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10 प्वाइंट्स: कब अलर्ट हों और क्या करें पेरेंट्स

1. अगर 4 से 5 साल की उम्र के बाद भी बच्चा अपनी बात पूरी करने में काफी समय ले रहा है तो इसे उसकी शैतानी न समझें। चिकित्सक या थैरेपिस्ट से सम्पर्क करें।

2. माता-पिता जब बच्चों को किसी बात पर डांट देते हैं या डरा देते हैं तब भी बच्चा अपनी बात को पूरा नहीं कर पाता या बोलते हुए कई बार बीच में रुक जाता है।

3. कई बार माता-पिता मेहमानों के सामने बच्चे से कविता सुनाने की ज़िद करते हैं जिस वजह से बच्चा घबरा सकता है और बोलते वक़्त हकलाने लगता है। ऐसे में दबाव न बनाएं।

4. बच्चे की स्थिति समझते हुए उससे प्यार से बात करें और आराम से बोलने के लिए प्रोत्साहित करें न कि जल्दी या कम समय में बोलने के लिए दबाव बनाएं।

5. जोर से बोलने की ज़िद के कारण बच्चे शब्द पूरा नहीं बोल पाते और बीच में ही रुक जाते हैं। इसलिए उसे क्षमता अनुसार बोलने दें ताकि वह अपनी बात बिना डर के रख सके।

6. अनुवांशिक हो सकती है कुछ बच्चों में हकलाने की समस्या। उम्र बढ़ने पर समझ में आती है जबकि कुछ में पैदायशी होती है।

7. महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह समस्या अधिक पाई जाती है। लेकिन इसे आसानी से दूर भी किया जा सकता है।

8. जब बच्चे बिना सांस लिए एक बार में ज़्यादा शब्द बोलने की कोशिश करते हैं तो हकलाते हैं। एयरफ्लो तकनीक की मदद से उन्हें 3-4 शब्द बोलने के बाद सांस लेने को कहते हैं।

9. इसके साथ ही स्पीच ईज़ी टेक्नीक में बच्चों को धीरे-धीरे बात करना, शब्दों को दोहराना और देख-देख कर पढ़ना सिखाया जाता है जो उन्हें बिना रुके बोलने में मददगार साबित होता है।

10. बड़ों के लिए टैपिंग टैक्नीक हकलाहट या अटक कर बोलने की समस्या को उम्र बढ़ने के बाद भी दूर किया जा सकता है। इसमें बोलते वक़्त हाथों को थपथपाया जाता है।

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