चाहिए कि वह कितना इंटेलिजेंट है, तभी तो चीजों को जल्दी सीख लेता है।

डोमीनेंस- अभिभावक अक्सर अपनी इच्छाएं बच्चों पर थोपते है। वे चाहते है कि बच्चे उनके अनुसार काम करे। वे बच्चे की सोच को सीमित कर अपना प्रभुत्व जमाने की कोशिश करते है। इसका बच्चे की पर्सनेल्टी पर बुरा असर पड़ता है और वह इसे क्रोध के रूप में व्यक्त करता है।

ओवर प्रोटेक्शन-

अभिभावक बच्चे को हमेशा बच्चा समझते है, इससे उसकी कैपेबिलिटी सप्रेस होती है। बच्चे को अपने ढंग से चीजों को एक्सपीरियंस करने दीजिए। छोटी-छोटी बातों को लेकर उसे इतनी प्रोटेक्शन न दें कि वह अपने अंदर कॉन्फिडेस की कमी महसूस करने लगे। ज्यादा रोक-टोक करने से हीन भावना डेवलप हो जाती है। उसे लगता है कि वह कुछ नहीं कर सकता और पूरी लिबर्टी न मिल पाने और अभिभावकों के इंटरफियरेंस के कारण वह 'रिवोल्ट' पर उतर आता है।

एक्सपेक्टेशंस- अभिभावकों की अत्यधिक अपेक्षाओं के कारण बच्चा 'को-पप' नहीं कर पाता है। इसलिए उनके कुछ कहने से पहले ही वह 'रिएक्ट' कर देता है। बच्चे की रुचि का ध्यान न रखते हुए जब माता-पिता अपनी मर्जी से बच्चे की दिशा तय करना चाहते है तो सही जगह एनर्जी का 'आउट लेट' न कर पाने से बच्चा अपने तनाव को गुस्से के रूप में निकालता है।

आलोचना व तुलना-माता-पिता सबके सामने बच्चे की बुराई करते समय यह भूल जाते है कि बच्चे का भी ईगो होता है। जब दूसरे बच्चे से उसको कम्पेयर किया जाता है तो बच्चा डिप्रेस्ड हो जाता है। विरोध में वह क्रोध व्यक्त करता है।

बेलेंस्ड बिहेवियर न होना- जिन अभिभावकों का व्यवहार बच्चों के प्रति बेलेंस्ड नहीं होता, उनके बच्चों को भी बहुत गुस्सा आता है। ज्यादा मार या ज्यादा प्यार बाल मन पर गलत प्रभाव डालते है। कभी माता-पिता बच्चे के प्रति अनुशासित हो कड़ा रुख अपना लेते है। कभी बिल्कुल ही सॉफ्ट हो जाते है। इससे बच्चा कन्फ्यूज हो जाता है। उलझन में रहने के कारण बच्चा दबाव में जीता है। यही दबाव गुस्से के रूप में फूटता है।

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