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जन्म लेने के बाद माँ की प्लेसेंटा से शिशु को अलग करने के लिए बच्चे की नाभि को काटा जाता है।
इसके लिए शिशु की गर्भनाल को बच्चे की नाभि की तरफ ऊपर से 5-6 इंच तक और माँ की प्लेसेंटा की तरफ से बांध दिया जाता है। इसके लिए दोनों तरफ प्लास्टिक की क्लिप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके बाद स्टरलाइज किए गए ब्लेड या कैंची से क्लिप किए गए गर्भनाल के बीच के हिस्से को काट दिया जाता है।
कैंची या ब्लेड को स्टरलाइज करने से बच्चे को अम्बिलिकल कॉर्ड में बैक्टीरियल इंफेक्शन न होने का जोखिम कम किया जा सकता है।
इसे काटते वक्त दर्द भी नहीं होता है, क्योंकि इसमें कोई नर्व यानी तंत्रिका नहीं होती है। गर्भनाल को काटने से पहले एक प्लास्टिक की क्लिप बच्चे से जुड़ी नाल को 3 से 4 cm तक लगाई जाती है और फिर दूसरी तरफ की नाल में क्लैंप को लगाया जाता है। इन दोनों प्लास्टिक के बीच से गर्भनाल को काटा जाता है।

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