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कई बच्‍चों का रात को सोते समय नींद में पेशाब निकल जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जिनकी पहचान कर आप इस समस्‍या का इलाज कर सकते हैं।

आखिर रात में बिस्‍तर क्‍यों गीला कर देते हैं बच्‍चे! कहीं इसके पीछे कोई गंभीर कारण तो नहीं
बच्‍चे रात को सोते समय अक्‍सर बिस्‍तर गीला कर देते हैं। बच्‍चों में होने वाली इस समस्‍या को Bed wetting भी कहा जाता है। इसमें रात को सोने के बाद बच्‍चे का अपने आप पेशाब निकल जाता है। इसे लेकर आपको ज्‍यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। बच्‍चे को टॉयलेट ट्रेनिंग ठीक से न मिलने पर ऐसा हो सकता है। बच्‍चे के विकास का यह एक सामान्‍य हिस्‍सा है।

7 साल की उम्र तक बैड वैटिंग चिंता की बात नहीं है। हो सकता है कि इस उम्र तक आपका बच्‍चा रात को पेशाब रोकना सीख रहा हो। यदि इस उम्र के बाद भी रात को बिस्‍तर गीला करने की परेशानी हो रही है तो आपको इस समस्‍या को समझकर इसका इलाज करना चाहिए।

​बिस्‍तर में पेशाब करने के कारण

कई कारणों से बच्‍चे सोते समय बिस्‍तर में पेशाब कर देते हैं, जैसे कि :

हो सकता है कि रात को पेशाब रोकने के लिए आपके बच्‍चे का मूत्राशय पर्याप्‍त विकसित न हुआ हो।
अगर मूत्राशय को कंट्रोल करने वाली नसें धीरे मैच्‍योर हो रही हैं तो पेशाब आने पर बच्‍चे की नींद नहीं खुलती है। ऐसा खासतौर पर गहरी नींद में होता है।
बचनप में रात के समय पेशाब कम आने के लिए कुछ बच्‍चों के शरीर में पर्याप्त मूत्र-रोधी हार्मोन नहीं बन पाते हैं।
मूत्रमार्ग में संक्रमण के कारण पेशाब रोकने में बच्‍चे को दिक्‍कत आ सकती है।
स्‍लीप एप्निया में नींद के दौरान सांस लेने में दिक्‍कत होती है जिसमें कभी-कभी सोते समय पेशाब निकल सकता है।

इसके अलावा डायबिटीज, लंबे समय से कब्‍ज, मूत्र मार्ग या तंत्रिका तंत्र की संरचना में दिककत की वजह से बच्‍चा रात में बिस्‍तर गीला कर सकता है।

​बिस्तर में पेशाब करने का इलाज

अगर आपके बच्‍चे की रात को सोते समय बिस्‍तर गीला करने की आदत है तो आप नीचे बताए गए तरीकों से इस समस्‍या को ठीक कर सकते हैं।

कमरे से बाथरूम ज्‍यादा दूर नहीं होना चाहिए। वहीं बाथरूम ऐसी जगह भी नहीं होना चाहिए, जहां जाने से बच्‍चे को डर लगे।
अगर बच्‍चे को रात में उठकर पेशाब करने जाने से डर लगता है तो उसे बोलें कि वो आपको अपने साथ लेकर जाए। आप कमरे में एक हल्‍का बल्‍ब भी जलाकर रख सकते हैं।
बच्‍चे को पर्याप्‍त मात्रा में पानी और अन्‍य तरल पदार्थ दें। उसे दिन में पानी ज्‍यादा पीना है। कोशिश करें कि वो सुबह के समय 40 फीसदी, दोपहर में 40 फीसदी और फिर शाम को 20 फीसदी पानी एवं तरल पदार्थ ले। इससे रात में पेशाब कम आएगा।

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