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हार्ट ब्लॉकेज क्या है?
हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को मेडिकल टर्म में कंडक्शन डिसऑर्डर के नाम से जाना जाता है। हार्ट ब्लॉकेज, हृदय में इलेक्ट्रिकल संकेतों से जुड़ी एक समस्या है। ये इलेक्ट्रिकल सिग्नल दिल के धड़कने की वजह बनते हैं और हृदय की गति को नियंत्रित करने का काम करते हैं। साथ ही यह हृदय को पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने में भी मदद करते हैं। वहीं, समस्या तब उत्पन्न होती है, जब हृदय के ऊपरी भाग (अट्रिया) से ये इलेक्ट्रिकल सिग्नल हृदय के निचले भाग (वेंट्रिकल्स) तक ठीक प्रकार से नहीं पहुंच पाते हैं। इसी समस्या को हार्ट ब्लॉकेज के नाम से जाना जाता है (1) (2)।
अब हम हार्ट ब्लॉकेज के प्रकार जान लेते हैं। उसके बाद हार्ट ब्लॉकेज क्यों होता है? इस बारे में बात करेंगे।
हार्ट ब्लॉकेज के प्रकार – Types of Heart Blockage in Hindi
मुख्य रूप से हार्ट ब्लॉकेज तीन प्रकार के होते हैं, जो हृदय के अलग-अलग हिस्सों के आधार पर परिभाषित किए जाते हैं। यह कुछ इस प्रकार हैं (2) :
सिनोअट्रियल नोड ब्लॉक : सिनोअट्रियल नोड हृदय का वह अहम हिस्सा है, जो एक प्राकृतिक पेसमेकर की तरह काम करता है। यह इलेक्ट्रिकल सिग्नल पैदा करके हृदय को गति करने के लिए प्रेरित करता है। जब यह हिस्सा किसी वजह से प्रभावित होता है और हृदय को उचित सिग्नल नहीं दे पाता है, तो इसे सिनोअट्रियल नोड ब्लॉक कहा जाता है (3)।
एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड ब्लॉक : एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड ब्लॉक की स्थिति में हृदय में पैदा होने वाले इलेक्ट्रिकल संकेत की गति या तो धीमी होती है या फिर यह संकेत हृदय के ऊपरी भाग (अट्रिया) से निचले भाग (वेंट्रिकल्स) तक नहीं पहुंच पाते हैं (4)।
बंडल ब्रांचेज ब्लॉक : बंडल ब्रांचेज ब्लॉक के दो प्रकार हैं, जो हृदय के निचले दाए और बाएं हिस्से से संबंधित है।
राइट बंडल ब्लॉक : यह स्थिति मायोकार्डियम (हृदय की मांसपेशियां) में ठीक रक्त प्रवाह न होने की वजह से पैदा होती है (5)।
लेफ्ट बंडल ब्लॉक : यह स्थिति मायोकार्डियम (हृदय की मांसपेशियां) में चोट लगने की स्थिति के कारण या अन्य किसी क्षति के कारण पैदा होती है (6)।
हार्ट ब्लॉकेज के कारण – Causes of Heart Blockage in Hindi
हमारे द्वारा किए गए कई काम जाने-अनजाने में हार्ट ब्लॉकेज को बढ़ावा दे सकते हैं। तो आइए, हार्ट ब्लॉकेज क्यों होता है? यह जानने के लिए इसके कारणों पर गौर करते हैं (1) :
जन्मजात हार्ट ब्लॉकेज
दवाओं का साइड इफेक्ट
ह्रदय से संबंधित रोग
हार्ट सर्जरी
संक्रमण (जैसे :- बोरेलिया बर्गडॉर्फेरी द्वारा होने वाली लाइम डिजीज)
हार्ट ब्लॉकेज क्यों होता है? यह समझने के बाद अब हम हृदय ब्लॉकेज के लक्षण के बारे में जानेंगे।
हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण – Symptoms of Heart Blockage in Hindi
हृदय ब्लॉकेज के लक्षण पर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो इससे होने वाले जोखिम को रोका जा सकता है। चलिए, अब इन लक्षणों के बारे में जानते हैं (1)।
छाती में दर्द
सिर चकराना
बेहोश होने जैसा महसूस होना
जल्दी थकान महसूस होना
असामान्य हृदय गति (जैसे :- अधिक तेज दिल का धड़कना)
हार्ट में ब्लॉकेज के लक्षण के बाद हम कुछ आसान हार्ट ब्लॉकेज के लिए घरेलू उपाय बताएंगे।
हार्ट ब्लॉकेज के लिए घरेलू उपाय – How to Remove Heart Blockage Naturally in Hindi
हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को घरेलू उपचार के जरिए भी दूर किया जा सकता है, जो कुछ इस प्रकार हैं :
1. अनार
सामग्री:
1 या 2 अनार
कैसे करें उपयोग:
अनार को काट कर उसके बीज निकाल लें।
फिर इन्हें मिक्सर में डालकर जूस बना लें।
अब इस ताजा जूस को पिएं।
चाहें, तो अनार के बीज को खा भी सकते हैं।
कितनी बार करें:
प्रतिदिन 1 गिलास पिएं।
कैसे है लाभदायक:
अनार के जूस के फायदे कई हैं। यह हृदय की धमनियों को लचीला रखने और रक्त वाहिकाओं में आई सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। इसे एथेरोस्क्लेरोसिस (आर्टरी वाल्स में फैट और अन्य पदार्थ का जमना) को कम करने के लिए भी जाना जाता है, जो हृदय रोग के प्रमुख कारण में से एक है। यह धमनियों के जोखिम को कम कर सकता है, जो हृदय और मस्तिष्क के रक्त प्रवाह को बनाए रखती हैं, जिससे हार्ट ब्लॉकेज का खतरा दूर हो सकता है (7)। ऐसे में हार्ट ब्लॉकेज के घरेलू इलाज के लिए अनार को उपयोगी माना जा सकता है।
2. दालचीनी
सामग्री:
1 चम्मच दालचीनी पाउडर
1 या 2 चम्मच शहद
कैसे करें उपयोग:
दालचीनी पाउडर को शहद में मिलाकर पेस्ट बना लें।
फिर इस पेस्ट का सेवन करें।
कितनी बार करें:
प्रतिदिन इसके उपयोग से असर जल्दी दिखाई देने लगेगा।
कैसे है लाभदायक:
दालचीनी को हृदय रोग से जुड़ी समस्याओं के लिए औषधि की तरह उपयोग किया जा सकता है। एक अध्ययन से पता चला है कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल प्रभाव पाए जाते हैं। साथ ही यह एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करता है, जबकि एचडीएल यानी अच्छे कोलेस्ट्रोल के स्तर को बेहतर कर सकता है। साथ ही यह हृदय तक रक्त प्रवाह को बनाए रखने में मदद भी कर सकता है (8)। चूंकि कोलेस्ट्रोल और हृदय तक रक्त संचार न होना हार्ट ब्लॉकेज होने के कारण में शामिल है। इसलिए, इसे हार्ट ब्लॉकेज का अच्छा घरेलू उपचार माना जा सकता है।
3. लाल मिर्च
सामग्री:
1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
1 कप गुनगुना पानी
कैसे करें उपयोग:
मिर्च पाउडर को अच्छी तरह से गुनगुने पानी में घोल लें।
फिर उसे पी लें।
कितनी बार करें:
कुछ हफ्तों तक प्रतिदिन उपयोग करें।
फिर एक दिन छोड़ कर उपयोग करें।
कैसे है लाभदायक:
हार्ट ब्लॉकेज के आसान घरेलू उपाय के तौर पर लाल मिर्च का भी उपयोग कर सकते हैं। इसमें एंटीहाइपरटेंसिव, एंटीडायबिटिक और एंटीओबेसिटी गुण पाए जाते हैं। यहां हम बता दें कि हाइपरटेंशन, डायबिटीज और ओबेसिटी तीनों ही समस्याएं हृदय रोग का कारण बन हार्ट ब्लॉकेज का जोखिम बढ़ा सकती हैं। वैज्ञानिक शोध में भी पाया गया है कि लाल मिर्च के प्रयोग से हृदय रोग के कारण होने वाले मृत्यु दर को कम किया जा सकता है (9) (10)।
4. लहसुन
सामग्री:
2 या 3 लहसुन की कलियां
1 कप दूध
कैसे करें उपयोग:
दूध में लहसुन को डाल लें।
फिर दूध को थोड़ी देर उबाल लें।
फिर थोड़ा ठंडा होने के बाद उसे पी लें।
कितनी बार करें:
इसका उपयोग प्रतिदिन करें।
भोजन बनाते समय भी लहसुन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कैसे है लाभदायक:
लहसुन के फायदे में हृदय रोग के जोखिम को कम करना भी शामिल है। लहसुन के प्रयोग से एथेरोस्क्लेरोसिस, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित किया जा सकता है। इसका सीधा फायदा हृदय को होता है। साथ ही यह हार्ट ब्लॉकेज के जोखिम को कम करने में भी मदद कर सकता है (11)। ऐसे में इसे हार्ट ब्लॉकेज के आसान घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
5. हल्दी
सामग्री:
1 चम्मच हल्दी पाउडर
1 कप दूध
कैसे करें उपयोग:
दूध को गर्म कर लें।
फिर उसमें हल्दी पाउडर मिलाकर पी लीजिए।
कितनी बार करें:
प्रतिदिन इसके सेवन से फायदा हो सकता है।
कैसे है लाभदायक:
हल्दी को कई हार्ट ब्लॉकेज के घरेलू इलाज के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया है कि हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-कार्सिनोजेनिक (कैंसर कोशिकाओं को रोकने वाला), एंटी-थ्रोम्बोटिक (खून को जमने से रोकने वाला) गुण होते हैं, जो हृदय को सुरक्षित रखने का काम कर सकते हैं। साथ ही हार्ट ब्लॉकेज को कम करने में भी मदद कर सकते हैं (12)। इसलिए, हल्दी के प्रयोग से हार्ट ब्लॉकेज का इलाज किया जा सकता है।
6. नींबू
सामग्री:
1 नींबू का रस
1 गिलास पानी
1 चम्मच शहद
1 चम्मच काली मिर्च पाउडर
कैसे करें उपयोग:
पानी को गर्म कर लें। साथ ही उसमें ऊपर दी गई सभी सामग्रियों को मिला लें।
फिर कुछ देर के लिए पानी को ठंडा होने के लिए रख दें।
उसके बाद इसे पी लें।
कितनी बार करें:
इसे दिन में एक से दो बार तक पी सकते हैं।
कैसे है लाभदायक:
नींबू में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो कोलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखने का काम कर सकता है। वहीं, हृदय रोग का एक जोखिम कारक कोलेस्ट्रोल भी है (13)। वहीं, एक अन्य शोध में जिक्र मिलता है कि नींबू में मौजूद फ्लेवोनॉयड सीधे तौर पर ऐथिरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में फैट का जमाव) को ठीक करने में भी सहायक हो सकते हैं (14)। इस आधार पर इसे हार्ट ब्लॉकेज की समस्या में सहायक माना जा सकता है।
7. अंगूर
सामग्री:
लगभग 50 से 100 ग्राम अंगूर
कैसे करें उपयोग:
अंगूर को धोकर खा सकते हैं या फिर इसका जूस बनकर पी भी सकते हैं।
कितनी बार करें:
दिन में एक से दो बार में उपयोग कर सकते हैं।
कैसे है लाभदायक:
अंगूर का सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट व खास प्रकार के फाइटोकेमिकल हृदय को स्वस्थ रखने का काम कर सकते हैं (15)। वहीं, एक अन्य शोध में जिक्र मिलता है कि यह धमनियों में होने वाली रुकावट को दूर करने में भी मदद कर सकता है (16)। चूंकि धमनियों में रुकावट हार्ट ब्लॉकेज का जोखिम कारक है। इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि हृदय स्वास्थ्य को बरकरार रख यह हार्ट ब्लॉकेज के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।
8. अदरक
सामग्री:
अदरक या अदरक पाउडर
1 कप पानी
कैसे करें उपयोग:
अदरक पाउडर को पानी में डालकर कुछ देर के लिए गर्म करें।
पानी को कुछ देर तक ठंडा होने दें, फिर उसे पी लें।
कितनी बार करें:
प्रतिदिन उपयोग से फायदा दिखाई दे सकता है।
कैसे है लाभदायक:
अदरक के फायदे कई है। इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी और हाइपोलिपिडेमिक प्रभाव पाए जाते हैं, जो हृदय संबंधित रोगों को दूर करने में सहायक हो सकते हैं। साथ ही यह रक्त संचार में भी सहायक हो सकता है। वहीं, यह ऐथिरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में रुकावट) की समस्या में राहत पहुंचाने का काम कर सकता है, जिसे हार्ट ब्लॉक का जोखिम कारक माना जाता है (8)। ऐसे में हार्ट ब्लॉक की समस्या में अदरक को उपयोगी माना जा सकता है।
9. तुलसी
सामग्री:
मुट्ठी भर तुलसी के पत्ते
1 नींबू
1 चम्मच शहद
1 कप पानी
कैसे करें उपयोग:
तुलसी के पत्तों को पानी में डाल दें।
कुछ समय के लिए पानी को गर्म करें।
फिर उसमें शहद और नींबू का रस मिक्स कर दें।
थोड़ा ठंडा होने के बाद पानी को पी लें।
कितनी बार करें:
प्रतिदिन इसका सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है।
कैसे है लाभदायक:
तुलसी को आयुर्वेदिक दवा के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसमें तनाव को दूर करने वाले गुण पाए जाते हैं। साथ ही इसके एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव दिल से जुड़ी बीमारियों को दूर रखने का काम कर सकते हैं, जो हार्ट ब्लॉक के लिए जिम्मेदार साबित हो सकती हैं। तुलसी के प्रयोग से हाइपरटेंशन व अचानक होने वाले हृदयाघात की समस्या से बचाव हो सकता है (17)।
10. इलायची
सामग्री:
थोड़ी-सी इलायची
अर्जुन की छाल का पाउडर
कैसे करें उपयोग:
अर्जुन की छाल के पाउडर को पानी में मिलकर काढ़ा बना लें।
साथ ही उसमें कुछ इलायची भी डालें।
फिर इसे पी लें।
कितनी बार करें:
हफ्ते में 3 से 4 बार पी सकते हैं।
कैसे है लाभदायक:
इलाइची का इस्तेमाल हार्ट ब्लॉकेज की समस्या के निदान में सहायक हो सकता है। इसमें पाए जाने वाले कार्डियोटोनिक (हृदय की कार्यक्षमता में सुधार करने वाला) और एंटीऑक्सीडेंट गुण हृदय रोग से सुरक्षित रखने का काम कर सकते हैं। ये गुण हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को दूर करने में सहायक हो सकते हैं (18)। बता दें कार्डियोटोनिक दवा का इस्तेमाल दिल की मांसपेशियों की गति को बेहतर करने के लिए किया जाता है।
11. पीपल
सामग्री:
15 से 20 पीपल के हरे पत्ते
1 गिलास पानी
कैसे करें उपयोग:
पीपल के पत्ते को आगे और पीछे से थोड़ा काट लें और उसे अच्छे से धो लें।
एक बर्तन में पानी को गर्म करें और उसमे पत्तों को डाल दें।
कुछ समय तक पानी को गर्म करें और फिर उस पानी को थोड़ी देर बाद छानकर पी लें।
कितनी बार करें:
हफ्ते में 3 से 4 बार इसे उपयोग किया जा सकता है।
कैसे है लाभदायक:
पीपल को कई बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक और यूनानी औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। पीपल के पत्ते और छाल हृदय संबंधी बीमारियों को भी दूर करने में मददगार साबित हो सकते हैं। पीपल के पत्ते में एंटी-बैक्टीरियल, एंटीडायबिटिक, एंटीइंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक प्रभाव के साथ ही एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव भी पाए जाते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। वहीं, पीपल की छाल का उपयोग हृदय की कार्यक्षमता में सुधार करने का काम कर सकता है (19)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि पीपल के पत्ते और छाल का उपयोग हार्ट ब्लॉक की समस्या में राहत पहुंचा सकता है।
12. अर्जुन के पेड़ की छाल
सामग्री:
एक चम्मच अर्जुन की छाल का पाउडर
एक गिलास पानी
कैसे करें उपयोग:
टी पैन में पानी डालें और उसमें अर्जुन की छाल का पाउडर डालें।
अब टी पैन को गैस पर गर्म होने के लिए चढ़ा दें।
अच्छी तरह से उबाल आ जाने के बाद इसे अलग गिलास में निकाल लें और थोड़ा ठंडा होने के लिए रख दें।
ठंडा हो जाने के प इसे पी लें।
कितनी बार करें:
इस प्रक्रिया को हफ्ते में दो से तीन बार तक दोहराया जा सकता है।
कैसे है लाभदायक:
अर्जुन की छाल को आयुर्वेद में कई बीमारियों में उपयोगी माना गया है। इनमें हृदय रोग भी शामिल है। इससे जुड़े दो अलग-अलग शोधों से इस बात की पुष्टि होती है। एक शोध में जिक्र मिलता है कि यह बढ़े हुए बल्ड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। साथ ही हृदय की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने हृदय की कार्य क्षमता में सुधार कर सकती है (20)। वहीं, अन्य शोध में इसे हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों की रुकावट को दूर करने में सहायक माना गया है (21)। इस आधार पर इसे हार्ट ब्लॉकेज के उपाय के तौर पर उपयोगी माना जा सकता है।
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