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यूं तो बच्चों में (नवजात हो या बड़े) उल्टी को सामान्य माना जाता है, लेकिन यदि ऐसा बार-बार होता है तो ध्यान देने की जरूरत है। आमतौर पर जब बच्चे के पेट में गड़बड़ होती है या ज्यादा खा लेने पर उल्टी होती है। ज्यादा दूध पीने के बाद पेट हल्का-सा भी दब जाए तो उल्टी हो जाती है। इन सामान्य हालात को छोड़ दें तो कई बार पेट के संक्रमण या फूड पॉयजनिंग के कारण भी उल्टी होती है। बार-बार की उल्टी का सबसे बड़ा खतरा होता है शरीर में पानी की कमी। से जुड़े एम्स के डॉ. केएम नाधीर के अनुसार, कई बार खांसते समय और फेंफड़ों से बलगम निकालते समय उल्टी जैसे लक्षण महसूस होते हैं, लेकिन यह उल्टी नहीं होती, क्योंकि उल्टी सिर्फ पेट से आती है। यूं तो यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन गंभीर स्थिति में मेडिकल उपचार की जरूरत पड़ सकती है। कई बार दवाओं के कारण भी ऐसा होता है। बेहोश करने वाली सामान्य दवाएं उल्टी का कारण बनती हैं।


बार-बार की उल्टी से डिहाइड्रेशन के जो लक्षण सामने आते हैं, उनमें शामिल हैं-चिड़चिड़ाहट, थकान, रोने पर कम आंसुओं का निकलना, आंखों का धंस जाना, त्वचा का ठंडा पड़ना, सामान्य से कम पेशाब करना, पहले पीले रंग का पेशाब आना, सुस्ती, बाहर खेलने का मन नहीं करना। यदि ये लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तत्काल डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।

डॉक्टर को कब दिखाएं
नवजात बच्चों में दो से ज्यादा बार की उल्टी के बाद डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यदि बच्चे को उल्टी के साथ तेज बुखार, सिर दर्द, पेट दर्द, गर्दन में अकड़न है और सिर चकरा रहा है तो तत्काल इलाज की जरूरत है। इसी तरह उल्टी के साथ खून या बिना पचा भोजन निकले तो भी डॉक्टर से सम्पर्क कर लेना ठीक रहता है। लगातार उल्टी हो रही है, शरीर सुस्त पड़ गया है तो भी तत्काल इलाज शुरू करें।

उल्टी रोकने के लिए थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खिलाएं। अदरक का सूप या फ्रूट जूस से उल्टी पर काबू पाया जा सकता है। हाई प्रोटीन वाली चीजें जैसे - पनीर, सूखे मेवे जैसे काजू, बादाम खिलाएं।

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