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गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कुछ खास पोषक तत्वों की ज्यादा जरूरत होती है। इसलिए, इन जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ती के लिए महिलाओं को कुछ चुनिंदा खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती हैं। इन्हीं जरूरी पोषक तत्वों में कैल्शियम का नाम भी शामिल है। आखिर गर्भावस्था में कैल्शियम क्यों जरूरी है? इसकी कमी से गर्भवती महिलाओं पर क्या असर पड़ता है? कैल्शियम की पूर्ति के लिए क्या किया जा सकता है? गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम का जिक्र आते ही जहन में ऐसे सवालों का आना लाजमी है। यही उत्सुकता गर्भावस्था में कैल्शियम की महत्ता के प्रति आपको जागरूक कराएगी और इस विषय को गहराई से समझने में आपकी मदद करेगा मॉमजंक्शन का यह लेख।
आइए, सबसे पहले लेख में गर्भावस्था में कैल्शियम के महत्व के विषय में जान लेते हैं।
गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम क्यों महत्वपूर्ण है?
गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। कारण यह है कि गर्भावस्था में भ्रूण को प्रतिदिन मां से 50 से 330 मिलीग्राम कैल्शियम मिलता है, जो भ्रूण की हड्डियों के विकास के लिए जरूरी है (1)। वहीं, गर्भावस्था के अंतिम पड़ाव में भ्रूण को कैल्शियम की अधिकतम मात्रा (30 ग्राम तक) की जरूरत होती हैं। इसलिए, अगर गर्भवती महिला कैल्शियम की मात्रा नहीं ले रही है, तो ऐसे में भ्रूण कैल्शियम की जरूरत को मां के स्केलेटन (हड्डियों और दांतों) से लेने लगता है। इस कारण भ्रूण के विकास में बाधा तो आती ही है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जिनके बारे में हम लेख में आगे विस्तार से बताएंगे (2)।
गर्भावस्था में कैल्शियम का महत्व समझने के बाद अब हम कैल्शियम की आवश्यक मात्रा के बारे में बात करेंगे।
प्रेगनेंसी के दौरान आपको कितना कैल्शियम चाहिए?
अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, अमेरिका में 19 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान करीब 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्रतिदिन लेने की स लाह दी जाती है, ताकि भ्रूण के विकास के लिए जरूरी कैल्शियम की खपत को पूरा किया जा सके। इस हिसाब से माना जा सकता है कि औसत मात्रा के रूप में गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती हैं, लेकिन हर शहर के पर्यावरण और व्यक्ति विशेष की शारीरिक स्थिति के हिसाब से इस मात्र में थोड़ा बहुत परिवर्तन संभव है। इसलिए, अगर आप कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट का सहारा लेना चाह रही हैं, तो एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें (1)।
लेख के अगले भाग में हम जानेंगे कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं कब कैल्शियम की गोलियां ले सकती हैं।
गर्भावस्था में कैल्शियम की गोली कब लें? |
गर्भावस्था के दूसरे और तीसरे चरण में कैल्शियम की अधिक आवश्यकता होती है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं कैल्शियम की पूर्ति के लिए कैल्शियम की गोली का उपयोग कर सकती हैं, लेकिन इसके उपयोग से पहले एक बार अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। दरअसल, गर्भावस्था में कैल्शियम की पूर्ती के लिए गोली लेनी चाहिए या नहीं इस बारे में डॉक्टर आपकी शारीरिक स्थिति को देखकर ही सलाह देते हैं। सामान्य रूप से कैल्शियम की गोली लेने की सलाह तभी दी जाती है, जब लिए जाने वाले आहार से कैल्शियम की आवश्यक मात्रा न मिल पा रही हो (1) (3)।
कैल्शियम की गोली लिए जाने का सही समय जानने के बाद अब हम आपको बताएंगे कि गर्भावस्था में किस समय तक कैल्शियम का सेवन किया जा सकता है।
गर्भावस्था में कब तक कैल्शियम लेना चाहिए?
जैसा कि लेख में ऊपर बताया गया हैं कि गर्भावस्था के अंतिम समय यानी 37वें से 42वें हफ्ते के बीच भ्रूण को पूर्ण विकसित के लिए सबसे अधिक कैल्शियम (30 ग्राम तक) की आवश्यकता होती हैं (2)। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि गर्भवती महिलाएं बच्चे के जन्म तक कैल्शियम की गोलियां ले सकती हैं। साथ ही इस बारे में एक बार अपने डॉक्टर से भी परामर्श जरूर करें, ताकि वह आपकी सेहत और स्वास्थ्य को देखकर कैल्शियम की ली जाने वाली आवश्यक मात्रा से संबंधित उचित सलाह दे सकें।
लेख के अगले भाग में हम गर्भावस्था में कैल्शियम की कमी से नजर आने वाले लक्षणों के संबंध में बात करेंगे।
प्रेगनेंसी में कैल्शियम की कमी के लक्षण |
कैल्शियम की कमी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि महिला में कैल्शियम की मात्रा कितनी कम है। सामान्य कमी में इसके कोई भी लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन अधिक मात्रा में कम होने पर निम्न असामान्यताएं देखने को मिल सकती हैं (4)। इस अवस्था को हाइपोकैल्सीमिया कहा जाता है।
स्वभाव का अधिक चिड़चिड़ा होना।
हाथ और पैरों की उंगलियों में दर्द व ऐंठन का महसूस होना।
मांसपेशियों में दर्द बने रहना।
सांस लेने में तकलीफ होना।
ब्लड प्रेशर कम होने के कारण हृदय की धड़कन का तेज होना।
पेट में दर्द और गैस की समस्या का होना।
कुछ गंभीर स्थितियों में सिरदर्द और उल्टी-मतली जैसी समस्याओं के साथ धुंधला दिखाई देना।
त्वचा पर सूजन, रूखापन और खुजली की समस्या का होना।
लेख के अगले भाग में हम गर्भावस्था में कैल्शियम के स्वास्थ्य लाभों के बारे में बात करेंगे।
गर्भवती महिलाओं के लिए कैल्शियम के स्वास्थ्य लाभ | Pregnancy Me Calcium Ke Fayde
गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम के स्वास्थ्य लाभों को निम्न बिन्दुओं के माध्यम से समझा जा सकता है, जो इस प्रकार है (5)
प्री-एक्लेम्पसिया : गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम की आवश्यक मात्रा की पूर्ति प्री-एक्लेमप्सिया (हाई ब्लडप्रेशर की गंभीर स्थिती) के जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकती है।
प्रीटर्म बर्थ : कैल्शियम की कमी से समय पूर्व प्रसव का जोखिम बढ़ जाता है। वहीं, कैल्शियम की आवश्यक मात्रा की पूर्ति इस खतरे को कम कर सामान्य प्रसव में मददगार साबित हो सकती है।
जन्म के समय बच्चे का वजन : जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना कैल्शियम की कमी का एक दुष्परिणाम हो सकता है। ऐसे में कैल्शियम के उचित मात्रा गर्भवती महिलाओं को होने वाले इस जोखिम से दूर रखने में मदद कर सकती है।
गर्भावस्था के दौरान हड्डियों का कमजोर होना : जैसा कि हम लेख में ऊपर बता चुके हैं कि अगर मां द्वारा लिए जाने वाले आहार से भ्रूण को आवश्यक कैल्शियम नहीं मिलता है, तो इस स्थिती में वह जरूरी कैल्शियम की पूर्ति मां की हड्डियों और दांतों से करने लगता है। इस कारण गर्भवती महिला की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उसे हड्डियों से संबंधित समस्याओं (ऑस्टियोपोरोसिस) का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कैल्शियम की आवश्यक मात्रा की पूर्ति गर्भवती को इस जोखिम से दूर रखने में मदद कर सकती है।
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