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आपकी श्रोणि एक कमरपेटी यानि करधनी जैसी होती है, जो कि आपके गर्भाशय, मूत्राशय और आंत के कुछ हिस्से को घेरे हुए होती है। जब इस क्षेत्र में दर्द होता है, तो इसे श्रोणि करधनी दर्द (पेल्विक गर्डल पेन) कहा जाता है। जिन क्षेत्रों में दर्द हो सकता है, उनमें शामिल हैं:
पीछे की तरफ आपकी रीढ़ की हड्डी को श्रोणि से जोड़ने वाले जोड़ों में दर्द हो सकता है। रीढ़ की हड्डी के तले में कूल्हे की हड्डियों के बीच तिकोनी हड्डी त्रिकास्थि (सैक्रम) होती है। इसके दोनों तरफ त्रिकश्रोणीय (सैक्रोइलिएक) जोड़ होते हैं।
आगे की तरफ आपकी श्रोणि के दो आधे हिस्सों को जोड़ने वाले जोड़। इसे सिम्फिसिस प्यूबिस जोड़ कहा जाता है। इस जोड़ से जुड़ी समस्या होने पर जो दर्द होता है, उसे सिम्फिसिस प्यूबिस डिसफंक्शन (एसपीडी) का नाम दिया जाता है।
पेल्विक गर्डल पेन (PGP) किस कारण से होता है?
श्रोणि करधनी दर्द इसलिए होता है क्योंकि आपका शरीर रिलैक्सिन नामक हॉर्मोन का उत्पादन करता है। रिलैक्सिन आपके अस्थिबंधों यानि कि जोड़ों को जोड़ने वाले मजबूत उत्तकों को शिथिल कर देता है। इनमें आपकी श्रोणि क्षेत्र के जोड़ भी शामिल हैं।
इसका मतलब है कि गर्भावस्था के दौरान आपकी श्रोणि फैलना शुरु हो जाती है। ऐसा होना अच्छा होता है। अधिक शिथिल अस्थिबंध होने से शिशु को जन्म के समय श्रोणि से बाहर निकलने में मदद मिलती है।
बहरहाल, यह जरुरी नहीं है कि शिथिल अस्थिबंधों की वजह से आपको श्रोणि करधनी दर्द हो। आपकी नसें और मांसपेशियां, जोड़ों के अधिक लचीलेपन के अनुरुप खुद को ढाल लेती हैं, जिससे गर्भ में शिशु के बढ़ने पर आपकी मुद्रा में आने वाले बदलावों का सामना शरीर कर लेता है।
इसलिए हालांकि, यह दर्द काफी आम है, मगर यह सामान्य नहीं है। यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आपको चुपचाप सहना चाहिए।
सामान्यत:, जब आप लेटती हैं, खड़ी होती हैं या चलती हैं, तो आपका श्रोणि क्षेत्र अचल या स्थिर अवस्था में होता है।
यदि आपको पेल्विक पेन है, तो हो सकता है आपके जोड़ अस्थिर तरीके से हिल-डुल रहे हों। हो सकता है एक श्रोणि जोड़ उचित ढंग से काम न कर रहा हो और दूसरे जोड़ों को इसकी वजह से दर्द हो रहा हो। या फिर आपकी मांसपेशियां इतने अच्छे ढंग से काम नहीं कर रहीं कि वे श्रोणि को आधार प्रदान कर सकें।
आपको श्रोणि करधनी दर्द होने की संभावना निम्न स्थितियों में ज्यादा हो सकती है:
आपको अक्सर पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द होता है
आपके श्रोणि क्षेत्र में पहले कभी चोट लगी है
आपकी पिछली गर्भावस्था में आपको पेल्विक गर्डल पेन रहा था
आपकी नौकरी में शारीरिक मेहनत वाला काम रहता है।
भारी सामान उठाना, मुड़ना (ट्विस्टिंग) और झुकना आदि प्रबल गतिविधियों की वजह से भी खतरा बढ़ जाता है।
यदि आपको दर्द महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर की मदद लें। 12 गर्भवती महिलाओं में से करीब एक को गंभीर पेल्विक गर्डल पेन होता है। गंभीर पीजीपी से ग्रस्त 20 महिलाओं में से करीब एक को बहुत ज्यादा दर्द और अक्षमता हो सकती है।
श्रोणि करधनी दर्द का मुझपर और गर्भस्थ शिशु पर क्या असर होगा?
पीजीपी से आपके शिशु को कोई नुकसान नहीं होता, मगर इसकी वजह से आपको बहुत ज्यादा दर्द हो सकता है। आपके लिए चलना-फिरना भी मुश्किल हो सकता है।
दर्द की तीक्ष्णता और दर्द का स्थान हर महिला में अलग-अलग हो सकता है। संभव है कि दर्द एक ही तरफ हो या फिर यह दोनों तरफ भी हो सकता है। दर्द एक सामान्य पीड़ा की तरह हो सकता है या फिर यह आपके नितंबों या नीचे आपकी टांगों के पीछे या साइड में भी पहुंच सकता है।
कई महिलाएं श्रोणि करधनी दर्द को साइटिका समझ लेती हैं, क्योंकि इसमें भी नितंबों से होते हुए टांग के पीछे की तरफ तीक्ष्ण दर्द होता है।
आपको निम्न जगहों पर दर्द महसूस हो सकता है:
पीठ के निचले हिस्से में
श्रोणि में आगे की तरफ (सिम्फिसिस प्यूबिस जोड़ में)
श्रोणि में पीछे की तरफ (सैक्रोइलिएक जोड़ों में)
पेट और जांघ के बीच के भाग (ऊसन्धि, ग्रॉइन) में
जांघों के आगे और पीछे की तरफ
टांगों के निचले हिस्से में पीछे की तरफ दर्द
कूल्हों के चारों तरफ
श्रोणि क्षेत्र में और योनि के मुख और गुदा (पेरिनियम क्षेत्र) के आसपास
हो सकता है हिलने-डुलने पर आपको श्रोणि क्षेत्र से कोई आवाज या अनुभूति सी से महसूस हो।
पेल्विक गर्डल पेन पहली तिमाही में भी शुरु हो सकता है, मगर गर्भावस्था के बाद के चरण में यह अधिक आम है।
यदि यह दर्द गर्भावस्था के अंतिम दिनों में ही दर्द महसूस हो, तो इसका कारण शिशु के सिर का नीचे की तरफ आना या नीचे आपके श्रोणि क्षेत्र में आ जाना हो सकता है। आपको डिलीवरी के बाद भी पहली बार श्रोणि क्षेत्र में दर्द महसूस हो सकता है।
आपकी जीवनशैली को देखते हए श्रोणि करधनी दर्द के लक्षण असहजता से अत्याधिक दर्द और तकलीफदेह हो सकते हैं। रोजमर्रा के काम जैसे कि कपड़े पहनना, चलना, सीढ़ियां चढ़ना और बिस्तर में करवट लेना भी मुश्किल हो सकता है।
आपको प्रेम संबंध बनाने में भी दर्द हो सकता है, हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप कौन सी अवस्था में संभोग करते हैं।
यदि आपका पहले से एक छोटा बच्चा है, तो उसे गोद में उठाने और गोद में लेकर रखने से भी पीजीपी ज्यादा बढ़ सकता है।
कुछ महिलाओं को रात के समय दर्द ज्यादा महसूस होता है, खासकर यदि दिनभर वे काफी सक्रिय रही हों तो।
पेल्विक गर्डल पेन का पता कैसे चलता है?
अगर आपको दर्द की शिकायत हो, तो डॉक्टर आपके श्रोणि क्षेत्र की जांच करेंगी। वे आपसे पूछेंगी कि आपको दर्द कब और कहां होता है।
ऐसी गतिविधियों को याद रखने का प्रयास करें जिनसे दर्द शुरु होता है, ताकि आप डॉक्टर को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे सकें।
कई बार पीजीपी को सियाटिका समझ लिया जाता है। अगर आप भी इसे लेकर शंका में हों, तो फिजियोथेरेपिस्ट को दिखाकर इसकी पुष्टि कर सकती हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित कर लें कि आपके फिजियोथैरेपिस्ट को गर्भवती महिलाओं के उपचार का अनुभव हो।
श्रोणि करधनी दर्द का उपचार कैसे होता है?
अपनी डॉक्टर की सलाह का पालन करना, कुछ व्यायाम करना और अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करना श्रोणि करधनी दर्द के उपचार के मुख्य तरीके हैं:
डॉक्टर आपको फिजियोथेरेपिस्ट को दिखाने की सलाह देंगी। फिजियोथेरेपिस्ट आपको बताएंगी कि चलने या खड़े होने जैसी गतिविधियों के दौरान पीठ और श्रोणि क्षेत्र में दर्द होने से कैसे बचाव किया जाए।
फिजियोथेरेपिस्ट आपको श्रोणि क्षेत्र के आधार के लिए पट्टी (पेल्विक सपोर्ट बेल्ट) दे सकती है। बेल्ट से आपको दर्द से राहत मिल सकती है, विशेषकर जब आप सक्रिय व क्रियाशील हों।
व्यायाम, खासकर कि पेट, पेल्विक गर्डल, कूल्हे और श्रोणि क्षेत्र की मांसपेशियों के व्यायाम, ताकि आपके श्रोणि क्षेत्र और पीठ की स्थिरता में सुधार हो।
पानी में जिम जैसी एक्सरसाइज करने से भी दर्द से कुछ राहत मिल सकती है। मगर, यहां भी यही बात लागू होती है कि आपको विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए आयोजित कक्षाओं में ही शामिल होना चाहिए। हालांकि, हो सकता है ऐसी कक्षाएं आपके क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध न हों।
फिजियोथेरेपिस्ट आपके कूल्हे, पीठ या श्रोणि क्षेत्र को हल्के हाथों से दबा सकते हैं ताकि सख्त जगहों पर थोड़ी शिथिलता आए।
एक्यूपंक्चर से भी दर्द कम करने में मदद मिल सकती है और यह गर्भावस्था में सुरक्षित भी है। मगर आप ऐसे पेशेवर का चयन करें जिसे गर्भवती महिलाओं के उपचार का प्रशिक्षण और अनुभव हो।
टेन्स मशीन का इस्तेमाल भी सुरक्षित है और इससे भी मदद मिल सकती है। हालांकि, बहुत सी जगहों पर यह आसानी से उपलब्ध नहीं है। आप अपनी डॉक्टर से इस बारे में पूछें, शायद आप इसे ऑनलाइन खरीद पाएं।
अगर इन सब उपायों के बाद भी दर्द जारी रहे, तो आपकी डॉक्टर नियमित दर्द निवारक दवा पैरासिटामोल के सेवन की सलाह दे सकती हैं।
ध्यान रखें कि पीठ के निचले हिस्से में दर्द जैसी स्थितियों के लिए पैरासिटामोल अपने आप में प्रभावी दर्दनिवारक है, इस बारे में अधिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। अपनी डॉक्टर से पूछें कि कितनी पैरासिटामोल लेनी सही रहेगी और कितने समय तक। डॉक्टर आपको दर्दनिवारक दवाओं के मिश्रण या फिर कभी-कभार ज्यादा प्रबल दवाएं दे सकती हैं।
बिना डॉक्टरी पर्ची के मिलने वाली दवाएं या हर्बल उपचार डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। इनमें कुछ ऐसी सामग्रियां हो सकती हैं, जो गर्भस्थ शिशु के लिए सुरक्षित न हों।
जब आपको पेल्विक गर्डल पेन हो तो अपना ध्यान रखना बहुत जरुरी है। यदि आपको दर्द से राहत पाने के लिए दवाएं लेनी पड़ रही हैं, तो इसके लिए खुद को कसूरवार न मानें। यदि आपको निरंतर दर्द रहे, तो हो सकता है आपको ऐसा लगने लगे कि आप अब बाहर नहीं जा सकेंगी या पहले की तरह काम नहीं कर सकेंगी।
यदि पीजीपी की वजह से आपको अकेलापन या अवसाद (डिप्रेशन) सा लगने लगे, तो अपनी डॉक्टर को बताएं। शारीरिक तौर पर आपकी मदद करने के साथ-साथ वे आपको भावनात्मक तौर पर भी सहारा देंगी।
दर्द से राहत के लिए मैं क्या कर सकती हूं?
ऐसी चीजों पर ध्यान दें जो आपके श्रोणि क्षेत्र पर दबाव डालती हों:
जितना आप कर सकती हैं उतना सक्रिय रहें, मगर खुद पर इतना ज्यादा जोर भी न डालें कि आपको दर्द होने लगे। यदि किसी काम में आपको दर्द हो, तो वह छोड़ दें। यदि दर्द को बढ़ने दिया जाए, तो फिर इसे ठी होने में ज्यादा समय लग सकता है।
डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा बताई कई पेल्विक फ्लोर और पेट की एक्सरसाइज करें।
कामकाज के लिए दूसरों की मदद लें। भारी शॉपिंग बैग या पानी की बाल्टी उठाने से दर्द बढ़ सकता है।
पहले से योजना बनाएं ताकि ऐसी गतिविधियां आप कम से कम करें, जिनसे दर्द हो सकता है। आप घर में और बाहर भी चीजों को इधर-उधर लाने ले जाने के लिए पीठ वाले बैग का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे हिलने-डुलने पर आपका शारीरिक ढांचा एक सीध में रहता है।
अपनी टांगों को उतना ही फैलाएं, जितने तक दर्द न हो। खासतौर पर कार, बिस्तर या बाथटब में बैठते व उठते समय।
यदि संभव हो तो बिस्तर में करवट लेने के लिए आप हाथा और घुटनों का सहारा लें। या फिर अपने घुटनों को एक साथ मिलाकर और नितंबों को सिकोड़कर करवट लेने का प्रयास करें।
यदि आप लेटी हुई हैं, तो करवट लें, अपने घुटनों को एक साथ लाएं, अपनी टांगों को पलंग से नीचे हवा में रखें और बैठने का प्रयास करें।
कार में बैठते और उतरते समय अपने घुटनों को मिलाकर रखें। अपने नीचे घूमने वाला कुशन या प्लास्टिक बैग रखने से आपको अपनी टांगों को एक साथ उठाने में मदद मिलेगी। गाड़ी में बैठने के बाद प्लास्टिक बैग नीचे से हटा दें, ताकि ब्रेक लगने की स्थिति में आप फिसलें नहीं।
ऐसी गतिविधियों से दूर रहें जिनसे दर्द ज्यादा बढ़े या आपका श्रोणि क्षेत्र असमान अवस्था में आए, जैसे कि पालथी मारकर बैठना या अपने थोड़े बड़े बच्चे को कूल्हे पर उठाना। ऐसे व्यायाम न करें जिनमें उकड़ूं बैठना हो या टांगे फैलाना हो, क्योंकि इनसे कूल्हे में दर्द बढ़ सकता है।
अपनी टांगे मोड़कर और घुटनों के बीच तकिया लगाकर सोने का प्रयास करें। यह अवस्था आपके गर्भस्थ शिशु के लिए भी उचित है - तीसरी तिमाही में करवट लेकर सोने से मृतशिशु के जन्म का खतरा पीठ के बल सोने की तुलना में कम हो जाता है।
नियमित विश्राम करें या आमतौर पर खड़े होकर करने वाले काम अब बैठकर करें जैसे कि कपड़े प्रेस करना या खाना बनाना। जब भी संभव हो अपने हाथों और घुटनों के बल आ जाएं, ताकि श्रोणि क्षेत्र से गर्भस्थ शिशु का वजन हट जाए।
यदि आपको एसपीडी हो, तो आप बर्थ बॉल पर हल्का सा आगे की तरफ झुककर बैठ सकती हैं, ताकि सिम्फिसिस प्यूबिस जोड़ पर से दबाव कम हो सके।
कोशिश करें कि भारी सामान उठाएं या खिसकाएं नहीं। सुपरमार्केट में ट्रॉली को खींचने से अक्सर दर्द बढ़ सकता है, इसलिए हो सके तो ऑनलाइन खरीदारी करें, सामान की होम डिलीवरी करवाएं या किसी ओर से शॉपिंग के लिए कहें।
बेहतर है कि आप बार-बार सीढ़ियां चढें व उतरे नहीं। जब आपको सीढ़ियां चढ़नी पड़ें तो एक बार में एक ही कदम बढ़ाएं। जिस टांग में दर्द कम हो, उसे आगे बढ़ाएं और फिर दूसरी टांग को उसके पास लाएं। हर सीढ़ी ऐसे ही चढ़ें।
एक टांग पर खड़ी न हों। अपने कपड़े धीरे-धीरे और सावधानी से पहनें। अंडरवियर, सलवार, चूड़ीदार या पेंट को बैठकर पहनें।
प्रसव के लिए बर्थ पूल का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि पानी की वजह से आपके जोड़ों पर भार नहीं रहता और आप आसानी से हिल-डुल सकती हैं। हालांकि, यह विकल्प चुनिंदा अस्पतालों और मेटरनिटी सेंटर पर ही उपलब्ध है।
अगर आप नौकरीपेशा महिला हैं, तो आप नियोक्ता से अपने काम या काम के घंटों में बदलाव के बारे में बात कर सकती हैं।
दोस्त और परिवारजन आपको दर्द से राहत के लिए विशेष मालिश करवाने की सलाह भी दे सकते हैं। बहरहाल, किसी भी तरह की मालिश करवाने से पहले अपनी डॉक्टर से अवश्य बात करें।
हो सकता है कुछ मसाज थेरेपिस्ट या स्थानीय मालिशवालियों को नाजुक स्थितियों का सामना करने का ज्ञान व कौशल न हो। अगर मालिश सही तकनीक से न की जाए, तो इससे फायदे की बजाय नुकसान हो सकता है।
क्या पीजीपी से प्रसव पर असर पड़ता है?
सही सलाह मिलने पर यह दुर्लभ ही है कि पीजीपी से प्रसव के दौरान कोई समस्या होगी। अगर, संभव हो तो पीठ के बल लेटकर शिशु को जन्म देने से बचें। बिस्तर पर सीधे बैठना या घुटनों के बल बैठने वाली अवस्थाओं में श्रोणि क्षेत्र के जोड़ों का बचाव होता है और वे सामान्यत अधिक आरामदेह रहते हैं। आपकी डिलीवरी को आसान और कम पीड़ादायी बनाने के लिए डॉक्टर आपको प्रसव की मुद्राओं के बारे में बताएंगी।
अगर, लक्षणों की वजह से आपके लिए अपनी टांगों को फैलाना मुश्किल हो रहा हो, और आपको उपकरणों की सहायता से डिलीवरी की जरुरत हो, तो आप डॉक्टर से ऐसे प्रसव के लिए बेहतर मुद्रा के बारे में बात कर सकती हैं। अगर आपकी बहुत सी मुद्राएं आजमाने के बाद भी दर्द हो, तो आपकी डॉक्टर प्रसव को आसान बनाने के लिए आपको एपिड्यूरल लेने की सलाह दे सकती हैं।
अगर, आपको बहुत ज्यादा दर्द हो और आप बिल्कुल भी हिल-डुल न पा रही हों, तो आपको सीजेरियन ऑपरेशन करवाने के लिए कहा जा सकता है। वैसे यह सबसे अंतिम विकल्प होगा, क्योंकि सीजेरियन ऑपरेशन करवाने से पीजीपी में कोई मदद नहीं मिलेगी। इसकी वजह से शायद शिशु के जन्म के बाद पीजीपी से उबरने में आपको ज्यादा समय लग सकता है।
श्रोणि करधनी दर्द कितनी जल्दी ठीक हो जाएगा?
पीजीपी आमतौर पर शिशु के जन्म के कुछ हफ्तों या महीनों बाद ठीक हो जाता है। 10 में से करीब एक महिला में यह दर्द ज्यादा समय तक रहता है। अगर आपको प्रेग्नेंसी के दौरान श्रोणि करधनी दर्द अत्याधिक था, तो इसके बने रहने की संभावना ज्यादा होती है।
हालांकि, आपको ऐसा दर्द शायद ही रहेगा, जो बना रहे। आपको माहवारी के तुरंत पहले हल्का दर्द हो सकता है। इस समय निकलने वाले हॉर्मोन का गर्भावस्था के हॉर्मोनों जैसा समान असर हो सकता है।
अगर आपका दर्द बना रहता है, तो आप गर्भावस्था के दौरान फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा बताए गए व्यायामों को करके इससे उबरने में खुद की मदद कर सकती हैं। पिलाटीज या योग भी श्रोणि दर्द को दूर करने के लिए मजबूती प्रदान करते हैं।
आप भी एक गर्भावस्था से दूसरी गर्भावस्था के बीच थोड़ा अंतर रखने के बारे में विचार कर सकती हैं। अतिरिक्त वजन घटाना, फिट होना और दोबारा गर्भवती होने से पहले बच्चे का चलना शुरु करने तक का इंतजार करना बेहतर रहता है। इससे अगली बार पेल्विक गर्डल पेन के लक्षण कम होने में मदद मिल सकती है।
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