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अक्सर गर्भ धारण करने के एक-दो महीने बाद पता चलता है कि आप गर्भवती (Pregnancy) हैं। इसका मुख्य कारण है लक्षणों (Pregnancy symptoms) का जल्द नजर ना आना। कई बार उल्टी, जी मिचलाने या फिर थकान जैसी समस्याओं को हम कॉमन समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन, कोई महिला गर्भवती (Pregnant) है या नहीं, इसका पता आप अपने पीरियड्स साइकिल या उसके समय पर ना आने से लगा सकती हैं। कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के लक्षण (Symptoms of Pregnancy) गर्भधारण करने के एक सप्ताह के अंदर नजर आने लगता है, तो कुछ में 1 से 2 महीने के बाद लक्षण नजर आते हैं। हालांकि, दो महीने से अधिक समय तक आपको ना पता चले कि आप गर्भवती हैं और आप बच्चा ना चाहती हों, तो अबॉर्शन करवाना कई बार रिस्की हो जाता है। बेहतर यही है कि प्रेग्नेंसी के पहले महीने में ही लक्षणों को पहचान लें। नीचे बताए गए लक्षणों से आप जान सकती हैं कि आप एक महीने की प्रेग्नेंट हो चुकी हैं.
प्रेग्नेंसी के पहले महीने में नजर आने वाले संकेत और लक्षण

जब एक महिला के गर्भवती होने की पहली तिमाही शुरू हो जाती है, तो शरीर में कई तरह के बदलाव नजर आते हैं। पहले महीने में नजर आने वाले लक्षण जरूरी नहीं की हर महिला में एक समान हों।
पीरियड्स का मिस होना

जब आप प्रेग्नेंट होंगी, तो सबसे पहले आपका पीरियड्स प्रभावित होता है। गर्भ धारण करने के बाद शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का निर्माण होता है, जो पीरियड्स को रोकने का काम करता है।

हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग

फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया के दौरान जब डिंब (Ovum) यूटरस के संपर्क में आता है, तो पेट के निचले भाग में दर्द, ऐंठन होता है, जिससे स्पॉटिंग होता है। प्रेग्नेंसी के प्रथम महीने में हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग नॉर्मल (First month pregnancy symptoms in hindi) है। अधिक ब्लीडिंग हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। योनि से डिस्चार्ज होना।
ब्रेस्ट में दर्द रहना

जब कोई महिला प्रेग्नेंट होती है, तो पहले महीने में स्तनों में दर्द महसूस होता है। स्तन टाइट हो जाते हैं। जब पीरियड्स होता है, तो भी ये लक्षण नजर आते हैं। कुछ महिलाओं में स्तनों की त्वचा पर अधिक नसें नजर आने लगती हैं। कुछ महीनों के बाद स्तनों के आकार में भी बदलाव नजर आने लगता है।
थकान महसूस करना

जब एक महिला गर्भवती होती है, तो उसके शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इससे शरीर थका हुआ, सुस्त, ऊर्जी की कमी महसूस होती है। चलने-फिरने में ताकत महसूस नहीं होती। ऐसा लगता है बस बिस्तर पर सोए रहें।

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