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जानिए प्रेग्नेंसी में डिहाइड्रेशन के लक्षण, कारण और इससे बचने के तरीके
गर्भावस्था एक ऐसा समय है जिसमें महिलाओं को अपना बहुत ख्याल रखने की जरूरत होती है और इस नाजुक समय में कई तरह की परेशानियां आने का भी खतरा रहता है जिनमें से एक डिहाइड्रेशन भी है।
प्रेग्नेंसी के समय में महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। गर्भावस्था में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं जिनमें से एक डिहाइड्रेशन भी है। बार-बार प्यास लगना, सिर चकराना, रूखी त्वचा और होंठों का सूखना शरीर में पानी की कमी का संकेत है। अगर आप प्रेग्नेंट हैं और आपको ये सभी लक्षण महसूस हो रहे हैं तो आपको डिहाइड्रेशन हो सकता है।
प्रेगनेंसी में पानी की कमी क्यों होती है?
प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही और 14वें से 16वें हफ्ते तक मॉर्निंग सिकनेस रहती है। दूसरी तिमाही तक उल्टी और मतली जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। मॉर्निंग सिकनेस की वजह से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और फ्लूइड्स की कमी हो जाती है।
हार्मोनल बदलाव
हार्मोनल बदलाव और खानपान की आदतों में बदलाव के साथ-साथ कुछ चीजों को खाने का मन न करना, दस्त का कारण बन सकता है। ऐसा खासतौर पर तीसरी तिमाही में होता है। इसकी वजह से शरीर में फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है।
एक्सरसाइज
इसमें पसीना ज्यादा आता है और गर्मी के मौसम में एक्सरसाइज में ज्यादा पसीना बहने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसके अलावा बुखार में उल्टी से शरीर में फ्लूइड की कमी हो जाती है जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भावस्था में पानी की कमी के लक्षण
अगर आप प्रेगनेंट हैं तो आपमें डिहाइड्रेशन के निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं -
डिहाइड्रेशन का सबसे पहला लक्षण प्यास लगना है। इसे नजरअंदाज न करें और खूब पीएं। हर घंटे में कम से कम एक गिलास पानी जरूर पीएं।
आमतौर पर खड़े होने या झुकने पर चक्कर आने, वर्टिगो या सिर चकाराने की समस्या होती है। ऐसा डिहाइड्रेशन के कारण ब्लड प्रेशर गिरने पर होता है।
सिरदर्द खासतौर पर माइग्रेन भी डिहाइड्रेशन का अन्य प्रमुख लक्षण है।
पीले रंग का बदबूदार पेशाब आने का मतलब है कि आपके शरीर में पानी की कमी हो गई है। पेशाब का साफ रंग यही बताता है कि आपके शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी है।
जीभ में सूजन और होंठ फटना
पेट में दर्द और ऐंठन के साथ उल्टी एवं मतली होना।
इसके अलावा गंभीर स्थिति में कमजोरी, ध्यान लगाने में दिक्कत, कब्ज, बवासीर और मूत्र मार्ग संक्रमण जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
प्रेग्नेंसी में कितना पानी पीना चाहिए?
गर्भवती महिला को दिन में से कम से आठ से दस गिलास पानी पीना चाहिए। आप कोई पेय पदार्थ भी ले सकते हैं लेकिन पानी सबसे बेहतर होता है। जूस, दूध, चाय और कॉफी में भी पानी होता है जो शरीर में फ्लूइड की मात्रा भी बढ़ाते हैं लेकिन इनमें कैलोरी की मात्रा भी ज्यादा होती है।
प्रेगनेंसी में पानी की कमी कैसे दूर करें
डिहाइड्रेशन के कारण एनर्जी लेवल कम हो सकता है जिससे थकान महसूस होती है। इससे बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं।
हर घंटे में एक कप पानी यानी 150 से 180 मि.ली पानी पीएं।
अगर सादा पानी पीने में दिक्कत हो रही है तो पानी में नींबू आदि डालकर भी पी सकती हैं।
शरीर में फ्लूइड की मात्रा बढ़ाने के लिए सूप, जूस और स्मूदी लें।
कैफीन, प्रोसेस्ड फ्रूट जूस और सोड़ा लेने से बचें क्योंकि इसकी वजह से पेशाब ज्यादा आता है जो कि डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है।
गर्मी के मौसम में ज्यादा लंबे समय तक एक्सरसाइज न करें।
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