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Pregnancy symptoms week 1: जानिए, क्या हैं गर्भावस्था में पहले हफ्ते के लक्षण
1 week Pregnant symptoms में कई बार गर्भवती महिलाओं को जानकारी ही नहीं हो पाती। लेकिन यह जरूरी है कि उन लक्षणों को जाना जाए और उसी के मुताबिक, खान-पान(Diet in pregnancy) किया जाए। इन लक्षणों को नजरंदाज करने पर कई बार गंभीर परिणामों का भी सामना करना पड़ता है।
pregnancy symtpoms
Pregnancy symptoms week 1: कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के पहले सप्ताह में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं बल्कि कुछ महिलाओं में थकान, ब्रेस्ट को छूने पर दर्द होना और हल्की ऐंठन महसूस होती है।
प्रेग्नेंसी का एहसास हर महिला के लिए सबसे अहम पल माना जाता है। इसकी जांच के लिए बाजार में कई सारी दवाइयों के साथ ही उपकरण भी मौजूद हैं। हालांकि, ये तमाम चीजें गर्भ धारण करने के अगले महीने से ही काम करती हैं।
मतलब यह कि शुरुआती चरण में आपको गर्भावस्था में होने की जानकारी ही नहीं होती, जिसकी वजह से आप न तो यह जानते हैं कि क्या खाना है, क्या ऐहतियात बरतने हैं आदि।
गर्भवती महिला को प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षण पहचानने बेहद जरूरी हैं, जिसके लिए आपको अपने शरीर में होने वाले हर बदलाव को महसूस करना होगा। आइए जानते हैं, पहले हफ्ते में प्रेग्नेंसी के लक्षणों के बारे में। बता दें कि माहवारी बंद होने को गर्भावस्था का लक्षण माना जाता है।
प्रेग्नेंसी के चलते हार्मोनल चेंज की वजह से पाचन प्रक्रिया भी प्रभावित होती है, जिसकी वजह से कॉन्स्टिपेशन (कब्ज) की समस्या होने लगती है।
Pregnancy: डिलीवरी के कितने दिनों बाद दोबारा शुरू होते हैं Periods?
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बच्चे के जन्म के बाद दोबारा पीरियड्स शुरू होना इस बात पर निर्भर करता है कि महिला अपने बच्चे को कितना ब्रेस्टफीडिंग कराती है। दरअसल, प्रोलैक्टिन हार्मोन स्तनपान कराने वाली महिला के स्तन में दूध उत्पन्न करने का काम करता है और ओव्यूलेशन को रोक देता है जिससे पीरियड्स में देरी होती है। जो महिलाएं बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं उन्हें डिलीवरी के 1 से 6 महीने के बीच पीरियडस् शुरू हो सकता है जबकि जो महिलाएं बच्चे को स्तनपान नहीं कराती हैं उन्हें जल्दी ही पीरियड शुरू हो सकता है।
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बच्चे के जन्म के बाद दोबारा पीरियड शुरू होने पर इसमें कुछ बदलाव हो सकता है या यह पहले की तरह ही हो सकता है। कई महिलाओं को पहले से अधिक या कम ब्लीडिंग हो सकती है और पीरियड्स के दिन भी ज्यादा या कम हो सकते हैं। चूंकि डिलीवरी के बाद गर्भाशय बड़ा हो जाता है इसलिए पीरियड्स में कई तरह के परिवर्तन नजर आते हैं। समय के साथ गर्भाशय सिकुड़ कर छोटा हो जाता है। इसके साथ ही बच्चे के जन्म के बाद महिला के शरीर में भी कई तरह के बदलाव होते हैं जिसका असर पीरियड्स पर पड़ सकता है।
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डिलीवरी के बाद दोबारा पीरियड्स शुरू होने पर ब्लीडिंग, शरीर में ऐंठन और पेट दर्द हो सकता है। यदि आपको हर घंटे पैड या टैम्पोन बदलने की जरूरत पड़ती है तो तत्काल डॉक्टर के पास जाएं। इसके अलावा अगर बच्चे के जन्म के बाद पीरियड्स दोबारा शुरू होने के बाद अगले महीने रुक जाए या पीरियड्स के दौरान स्पॉटिंग हो तो यह किसी बीमारी का लक्षण हो सकता है इसलिए डॉक्टर के पास जाकर परामर्श लें।
इस प्रकार डिलीवरी के बाद दोबारा पीरियड्स शुरू होना पूरी तरह महिला की सेहत और स्तनपान की स्थिति पर निर्भर होता है। हालांकि सामान्यतः छह महीने के अंदर पीरियड्स शुरू हो जाता है।
प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण
गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों में जी मिचलाना और उल्टी होना, कई बार पेशाब जाना आदि शामिल हैं। इसके इतर गर्भधारण करने पर महिला को थकान की शिकायत होती है। इसके साथ ही कुछ महिलाओं में सिर दर्द के साथ ही शुरुआत में पैरों में सूजन भी नजर आती है।
ब्लीडिंग
इंप्लांटेशन ब्लीडिंग प्रेगनेंसी के शुरुआती संकेत में से एक है। ये मासिक धर्म की तरह नहीं होता है। इसमें हल्की ब्लीडिंग होती है जिसमें खून का एक धब्बा या गुलाबी स्राव होता है। कुछ घंटों या कुछ दिनों तक स्पॉटिंग हो सकती है।
ऐंठन
महिलाओं को हल्की ऐंठन भी महसूस हो सकती है। भ्रूण के गर्भाशय की दीवार से जुड़ने पर ऐंठन होती है। महिलाओं को पेट, पेल्विस या कमर के निचले हिस्से में ऐंठन महसूस हो सकती है। इसमें खिंचाव, गुदगुदी या खुजली जैसा लग सकता है। कुछ महिलाओं को हल्की ऐंठन होती है तो कुछ को कभी कभी असहज महसूस होता है।
Pregnancy: डिलीवरी के कितने दिनों बाद दोबारा शुरू होते हैं Periods?
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बच्चे के जन्म के बाद दोबारा पीरियड्स शुरू होना इस बात पर निर्भर करता है कि महिला अपने बच्चे को कितना ब्रेस्टफीडिंग कराती है। दरअसल, प्रोलैक्टिन हार्मोन स्तनपान कराने वाली महिला के स्तन में दूध उत्पन्न करने का काम करता है और ओव्यूलेशन को रोक देता है जिससे पीरियड्स में देरी होती है। जो महिलाएं बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं उन्हें डिलीवरी के 1 से 6 महीने के बीच पीरियडस् शुरू हो सकता है जबकि जो महिलाएं बच्चे को स्तनपान नहीं कराती हैं उन्हें जल्दी ही पीरियड शुरू हो सकता है।
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बच्चे के जन्म के बाद दोबारा पीरियड शुरू होने पर इसमें कुछ बदलाव हो सकता है या यह पहले की तरह ही हो सकता है। कई महिलाओं को पहले से अधिक या कम ब्लीडिंग हो सकती है और पीरियड्स के दिन भी ज्यादा या कम हो सकते हैं। चूंकि डिलीवरी के बाद गर्भाशय बड़ा हो जाता है इसलिए पीरियड्स में कई तरह के परिवर्तन नजर आते हैं। समय के साथ गर्भाशय सिकुड़ कर छोटा हो जाता है। इसके साथ ही बच्चे के जन्म के बाद महिला के शरीर में भी कई तरह के बदलाव होते हैं जिसका असर पीरियड्स पर पड़ सकता है।
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डिलीवरी के बाद दोबारा पीरियड्स शुरू होने पर ब्लीडिंग, शरीर में ऐंठन और पेट दर्द हो सकता है। यदि आपको हर घंटे पैड या टैम्पोन बदलने की जरूरत पड़ती है तो तत्काल डॉक्टर के पास जाएं। इसके अलावा अगर बच्चे के जन्म के बाद पीरियड्स दोबारा शुरू होने के बाद अगले महीने रुक जाए या पीरियड्स के दौरान स्पॉटिंग हो तो यह किसी बीमारी का लक्षण हो सकता है इसलिए डॉक्टर के पास जाकर परामर्श लें।
इस प्रकार डिलीवरी के बाद दोबारा पीरियड्स शुरू होना पूरी तरह महिला की सेहत और स्तनपान की स्थिति पर निर्भर होता है। हालांकि सामान्यतः छह महीने के अंदर पीरियड्स शुरू हो जाता है।
कमर दर्द और ब्लोटिंग
यूट्राइन लाइनिंग रिलीज होने पर गर्भाशय में खिंचाव आता है जिसकी वजह से कमर और पेट में दर्द होने लगता है। हार्मोंस में उतार चढाव के कारण पेट फूलने की शिकायत भी हो सकती है। इसके लिए इस सप्ताह में आपको पीरियड की तरह ही मूड स्विंग्स भी परेशान कर सकते हैं।
सिरदर्द
कई महिलाओं को मेंस्ट्रुअल माइग्रेन होता है जिसका संबंध हार्मोंन से होता है। गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण मासिक धर्म आने जैसे ही होते हैं इसलिए पहले सप्ताह में कई महिलाओं को यह पता ही नहीं चल पाता है कि वो प्रेगनेंट हैं।
प्रेग्नेंसी के वक्त गर्भवती महिला के मुंह का स्वाद कड़वा हो जाता है। ऐसे में उसे भोजन के बजाए सिर्फ खट्टी चीजों का ही स्वाद सही लगता है।
Pregnancy: डिलीवरी के कितने दिनों बाद दोबारा शुरू होते हैं Periods?
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बच्चे के जन्म के बाद दोबारा पीरियड्स शुरू होना इस बात पर निर्भर करता है कि महिला अपने बच्चे को कितना ब्रेस्टफीडिंग कराती है। दरअसल, प्रोलैक्टिन हार्मोन स्तनपान कराने वाली महिला के स्तन में दूध उत्पन्न करने का काम करता है और ओव्यूलेशन को रोक देता है जिससे पीरियड्स में देरी होती है। जो महिलाएं बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं उन्हें डिलीवरी के 1 से 6 महीने के बीच पीरियडस् शुरू हो सकता है जबकि जो महिलाएं बच्चे को स्तनपान नहीं कराती हैं उन्हें जल्दी ही पीरियड शुरू हो सकता है।
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बच्चे के जन्म के बाद दोबारा पीरियड शुरू होने पर इसमें कुछ बदलाव हो सकता है या यह पहले की तरह ही हो सकता है। कई महिलाओं को पहले से अधिक या कम ब्लीडिंग हो सकती है और पीरियड्स के दिन भी ज्यादा या कम हो सकते हैं। चूंकि डिलीवरी के बाद गर्भाशय बड़ा हो जाता है इसलिए पीरियड्स में कई तरह के परिवर्तन नजर आते हैं। समय के साथ गर्भाशय सिकुड़ कर छोटा हो जाता है। इसके साथ ही बच्चे के जन्म के बाद महिला के शरीर में भी कई तरह के बदलाव होते हैं जिसका असर पीरियड्स पर पड़ सकता है।
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डिलीवरी के बाद दोबारा पीरियड्स शुरू होने पर ब्लीडिंग, शरीर में ऐंठन और पेट दर्द हो सकता है। यदि आपको हर घंटे पैड या टैम्पोन बदलने की जरूरत पड़ती है तो तत्काल डॉक्टर के पास जाएं। इसके अलावा अगर बच्चे के जन्म के बाद पीरियड्स दोबारा शुरू होने के बाद अगले महीने रुक जाए या पीरियड्स के दौरान स्पॉटिंग हो तो यह किसी बीमारी का लक्षण हो सकता है इसलिए डॉक्टर के पास जाकर परामर्श लें।
इस प्रकार डिलीवरी के बाद दोबारा पीरियड्स शुरू होना पूरी तरह महिला की सेहत और स्तनपान की स्थिति पर निर्भर होता है। हालांकि सामान्यतः छह महीने के अंदर पीरियड्स शुरू हो जाता है।
शरीर में बदलाव: गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में प्रेग्नेंट महिला को ब्रेस्ट में अचानक से भारीपन महसूस होता है। चेहरे पर अचानक से झाइयां नजर आने लगती हैं। यह बदलाव गर्भावस्था के शुरुआती छह महीनों या अंतिम छह महीनों में नजर आते हैं।
बच्चे का विकास: प्रेग्नेंसी के पहले हफ्ते में निषेचित अंडे में विभाजन हेाता। कोशिकाओं के इस गोले को विज्ञान की भाषा में ब्लास्टोसाइट कहते हैं।
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट: पहले शुरुआती हफ्तों में बच्चे की कोई भी अल्ट्रासाउंड इमेज नहीं आती।
डायट: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और दालों को अपनी डायट में शामिल करें। विटमिन सी वाले फल जरूर खाएं।
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