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6 महीने से कम उम्र के शिशुओं को पानी देने से डायरिया और कुपोषण की समस्या पैदा हो सकती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक नवजात/शिशु को पानी देने से उनका पेट भर जाता है और वो दूध नहीं पी पाते। इससे शिशुओं को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते और उनमें कुपोषण का शिकार होने का जोखिम बढ़ सकता है।
कुपोषण का शिकार होने के खतरे की सबसे बड़ी वजह है नवजात के पेट की क्षमता। बताया जाता है कि शिशु के जन्म के एक दिन बाद उसकी पेट की क्षमता केवल 5 से 7 ml ही होती है। तीसरे दिन तक यह क्षमता बढ़कर 27 ml हो जाती है। फिर 10 दिन का होते-होते बच्चे के पेट में लगभग 81 ml जगह हो जाती है। इतने छोटे पेट को अगर पानी से भर दिया जाएगा, तो कुपोषण होना लाजमी है।
इसी वजह से 6 महीने तक के शिशु को पानी पिलाने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि मां के दूध में ही पर्याप्त पानी होता है, जो शिशु के लिए काफी है।

सातवें महीने से शिशु को पानी देना शुरू कर सकते हैं। पांच महीने पूरे होने के बाद बच्चे के पेट की क्षमता थोड़ी बढ़ जाती है। इसी वजह से डब्लूएचओ शिशुओं को छह महीने बाद ही पानी पीलाने की सलाह देता हैै।

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