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हर नवजात शिशु को बर्पिंग या डकार दिलाया जाता है। यह फीडींग के बाद की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
when to stop burping a baby
इस उम्र से शिशु को नहीं पड़ती डकार दिलवाने की जरूरत, आप भी कर दें बंद
बच्चों को डकार दिलाना या बर्पिंग बच्चों की फिडींग के दौरान एक सामान्य प्रक्रिया है। जो बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। इससे बच्चों का पेट हल्का रहता है और गैस बाहर निकल जाता है। इससे उन्हें आराम भी मिलता है। इससे बच्चों का पेट भी अच्छी तरह से साफ होता है, दूध पचाने में उन्हें मदद मिलती है और वह हल्का महसूस करते हैं।

लेकिन यह प्रक्रिया छोटे बच्चों के लिए ही जरूरी है। एक उम्र के बाद उन डकार दिलाना या बर्पिंग आवश्यक नहीं होता है। आइए जानते हैं कि वह कौन सी उम्र है जिसके बाद इसे बंद करना चाहिए? साथ ही आप यह कैसे समझ पाएंगे कि अब आपके बच्चों को डकार दिलाने की जरूरत नहीं है?

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​कब आपको बर्पिंग रोक देना चाहिए?

अधिकतर 4 माह से लेकर 6 माह के बाद बच्चों को डकार दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती है। बच्चों का पाचन तंत्र खुद ब खुद दूध को पचाने के लायक हो जाता है, गैस बनना भी कम हो जाता है। लेकिन यह प्रक्रिया अलग-अलग बच्चों में अलग-अलग हो सकती है।

इसके लिए उनके सिस्टम को समझना बेहद जरूरी है। लेकिन हर बच्चों के लिए इसकी जरूरत अलग-अलग हो सकती है। आइए जानते हैं कि इसे समझा कैसे जाए?
​बच्चा बैठने लायक हो जाए

कुछ बच्चे बहुत जल्दी बैठना सीख जाते हैं। 6 माह के होते होते वो थोड़ा बहुत बैठने लगते हैं। ऐसे बच्चों का पाचन तंत्र भी बहुत जल्दी परिपक्व हो जाता है और उन्हें डकार दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती है।


​वह खुद ही डकार लेने लगे

कुछ बच्चे बहुत जल्द सिर्फ 2 माह की उम्र में खुद ही डकार लेने लगते हैं। इसके लिए आपको पीठ सहलाने या बैठाने की जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसे में आपको यह समझ जाना चाहिए कि बर्पिंग बंद करना हैं। क्योंकि उनका पाचन तंत्र इसके अनुकूल स्वतः ही ढल चुका है।
​बच्चें को आराम का एहसास हो रहा है

कई बार फीडिंग कराने के बाद बच्चे चिड़चिडे लगते हैं, ऐसे बच्चों को डकार दिलाना जरूरी है। लेकिन कुछ बच्चे बहुत जल्द ही फीडिंग के बाद भी आराम से रहते हैं। अगर आपके बच्चों को भी ऐसे ही लक्षण दिखाई देते हैं तो आपको यह समझ जाना चाहिए कि उन्हें डकार दिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


बोतल से दूध

जो बच्चे मां के दूध पर रहते हैं उन्हें बर्पिंग की जरूरत ज्यादा नहीं पड़ती। लेकिन जो बच्चे बोतल से दूध पीते हैं, इसमें दूध के साथ साथ हवा भी अंदर जाता है। ऐसे बच्चों में गैस बहुत ज्यादा बनती है और उन्हें बर्पिंग की जरूरत बहुत ज्यादा होती है।

अगर बच्चा डकार लेने के बाद भी गैस की वजह से परेशान लगे, तो ऐसे में आप उन्हें पेट के बल लेटाकर साइकिल मोशन कि तरह हल्के हाथों से एक्सरसाइज करवा सकते हैं।

एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि बच्चों के पेट की हल्की मालिश भी उन्हें इस अवस्था में आराम दिलाती है। इसके साथ ही आप कुछ घरेलू दवाइयों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, जैसे ग्राइप वाटर, कॉलीक ड्रॉप। लेकिन इनसे पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
​सावधानियां

अगर बच्चा बोतल से दूध पीता है तो आप बच्चे के फार्मूला मिल्क की जांच कर ले, हो सकता है आपका बच्चा उस फॉर्मूला मिल्क के प्रति सेंसेटिव हो।

ऐसे में आपको डॉक्टर की सलाह से उसे बदलना चाहिए। बोतल के निप्पल में छेद ज्यादा होने से भी गैस ज्यादा अंदर जाती है। ऐसे में बोतल का निप्पल बदलना भी जरूरी हो जाता है और इसके साथ ही अच्छे ब्रांड का बोतल ही इस्तेमाल करें।
डॉक्टर से सलाह

कई बच्चे बर्पिंग के बाद भी परेशान रहते हैं, जरूरी नहीं है कि यह गैस ही हो बल्कि पेट कि कोई गंभीर समस्या भी हो सकती है। इसके लिए डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। यह भी देखा गया है कि कई बच्चे डकार लेते ही नहीं है। तो इस पर भी बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। बस आपको यह ध्यान रखना है कि आपका बच्चा स्वस्थ है, वह परेशान तो नहीं है।

इन सभी लक्षणों के अनुसार आप बहुत जल्द ही समझ जाएंगे कि आपके बच्चे को डकार दिलाने की जरूरत है या नहीं। लेकिन फिर भी कुछ बच्चों को समझना मुश्किल होता है। ऐसे में आपको चिकित्सक सलाह लेना बहुत जरूरी हो जाता है। अगर बच्चा दूध पीने के बाद ज्यादा परेशान रहे, ज्यादा रोता हो तो ऐसे में डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।

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