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नवजात शिशु का रंग साफ करने के 10 उपाय | Shishu Ko Gora Karne Ka Upay
यहां आपको कुछ उपायों के बारे में बताएंगे, जिनका उपयोग कर आप अपने बच्चे के रंग को साफ कर सकते हैं।
बेसन : बेसन मृत त्वचा को अलग करने के साथ ही त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बनाने में मदद कर सकता हैं (4)। बेसन के इस गुण को एक्सफोलिएशन कहते हैं। एक्फोलिएशन के इस गुण के कारण त्वचा के रंग को साफ करने में मदद मिल सकती है (5), लेकिन इसके उपयोग से बच्चा गोरा नहीं होता है ।
फलों का रस : फलों का रस त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। त्वचा के लिए अंगूर, शहतूत, संतरा व कॉफी जैसे कई फल लाभकारी माने जा सकते हैं, जो त्वचा की कई समस्याओं को दूर करने में सहायक हैं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-कैंसर गुण इन्हें त्वचा के लिए एक बेहतरीन विकल्प बना देते हैं। इसके अलावा, फलों के रस के ये गुण सूर्य की पराबैंगनी किरणों के दुष्प्रभाव से भी बचाते हैं। साथ ही ये त्वचा की खराब कोशिकाओं को दूर कर उसे ग्लोइंग बनाने में भी मदद करते हैं (6)।
हल्के गर्म तेल से मालिश : आयुर्वेद के अनुसार हल्के गर्म तेल से की गई मालिश त्वचा को कई रोगों से बचाने में कारगर हाे सकती है। रोजाना बच्चे को नहलाने से पहले हल्के हाथों से गुनगुने तेल की मालिश करें। इससे बच्चे की त्वचा का रंग तो साफ होगा ही, साथ ही त्वचा को स्वस्थ रखने में भी मदद मिलेगी (7)।
सौम्य बाॅडी पैक : नवजात के शरीर पर लेप या उबटन लगाने से भी उनकी त्वचा की सफाई की जा सकती है। प्राचीन परम्परा से ही लेप या उबटन के जरिए शिशु के शरीर की गंदगी को साफ किया जाता रहा है और वर्तमान में भी कई स्थानों पर आज भी यह चलन मौजूद है। चंदन, हल्दी और केसर को दूध में मिलाकर बनाया गया लेप बच्चे के शरीर पर होने वाले हानिकारक प्रभावों को दूर करने के साथ ही उनकी त्वचा में निखार भी लाने में भी मदद करता है। चंदन, हल्दी और केसर का उपयोग त्वचा संबंधी कई समस्याओं के समाधान और त्वचा में निखार लाने के लिए किया जाता है (8) (9)।
स्नान के पानी का सही तापमान : बच्चे के रंग को लेकर अगर आप चिंता में हैं, तो आप उसे नहलाने के लिए पानी को उबाल कर ठंडा कर लें। उसके बाद यह पानी बच्चे को नहलाने के लिए इस्तेमाल करें। विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी को उबालने से पानी में मौजूद हाइड्रोजन सक्रिय हो जाते हैं, जो बच्चे का रंग साफ करने में मदद कर सकते हैं (10)।
मॉइस्चराइजर : इलास्टिन और कोलेजन त्वचा में मौजूद प्रोटीन होते हैं। इलास्टिन त्वचा पर मॉइस्चराइजर के रूप में कार्य करता है। इलास्टिन का उपयोग मॉइस्चराइजर क्रीम में भी किया जाता है। यह त्वचा को मॉइस्चराइज करने और व्हाइटनिंग प्रदान करने का काम कर सकता है। इसलिए, प्रतिदिन शिशुओं की नाजुक त्वचा पर इलास्टिन युक्त हल्के मॉइस्चराइजर के साथ सौम्य मालिश करने से बच्चे के रंग में फर्क देखा जा सकता है (11)।
बेबी स्क्रब : ब्राउन शुगर में एक्सफोलिएट गुण होते हैं, जो शिशु की त्वचा में मौजूद मृत कोशिकाओं से छुटकारा दिलाने के साथ ही त्वचा को साफ करने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा, ये मुंहासों से छुटकारा दिलाकर, उनके छिद्रों को भी बंद कर देते हैं। ब्राउन शुगर के साथ-साथ शहद, सादा पानी या जैतून का तेल मिलाकर स्क्रब तैयार किया जा सकता है। इसका उपयोग त्वचा की सफाई के साथ-साथ मुंहासों को दूर करने के लिए किया जा सकता है (12) (4)।
सन बाथ : सूर्य की रोशनी बच्चों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताई गई है। इसके अलावा, इससे प्राप्त होने वाला विटामिन-डी त्वचा को कई प्रकार से सुरक्षा प्रदान करने में भी मददगार हो सकता है। विटामिन-डी त्वचा में मौजूद कई बैक्टीरिया और उससे होने वाले संक्रमण को दूर करने में कारगर हो सकता है (13)। सूर्य का प्रकाश त्वचा की कई समस्याओं के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन त्वचा के रंंग को साफ करने के लिए इसके कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। शिशुओं को 6 माह तक सूर्योदय के बहुत समय बाद सीधे सूर्य के प्रकाश में न ले जाऐं। उन्हें सूर्योदय के समय ही सूर्य के प्रकाश में ले जाएं, जिससे उन्हें पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल सके। याद रहे उन्हें ज्यादा देर तक सूर्य प्रकाश में न रखें। नहीं तो ये हानिकारकर भी हो सकता है।
बेबी वाइप्स : बच्चों की त्वचा को साफ करने के लिए, कीटाणुओं से बचाने के लिए और त्वचा की देखभाल के लिए बेबी वाइप्स का उपयोग किया जाता है। बेबी वाइप्स पॉलिस्टर, कॉटन या रेयॉन फाइबर से बने होते हैं। इन्हें पानी के साथ इस्तेमाल करके शिशुओं की त्वचा की सफाई हल्के हाथों से की जाती है। यहां पर ध्यान रखने वाली बात यह है कि शिशुओं की सफाई के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्री बहुत ही कोमल हो, ताकि बच्चे की नाजुक त्वचा को कोई नुकसान न हो (14)। ये उपाय बच्चे की त्वचा की सफाई के लिए हैं, लेकिन ये रंग को साफ कर सकते हैं, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
केमिकल युक्त उत्पादों का इस्तेमाल न करें : शिशुओं की त्वचा बहुत ही नाजुक होती है। इसलिए इनके रंग को साफ करने के लिए बहुत सावधानी की जरूरत होती है। केमिकल युक्त उत्पादों में टॉक्सिन प्रभाव होते हैं, जो बच्चों की नाजुक त्वचा पर हानिकारक प्रभाव दिखा सकते हैं। अगर शिशुओं की त्वचा की सफाई के लिए केमिकल युक्त उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं, तो ये त्वचा संबंधी कई समस्याओं का कारण बन सकते हैं। बच्चों को किसी भी हानिकारक प्रभाव से बचाने के लिए और उनके रंग को साफ करने के लिए, जहां तक हो सके केमिकल युक्त उत्पादों का इस्तेमाल न करें। उसके स्थान पर आप आसान घरेलू उपायों को अपना सकते हैं (15)।
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