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माँ का दूध शिशु के लिए प्रकृति का सबसे बेहतरीन आहार है। दूसरी तिमाही में आपकी दुग्ध ग्रंथिया पूरी तरह तैयार हो जाती है, ताकि अगर शिशु का जन्म समय से पहले हो जाए तो भी आप उसे स्तनपान करवाने के लिए तैयार हों। माँ के दूध की सबसे खास बात यह है कि शिशु की जरुरत के हिसाब से इसमें बदलाव आता रहता है। यह अत्यंत व्यक्तिगत आहार होता है और शिशु के वजन और उसकी भूख के आधार पर स्तन दूध के उत्पादन की मात्रा भी बढ़ती रहती है।
गर्भावस्था के दौरान स्तनों में कैसे बदलाव आता है?
जब आप गर्भवती होती हैं, तभी से आपके स्तन शिशु को स्तनपान करवाने की तैयारी शुरु कर देते हैं।
निप्पलों में सिहरन, संवेदनशील और सूजे हुए स्तन गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों में से एक है। ये शरीर में हॉर्मोनों के बढ़ते स्तर की वजह से होता है।
निप्पल के चारों तरफ की त्वचा (एरिओला) का रंग भी थोड़ा गहरा लग सकता है और उस पर छोटे-छोटे उभार दिखाई दे सकते हैं। शिशु को स्तनपान की तरफ आकर्षित करने का यह प्रकृति का प्रत्यक्ष तरीका है।
एरिओला पर छोटे-छोटे उभार एक तैलीय तत्व का उत्पादन करते हैं, जो कि स्तनपान के दौरान निप्प्लों कों साफ करते हैं, चिकनाई देते हैं और इनफेक्शन से बचाते हैं। इनकी गंध एमनियोटिक द्रव जैसी होती है, इसलिए आपका शिशु जन्म के बाद से ही स्वत: इस जानी-पहचानी गंध के प्रति आकर्षित हो जाता है।
शिशु के जन्म के समय तक आपके स्तनों में ग्रंथीय ऊत्तकों का माप दोगुना हो सकता है। माप में इस परिवर्तन का समय हर महिला में अलग हो सकता है। यह गर्भावस्था के मध्य में या गर्भावस्था के अंतिम चरण में हो सकता है, या फिर शिशु के जन्म के बाद भी ऐसा हो सकता है।
अगर आपके स्तन छोटे हों या डिलीवरी के बाद इनका माप बढ़ा हुआ न लगे, तो भी चिंता न करें। स्तनों के माप का आपके स्तनदूध उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं होता। छोटे स्तनों वाली मां भी शिशु के लिए पर्याप्त दूध का उत्पादन करती हैं। आपका शिशु जितना ज्यादा दूध पीएगा, उतने ही अधिक दूध का उत्पादन होगा।
शिशु के जन्म के बाद जब आपका दूध आना शुरु होता है, तो आपके स्तन काफी भारी और भरे हुए दिखाई देंगे। शिशु के जन्म के एक या दो सप्ताह बाद, आपके स्तन तकरीबन उसी माप के हो जाएंगे, जितने वे गर्भावस्था के दौरान थे। वे ऐसे तब तक रहेंगे, जब तक आप शिशु को स्तनपान करवाती रहेंगी।
माँ के दूध में कौन से पोषक तत्व होते हैं?
कोलोस्ट्रम वह पहला दूध है, जो गर्भावस्था के दौरान आपके स्तनों में बनता है। नवजात शिशु के लिए इसके फायदे को देखते हुए इस 'तरल सोना' (लिक्विड गोल्ड) कहा जाता है। आपका यह पहला दूध प्रोटीन,मिनरल्स, लवण, विटामिन ए, नाइट्रोजन, सफेद रक्त कोशिकाओं और विशेष एंटिबॉडीज से भरपूर होता है। इसमें बाद में आने वाले परिपक्व दूध की तुलना में वसा और शर्करा कम होती है।
परिपक्व स्तन दूध में पानी, वसा, कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, विटामिन, खनिज और एमिनो एसिड होते हैं। इसमें सफेद रक्त कोशिकाएं, एंटिबॉडीज, एन्जाइम्स और अन्य तत्व भी होते हैं जो शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
स्तन दूध में 200 से भी ज्यादा फायदेमंद तत्व होते हैं, और अब भी लगातार इनकी खोज जारी है। उदाहरण के तौर पर शोधकर्ताओं का अब यह मानना है कि स्तन दूध में मौजूद फैट्टी एसिड शिशु के मस्तिष्क और रेटिना के विकास को बढ़ावा देता है। साथ ही यह संज्ञानात्मक विकास को भी बढ़ा सकता है। माँ के दूध में मौजूद बहुत से तत्व जैसे कि इनफेक्शन से लड़ने वाली सफेद रक्त कोशिकाओं का उत्पादन नहीं किया जा सकता।
माँ के स्तनों में परिपक्व दूध शिशु के जन्म के करीब दो से चार दिनों के बाद आता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप जन्म के बाद शुरुआती कुछ घंटों और दिनों में आप शिशु को कितनी बार स्तनपान करवाती हैं। शिशु की भूख और स्तनपान की बारंबारता के आधार पर आपके दूध का उत्पादन घटता-बढ़ता रहता है।
स्तनपान के दौरान शुरुआत में अग्रदूध (फोरमिल्क) आता है जिसमें पानी और लैक्टोस की मात्रा ज्यादा होती है। इसके बाद वसा और कैलोरी से भरपूर दूध आता है जिसे अंग्रेजी में हिंडमिल्क कहते हैं।
मेरे स्तनों में दूध कैसे बनता है?
diagram of breastmilk production in the breast
BabyCenter
माँ का दूध शिशु के लिए प्रकृति का सबसे बेहतरीन आहार है। आपके स्तन में स्तन ग्रंथियां दूध का उत्पादन करती हैं। स्तन ग्रंथियों में अलग-अलग हिस्से स्तनदूध के उत्पादन में भूमिका अदा करते हैं:
एल्वियोली: जहां स्तनदूध का उत्पादन होता है। आपके स्तन में ये छोटे अंगूर जैसे कोषों के गुच्छे होते हैं। ये छोटी-छोटी मांसपेशियों से घिरे होते हैं, जो कि इन्हें भींचकर दूध को बाहर छोटी नलिकाओं में निकालती हैं। ये हर गर्भावस्था में बनती हैं।
छोटी नलिकाएं (डक्ट्यूल्स): छोटी नलिकाएं जो दूध को एल्वियोली से मुख्य दुग्ध नलिका तक लाती हैं।
दुग्ध नलिकाएं (मिल्क डक्ट्स): यह नलिकाओं का वह गहन तंत्र है, जो एल्वियोली और छोटी नलिकाओं से स्तनदूध को सीधा शिशु तक पहुंचाता है। आप इन दुग्ध नलिकाओं को अलग-अलग स्ट्रॉ की तरह मान सकती हैं, जिनमें से कुछ एक-दूसरे से मिल जाती हैं। आपके निप्पल के सिरे तक करीब आठ या नौ स्ट्रॉ यानि नलिकाएं होती हैं, जो शिशु को दूध पहुंचाती हैं। हर गर्भावस्था में इन नलिकाओं की संख्या और माप बढ़ जाता है। जब आप स्तनपान करवाना शुरु करती हैं, तब आपके एक स्तन में औसतन नौ नलिकाएं होती हैं।
हो सकता है गर्भावस्था के दौरान आपके स्तनों से दूध की कुछ बूंदों का रिसाव हो। वास्तव में, आपकी दूध-उत्पादन प्रणाली गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान कभी भी तैयार हो सकती है। यदि आपका शिशु समय से पहले पैदा हो जाए, तो भी आप उसे स्तनपान करवा सकेंगी।
आपके शिशु के जन्म और अपरा की डिलीवरी हो जाने के बाद आपके शरीर में ईस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टीरोन हॉर्मोन के स्तर घटने लगते हैं। इससे आपके मस्तिष्क में पीयूष ग्रंथि (पिटूइटरी ग्लैंड) से प्रोलैक्टिन हॉर्मोन जारी होना शुरु हो जाता है।
प्रोलैक्टिन आपके शिशु को पोषित करने के लिए शरीर को खूब सारा दूध बनाने के संकेत देता है। और इसकी वजह से आप शिशु के लिए और अधिक ममता व प्यार-दुलार महसूस कर सकती हैं।
क्या छोटे स्तनों वाली माँ कम स्तन दूध का उत्पादन करती हैं?
स्तनपान के मामले में बड़े या छोटे स्तनों से कोई फर्क नहीं पड़ता। स्तनों के माप का आपके स्तनदूध उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं होता।
स्तनों का माप अधिकांशत: इस बात से निर्धारित होता है कि उनमें कितने ज्यादा चर्बीदार ऊत्तक (फैट्टी टिश्यू) हैं। ये आपके गर्भवती होने पर तैयार हो जाते हैं। शिशु के जन्म के समय आपके स्तनों का माप कुछ भी हो, आपके पास शिशु को स्तनपान करवाने के लिए पर्याप्त ग्रंथीय ऊत्तक होंगे।
यदि आपको स्तनदूध की आपूर्ति कम लगे, तो भी इस बात की संभावना बहुत कम है कि आप शिशु के लिए पर्याप्त दूध का उत्पादन नहीं कर सकतीं। अधिकांश मामलों में, समस्या यह नहीं होती कि आप कितना स्तनदूध का उत्पादन कर रही हैं, समस्या यह होती है कि आपका शिशु कितना दूध पाने में सक्षम है।
यदि आपका शिशु स्तनों से सही ढंग से मुंह में नहीं ले पा रहा (लैचिंग), तो वह पर्याप्त दूध नहीं पा सकेगा। शिशु सही तरीके से लैच कर रहा है या नहीं यह जानने के लिए आप हमारी विजुअल गाइड भी देख सकती हैं।
अपने शिशु को स्तनपान करवाना मैं कब शुरु कर सकती हूं?
आप शिशु के जन्म के बाद से ही उसे स्तनपान करवाना शुरु कर सकती हैं। जन्म के तुरंत बाद त्वचा का त्वचा से संपर्क निम्नांकित तरीकों से फायदेमंद हो सकता है:
शरीर को 'लव हॉर्मोन' ऑक्सीटॉसिन जारी करने में, जिससे स्तनपान करवाने और शिशु के साथ बांडिंग बढ़ाने में मदद मिलती है।
शिशु को आराम देने और उसकी हृदय गति को सामान्य करने में।
शिशु के स्तनपान करने के स्वाभाविक प्रयास शुरु करने में।
शिशु को गर्माहट देने और गर्भ से बाहर आने के बाद भी उसे सुरक्षित महसूस करवाने में।
ये सभी एक साथ मिलकर स्तनपान की शानदार शुरुआत में मदद करते हैं। आप शिशु को जो पहला दूध पिलाएंगी, वह कोलोस्ट्रम होगा। यह गाढ़ा, मलाई जैसा दिखने वाला दूध होता है, जिसमें प्रोटीन की उच्च मात्रा और वसीय तत्व कम होंगे। आपके शिशु के जन्म के बाद पहले तीन दिनों तक उसे केवल इस कोलोस्ट्रम की ही जरुरत होती है। आपके शिशु का पेट बहुत छोटा होता है, इसलिए उसे शुरुआत में केवली थोड़ी मात्रा में ही दूध चाहिए होता है।
कोलोस्ट्रम रोगों से लड़ने वाली कोशिकाओं और प्रोटीन से भरपूर होता है, जो कि आपके शिशु की रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत बनाते हैं।
कोलोस्ट्रम में ऐसे अनूठे तत्व भी होते हैं जो शिशु के विकास को बढ़ावा देते हैं और शिशु की आंतों में सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या बढ़ाते हैं। ये जीवाणु शिशु की आंतों को दस्त (डायरिया) और अन्य संक्रमण पैदा करने वाले रोगाणुओं से लड़ने में मदद करते हैं।
जन्म के बाद तीन दिन तक जब शिशु कोलोस्ट्रम का फायदा ले चुका होता है, तो फिर आपका बाद वाला दूध आता है। इस दूध में भी कोलोस्ट्रम की तरह रोगाणुओं से लड़ने वाले और सूक्ष्म जीवाणुओं से भरपूर तत्व होते हैं। इसके साथ-साथ, स्तनदूध में प्रोटीन और वसा के अलग स्तर होते हैं, जो कि शिशु के स्वस्थ विकास में मदद के लिए एकदम उचित होते हैं।
जन्म के बाद अगले छह महीने तक आपके शिशु को भोजन और पेय के रूप में केवल आपका दूध चाहिए होता है। मगर यदि आप उसे शुरुआत के दो साल तक स्तनपान करवाएं तो उसे इसका भरपूर फायदा मिल सकता है।
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