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ताकत का लगातार बने रहना क्यों ज़रूरी है?
ऐसी चीज़ें खाना जो सिर्फ कुछ समय के लिए ताकत देती हों मगर उनमें पोषण काफ़ी कम होता हो तो उनका कोई महत्व नहीं रह जाता और ये बढ़ते बच्चों की ताकत से जुड़ी ज़रूरतों को भी लंबे समय के लिए पूरा नहीं कर सकती हैं।
सही और लगातार मिलने वाले पोषण की कमी ही आलस और सुस्ती का मुख्य कारण होती हैं।
पोषण की गुणवत्ता बच्चों में व्यवहार और यादाश्त से सीधे तौर पर जुड़ी होती है।
बच्चों में परिपक्वता (किशोरावस्था) बड़ी तेज़ी से आती है जो लड़कियों में 10 की उम्र में और लड़कों में 12 की उम्र में होता है। इस दौरान उनकी भूख भी बढ़ जाती है। हमेशा की तुलना में उनके शरीर को इस उम्र में ज़्यादा कैलोरी की ज़रूरत होती है।
नीचे कुछ ऐसे तत्वों के बारे में बताया गया है जो स्कूल जाने वाले बच्चों को लगातार ताकत देते हैं।
पौष्टिक नाश्ते का महत्व:
कई बार हमने सुना है कि सुबह का नाश्ता दिन का सबसे ज़रूरी खाना होता है। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए नाश्ते को, उनके अच्छे तरीके से सीखने और स्कूल में बेहतरीन प्रदर्शन से जोड़ा जाता है। ये बच्चों में पूरे दिन सजगता और एकाग्रता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें पूरे दिन ताकत देता है और इसलिए ये उन्हें मोटापा, मधुमेह और दिल की बीमारियों से बचाता है। ऐसा नाश्ता जिसमें कार्बोहाइड्रेट्स और प्रोटीन का मेल हो वो सबसे बेहतर होता है। यह उनमें एनर्जी लेवल को लगातार बनाए रखता है।
आप बच्चे को अनाज के साथ फल और दही, साबुत अनाज के ब्रेड टोस्ट पर पीनट बटर लगा कर, फल, अंडे की भुर्जी और वेजिटेबल चीला, सब्जियों का पोहा, उपमा, दूध के साथ ओट्स और किशमिश, आदि दे सकते हैं।
कार्बोहाइड्रेट्स का महत्व:
दिन भर चुस्ती बनाए रखने के लिए सिर्फ सुबह का नाश्ता ही काफ़ी नहीं होता। एक संतुलित आहार भी बेहद ज़रूरी है। सिम्पल कार्बोहाइड्रेट्स जैसे फल, सब्जी, शहद, आपको तुरंत ही ताकत देते हैं और इसके साथ कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स का तालमेल जैसे साबुत अनाज और स्टार्च वाली सब्जियां जो आपको संतुष्ट महसूस कराती हैं, आपके शरीर की ताकत को बढ़ाने में मदद करेंगे। वयस्कों को अपनी 50-60% कैलोरी कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स से लेनी चाहिए। कैंडीज़, सॉफ्ट ड्रिंक, और कुकीज़ से मिलने वाले सिम्पल कार्बोहाइड्रेट्स बच्चों के लिए हाई एनर्जी फ़ूड की तरह काम करते हैं मगर ये उन्हें केवल कुछ देर के लिए ही एनर्जी देते हैं और फिर ये कम हो जाती है। प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट्स जैसे सफेद ब्रेड, पास्ता, सफेद चावल में काफ़ी कम कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं और इसलिए ये बच्चों में लगातार एनर्जी नहीं बनाए रख सकते हैं।
ग्लाइकेमिक इंडेक्स किसी खाने के लिए एक निश्चित स्कोर होता है जो इस बात पर निर्भर करता है कि उस चीज़ को खाने के बाद खून में ग्लूकोज़ की क्या प्रतिक्रिया थी। एक ज़्यादा फाइबर, और कम ग्लाइकेमिक इंडेक्स वाला खाना कम ग्लूकोज़ पीक में मदद करेगा। ओटमील और अंकुरित चीज़ों की जीआई कम होती है, और उनका कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स फाइबर से भरपूर होता है। इसे पचाने में काफ़ी समय लगता है और इसलिए यह आपके बच्चे को कुछ देर के लिए एनर्जी बर्स्ट देने के बजाय पूरे दिन उनके एनर्जी लेवल को बनाए रखता है।
वसा (फैट्स) का महत्व
सही तरीके का वसा चुनना आपके बच्चे को केन्द्रित रूप में ताकत (कंसन्ट्रेटेड एनर्जी) देता है। उन्हें संतृप्त वसा (सैचरेटिड फैट) की जगह जैतून का तेल, नट्स और बीज जैसे असंतृप्त वसा (अन्सैचरेटिड फैट) और ट्रांस फैट दें जो उनकी कैलोरीज़ का 20% हिस्सा हो। अपने बच्चे को संतुलित मात्रा में पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स जैसे सब्जियों का तेल, अखरोट, सोयाबीन, और मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स जैसे जैतून का तेल, काजू, बादाम, और मूंगफली दें।
प्रोटीन के फ़ायदे:
प्रोटीन से भरपूर स्रोत जैसे मीट, मछली, अंडे, बीन्स, नट, सोया, कम फैट वाली दूध से बनी चीज़ें बच्चों को नियमित तरीके से ताकत देने में मदद करते हैं। जब आपके खाने में कार्बोहाइड्रेट्स और फैट की कमी होती है, तब प्रोटीन आपके शरीर को ताकत देता है।
हाइड्रेशन:
अधिकतर बच्चों में कम एनर्जी लेवल की वजह डिहाइड्रेशन होती है। रेकमेंडेशन्स के हिसाब से, लड़कियों को 11 कप और लड़कों को 16 कप पानी की ज़रूरत होती है। किसी भी तरीके की शारीरिक गतिविधि करने के बाद खुद को हाइड्रेट करना भी बेहद ज़रूरी होता है।
चाय, कॉफी, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक आदि में पाया जाने वाला कैफ़ीन आपके बच्चे को कुछ देर के लिए तो एनर्जी देता है लेकिन उसके बाद वे थक जाते हैं। कैफ़ीन आपके बच्चे की नींद में भी रुकावट डाल सकता है। इसलिए कैफ़ीन के बजाय उन्हें सादे पानी से ही हाइड्रेट करें।
खाने के तरीके को व्यवस्थित करना:
आपके बच्चे के खाने का तरीका भी उसके एनर्जी लेवल में एक सहायक तत्व हो सकता है। पौष्टिक लेकिन अनियमित खाना थकान ला सकता है, उसी तरह ज़्यादा मात्रा में खाना आपके बच्चे को ज़्यादा वज़नदार और सुस्त बना सकता है। हर बच्चा अलग होता है। कुछ के लिए, एक दिन में तीन समय का खाना काफ़ी होता है और कुछ को हर कुछ देर पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना चाहिए होता है।
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