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गर्भावस्था के पांचवे से 8वें सप्ताह के बीच बच्चे की एपिडर्मिस उभरने लगती है। इसमें दो परते होती हैं। एक होती है बेसल सेल्स और दूसरी होती है पैरीडर्म। लगभग 9 या 10 सप्ताह की गर्भवती महिला में एक इंटरमीडिएट लेयर बनना शुरू हो जाती है। यह बेसल और पैरीडर्म परत के बीच में होती है, जहां पर बच्चे के रोम छिद्र का विकास होता है। आने वाले सप्ताह में बच्चे की स्किन का बनना जारी रहता है और 4 महीने के अंदर बच्चे की त्वचा की सभी परते बन जाती हैं। गर्भावस्था के अंतिम सप्ताह में शिशु की ट्रांसपेरेंट स्किन दिखने लगती है क्योंकि उसके शरीर में फैट यानी की वसा की मात्रा बहुत कम होती है। 32 सप्ताह में बच्चे की पारदर्शिता त्वचा बदलने लगती है।
19वें सप्ताह तक बच्चे की त्वचा वर्निक्स केसोसा (vernix caseosa) से ढकी रहती है। वर्निक्स केसोसा सफेद परत की तरह, तेल की तरह त्वचा कोशिकाओं और वसा के सिकरीशन से बना होता है।एमनियोटिक द्रव से स्किन से बचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अगर ये न हो, तो बच्चे की स्किन जन्म के समय सिकुड़ सी जाएगा, जैसा कि अक्सर लंबे समय तक पानी में रहने के कारण होता है।
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