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गर्भवती महिलाएं अक्सर चीजों को रखकर भूल जाती हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि ऐसा क्यों हो रहा है या इसके लिए उन्हें क्या करना चाहिए। अक्सर कहा जाता है कि प्रेगनेंसी में महिलाएं चीजें और बातें भूलने लगती हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है और इस प्रेगनेंसी ब्रेन को लेकर आप क्या कर सकती हैं?
आपने भी सुना होगा कि प्रेगनेंसी के दौरान भूलने की आदत हो जाती है। इसे कभी कभी मॉमनेसिया या प्रेगनेंसी ब्रेन कहा जाता है। आइए जानते हैं कि प्रेगनेंसी ब्रेन क्या होता है और इसे लेकर आप क्या कर सकती हैं।
सच है प्रेगनेंसी ब्रेन
गर्भावस्था प्रेगनेंट महिला के मस्तिष्क में बदलाव नहीं लाता है लेकिन महिलाएं इस समय पहले की तरह दिमाग से मजबूत महसूस नहीं करती हैं। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की हेलन क्रिस्टेंसेन का कहना है कि प्रेगनेंसी ब्रेन या मॉमनेसिया जैसी चीजें होती हैं। यहां तक कि रिसर्च में भी इस बात के प्रमाण मिले हैं कि प्रेगनेंसी में याददाश्त कमजोर हो जाती है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि प्रेगनेंसी से मस्तिष्क की क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
प्रेगनेंसी में याददाश्त कमजोर होने के कारण
नींद की कमी इसमें अहम भूमिका निभा सकती है। स्ट्रेस, व्यस्त होने या नींद की कमी में भूलने की आदत होना नॉर्मल बात है। पर्याप्त नींद न मिलने और मल्टीटास्क करने पर किसी भी व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो सकती है। अच्छी नींद न लेने पर दिमाग कमजोर हो जाता है।
वहीं, हार्मोंस में उतार चढ़ाव आने और नई जिम्मेदारियों के कारण भी प्रेगनेंसी ब्रेन हो सकता है।
गर्भावस्था में प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन पंद्रह से 40 फीसदी तक बढ़ जाता है और ये हार्मोन मस्तिष्क के सभी न्यूरॉन्स को प्रभावित करते हैं। डिलीवरी के बाद ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन अधिक रिलीज होता है जो कि गर्भाशय को सिकोड़ने और ब्रेस्ट मिल्क बनाने में काम आता है। यह मस्तिष्क के सर्किटों को भी प्रभावित करता है।
हार्मोंस स्पेटियल मेमोरी को भी प्रभावित कर सकता है जिसमें चीजों को याद रखा जाता है।
प्रेगनेंसी में सांस फूलने को न करें नजरअंदाज, कारण कर देंगे हैरान
सांस फूलना खासतौर पर प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में नॉर्मल बात है और गर्भावस्था के शुरुआती समय में भी ऐसा होता है। कुछ महिलाओं को गर्भावस्था की पहली तिमाही से सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है।
अगर सीढ़ी चढ़ने जैसे काम करने पर सांस फूल रहा है तो ये सामान्य बात है, लेकिन अगर आपको अस्थमा जैसी कोई सांस की बीमारी है तो इसकी वजह से आपको परेशानी उठानी पड़ सकती है।
अगर सांस फूलने के साथ कोई अन्य लक्षण नहीं दिख रहा है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहींं है और शिशु को प्लेसेंटा से पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रहा है इसलिए शिशु को कोई नुकसान नहीं होगा। गहरी सांस लेने से भ्रूण ऑक्सीजन युक्त खून मिलेगा।
प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सांस फूलने के कारणइस समय भ्रूण इतना बड़ा नहीं हुआ होता है कि उसकी वजह से सांस लेने में दिक्कत आए।
पेट से फेफड़ों और दिल को अलग करने वाला ऊतक का मस्कुलर बैंड डायफ्राम 4 प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में 4 सेमी तक बढ़ जाता है। डायफ्राम की मूवमेंट से फेफड़ों में हवा भरने में मदद मिलती है।
डायफ्राम में बदलाव के साथ-साथ प्रेगनेंट महिला को अक्सर प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ने की वजह से तेज सांसें आने लगती हैं।
दूसरी तिमाही में गर्भवती महिला को सांस फूलने की दिक्कत ज्यादा स्पष्ट महसूस हो सकती है। गर्भ में बढ़ रहे भ्रूण की वजह से इस समय सांस फूल सकती है। हालांकि, दिल के काम करने के तरीके में कुछ बदलाव आने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में खून की मात्रा तेजी से बढ़ने लगती है। इस खून को पूरे शरीर और प्लेसेंटा में पहुंचाने के लिए दिल को ज्यादा काम करना पड़ता है।
दिल के ज्यादा काम करने की वजह से प्रेगनेंट महिला को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में शिशु के सिर की पोजीशन की वजह से सांस लेने में आसानी या और ज्यादा दिक्कत हो सकती है। शिशु के घूमने और पेल्विस की तरफ आने से पहले उसका सिर पसलियों के अंदर और डायफ्राम पर दबाव महसूस हो सकता है जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है।
नेशनल वुमेंस हैल्थ रिसोर्स सेंटर के मुताबिक, प्रेगनेंसी के 31वें हफ्ते और 34वें हफ्ते में इस तरह की सांस फूलने की दिक्कत होती है।
क्या कर सकते हैं
अगर आप प्रेगनेंसी में चीजें भूलने लगी हैं या आपको याददाश्त कमजोर होने जैसा महसूस हो रहा है तो अपनी जिंदगी को आसान बनाने की ओर प्रयास करें। डिलीवरी के बाद आपको नींद की कमी की परेशानी और होने लगेगी। बच्चा पैदा होने के बाद पहले साल में महिलाएं लगभग 700 घंटे नींद कम लेती हैं और इसका असर दिमाग पर पड़ता है। ऐसे में चीजों को लिखना शुरू करें। आपने क्या कहां रखा है या किस समय क्या काम करना है, ये सब बातें नोट कर के रखें।
इसके अलावा भरपूर नींद लेने की कोशिश करें क्योंकि इससे दिमाग को आराम मिलता है। कुछ महिलाओं को बेहतर नींद लेने के कुछ ही सप्ताह के अंदर मॉमनेसिया से राहत मिल जाती है। हालांकि, अगर आप बहुत बड़ी गलतियां करने लगी हैं या आपकी याददाश्त कमजोर होने की वजह से किसी की जान खतरे में आ गई है तो डॉक्टर से इस बारे में जरूर बात करें।
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