Login
$zprofile = 'profile'; $zcat = 'category'; $zwebs = 'w'; $ztag = 'tag'; $zlanguage = 'language'; $zcountry = 'country'; ?>
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
बच्चेदानी में गांठ होने के बाद मां बनना है नामुमकिन? जानें फाइब्रॉइड से जुड़ी ऐसी 5 भ्रामक बातों का सच
Fibroid Awareness Month 2022: गर्भाशय में गांठ को लेकर महिलाओं में कई भ्रामक बातें भी फैली हुई हैं। ऐसे में सही जानकारी रखना बेहद जरूरी है।
Fibroid Awareness Month 2022: बच्चेदानी में गांठ की समस्या (Uterine fibroids) आज कल तेजी से बढ़ती जा रही है। दरअसल, इसमें गर्भाशय की आंतरिक परत की कोशिकाएं मोटी और बड़ी हो जाती हैं और इक्ट्ठा हो कर गांठ बना लेती हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि मोटापा, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन्स से जुड़ी गड़बड़ियां, अनुवांशिकता पारिवारिक कारण और बेहद खराब लाइफस्टाइल। हालांकि, फाइब्रॉइड बहुत छोटे हों और कम हों तो किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होती पर कई बार जानकारी के अभाव से स्थिति खराब हो सकती है। ऐसे में आपको बच्चेदानी में गांठ से जुड़ी भ्रामक बातों (myths about uterine fibroid in hindi) से बचना चाहिए और सही तथ्यों को जानते हुए समय से अपना इलाज करवाना चाहिए। तो, आइए हम आपको बताते हैं बच्चेदानी में गांठ से जुड़ी ऐसी कुछ भ्रामका बातों का तथ्य।
बच्चेदानी में गांठ से जुड़ी भ्रामक बातें-Myths and facts about uterine fibroid in hindi
1. सिर्फ 30 से 40 की उम्र की महिलाओं को ही होता है फाइब्रॉइड
फाइब्रॉइड सभी उम्र की महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। 20 से 80 प्रतिशत महिलाओं में 50 वर्ष की उम्र तक फाइब्रॉइड विकसित हो जाते हैं। इसके अलावा फाइब्रॉइडवाली कई महिलाओं को लक्षण न होने पर उनके बारे में पता भी नहीं चल पाता है। सामान्य तौर पर, महिलाओं में एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट की शुरुआत से लेकर मेनोपॉज के बाद तक फाइब्रॉइड विकसित होने का जोखिम रहता है।
2. गर्भाशय में गांठ होने पर मां बनना नामुमकिन है
फाइब्रॉइड होने पर अक्सर कहा जाता है कि महिलाओं की फर्टिलिटी खत्म हो जाती है और वो कभी मां नहीं बन सकतीं, तो ये बात पूरी तरह से सच नहीं है। दरअसल, ये फाइब्रॉइड के प्रकार और साइज पर निर्भर करती है। सभी फाइब्रॉइड आपकी प्रजनन क्षमता पर असर नहीं डालते हैं। और कई बार इलाज के साथ कई महिलाएं स्वस्थ गर्भधारण करती हैं।
3. फाइब्रॉइड बच्चेदानी में कैंसर का कारण बनता है
जैसे ही एक महिला को फाइब्रॉइड का पता चलता है, वह पूछती है कि क्या फाइब्रॉइड कैंसर है। महिलाओं को घबराना नहीं चाहिए क्योंकि फाइब्रॉइड मुख्य रूप से टिशूज का बढ़ना और इक्ट्ठा होना है और आमतौर पर इससे बच्चेदानी में कैंसर नहीं होता है। हालांकि, फाइब्रॉइड आपके दैनिक कार्यों को आसानी से करने की आपकी क्षमता को बाधित कर सकता है। केवल 0.3% फाइब्रॉइड ही सार्कोमा (sarcomas) हो सकते हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं।
4. बच्चेदानी निकलवाना ही फाइब्रॉइड का इलाज है
पहले फाइब्रॉइड से पीड़ित महिलाओं के लिए अक्सर हिस्टेरेक्टॉमी ही एकमात्र विकल्प होता था। वर्तमान में, तकनीकी विकास के कारण, हिस्टेरेक्टॉमी के अलावा कई न्यूनतम इनवेसिव विकल्प उपलब्ध हैं। अधिकांश महिलाओं के लिए अब गर्भाशय फाइब्रॉइड एम्बोलिज़ेशन (Uterine fibroid embolization ) जैसे विकल्प हैं। यह गैर-सर्जिकल प्रक्रिया गर्भाशय को हटाए बिना फाइब्रॉइड से निपटने में मदद करती है। ये उन लोगों के लिए एक अच्छा समाधान है जो सर्जरी और लंबी रिकवरी प्रक्रिया से बचना चाहते हैं। हालांकि, आपका इलाज करने वाला डॉक्टर यह तय करने के लिए सही व्यक्ति है कि फाइब्रॉइड का सबसे अच्छा इलाज कैसे हो सकता है।
5. एक बार फाइब्रॉएड हटा दिए जाने के बाद ये वापस नहीं होता
इस बात पर आप पूरी तरह से भरोसा नहीं कर सकते कि एक बार फाइब्रॉएड हटा दिए जाने के बाद ये वापस नहीं होगा, बल्कि कुछ मामलों में ये हो सकता है। दरअसल, उपचार के बाद नए गर्भाशय फाइब्रॉएड विकसित हो सकते हैं। तो, इलाज के बाद भी नियमित रूप से अपने चिकित्सक से संपर्क करना होगा। नियमित रूप से टेस्टिंग करवाते रहना इससे बचने में मदद कर सकता है।
| --------------------------- | --------------------------- |