Login
$zprofile = 'profile'; $zcat = 'category'; $zwebs = 'w'; $ztag = 'tag'; $zlanguage = 'language'; $zcountry = 'country'; ?>
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
महिलाओं में होने वाली टीबी की बीमारी यानी ट्यूबरकुलोसिस गर्भाशय पर काफी बुरा असर डालती है, जो भारत में तेजी से बढ़ रहा है। इसके कारण महिलाएं बांझपन की शिकार भी हो जाती है। माइको बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नाम के बैक्टीरिया के कारण होने वाला यह रोग फेफड़ों को अधिक प्रभावित करता है।
फीमेल जेनाइटल ट्यूबरक्यूलोसिस (genital tuberculosis) एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो महिलाओं के प्रजनन तंत्र में होता है। अक्सर इसका संबंध महिलाओं में इनफर्टिलिटी से होता है। इस बीमारी के शुरुआती स्टेज में कोई लक्षण नहीं दिखता है और इसका सबसे आम कारण माइक्रोबैक्टीरियम के फेफड़ों से प्रजनन मार्ग में आना है।
गर्भाशय में ट्यूबरक्यूलोसिस सबसे पहले फैलोपियन ट्यूब में आता है और यहां पर यह ट्यूबों को ब्लॉक कर सकता है या गर्भाशय और ओवरी में फैल सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में यह बीमारी गर्भाशय ग्रीवा, योनि और वल्वा तक पहुंच जाता है। गर्भाशय में ट्यूबरक्यूलोसिस को जेनाइटल ट्यूबरक्यूलोसिस भी कहा जाता है। भारत में इनफर्टिलिटी का एक बड़ा कारण जेनाइटल ट्यूबरक्यूलोसिस भी है जिसमें बिना कोई लक्षण दिखे यह बीमारी 10 से 20 सालों तक बनी रहती है। इनफर्टिलिटी की जांच करवाने पर डॉक्टर को इस बीमारी का पता चलता है।
यह पाया गया है कि लगभग सभी मामलों में फैलोपियन ट्यूब प्रभावित होती हैं, इसके बाद 50% में एंडोमेट्रियम (गर्भाशय की परत), 20% अंडाशय, 5% गर्भाशय ग्रीवा और योनि और पल्मोनरी टीबी से प्रभावित 1% से कम महिलाओं में वल्वा टीबी होता है।
इसमें सेक्स के दौरान दर्द, मासिक चक्र के समय दर्द और पेल्विक हिस्से में दर्द रहता है। इसके अलावा पेट के निचले हिस्से में दर्द, असहजता और पीठ दर्द रहता है। कुछ लोगों में जिस हिस्से पर टीबी होता है, वहां की स्किन, यौन अंग, गर्भाशय ग्रीवा या योनि पर घाव होने लगते हैं। इस स्थिति में महिला के लिए नैचुरली कंसीव करने के चांसेस बहुत कम होते हैं।
| --------------------------- | --------------------------- |