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Parenting Tips: बच्चों के सामने इन टॉपिक्स पर भूलकर भी न करें बात, पड़ सकता है पछताना -
बच्चों के सामने बुराई न करें
बच्चों के सामने कभी भी किसी की बुराई न करें, कई बार पेरेन्ट्स गुस्से में बच्चों के सामने दूसरों की बुराई करने लगते हैं. खासतौर पर अपने पार्टनर या परिवार के किसी सदस्य की बुराई बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसी बातें सुनकर बच्चे दो अलग हिस्सों में बंट सकते हैं. साथ ही पार्टनर या फैमिली मेंबर की बुराई सुनकर कई बार बच्चें उन लोगों से नफरत भी करने लगते हैं और जिनकी आप बुराई कर रहें हैं उनके प्रति बच्चों का नजरिया भी बदल सकता है.
रुपयों और बीमारियों की बात न करें
पेरेन्ट्स जब रुपयों की टेंशन या किसी बीमारी को लेकर बच्चों के सामने बार-बार बात करते हैं तो इन समस्याओं का डर कहीं न कहीं बच्चों के दिल और मन में भी बैठ जाता है. कई बार ऐसी बातों से बच्चों पर बोझ पड़ने लगता है और वह इन बातों को लेकर टेंशन लेने लगते हैं, लेकिन इस बोझ को झेल पाना उनके बस की बात नहीं होती है.
दूसरों से न करें बच्चों की तुलना
अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से कभी नहीं करनी चाहिए. बाल मनौवैज्ञानिकों के अनुसार जब पेरेन्ट्स बच्चे की तुलना दूसरों से करते हैं तो उनका भरोसा और आत्मविश्वास टूटने लगता है, और बच्चे खुद को दूसरो से कम आंकने लगते हैं. जिसके चलते कई बार बच्चे स्ट्रेस भी लेने लगते हैं. वहीं अगर आप बच्चों को दूसरो से काफी बेहतर बताते हैं तो वह दूसरों को अपने आप से कम आंकने लगते हैं. इसलिए किसी भी सूरत में तुलना करना सही नहीं है.
ठेस पहुंचाने वाली बातें न करें
कई बार बच्चों की मस्ती और गलतियों की वजह से पेरेन्ट्स बेहद ही नाराज़ हो जाते हैं, और उनसे ऐसी बातें कह जाते हैं जो शायद कभी भी नहीं कहना चाहिए. काश तुम पैदा ही नहीं होते जैसी बात कोई भी बच्चा अपने पेरेन्ट्स से कभी नहीं सुनना चाहता. इस तरह की बातों से बच्चा बेहद ही आहत हो सकता है और उसके सम्मान को ठेस पहुंच सकती है. ऐसी बातों से बच्चे के मन में यह बात भी आ सकती है कि, उसे कोई भी पसंद नहीं करता है.
रूढ़िवादी टिप्पणियां न करें
लड़कियों को चुप ही रहना चाहिए या लड़के कभी नहीं रोते, जैसी बातें बच्चों के सामने न करें, इससे उनकी मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है. बच्चों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने से नहीं रोकना चाहिए. अगर आप बच्चों को रोकेंगे तो वह चुप रहना और सहना सीख जाएंगे. ऐसे में जब उन्हें कोई कुछ गलत कहेगा तो वह अपनी आवाज़ नहीं उठा पाते हैं और न ही भावनाएं व्यक्त कर पाते हैं, ऐसी स्थिति में बच्चे मन ही मन में घुटने लगते हैं.
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