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Water Retention: शरीर में पानी के भरने से कहीं हाथ-पैरों में तो नहीं है सूजन? समाधान के लिए अपनाएं ये टिप्स
Water Retention: वाटर रिटेंशन की समस्या से कई लोग जूझ रहे हैं। खासकर बारिश और सर्दियों में लोगों के हाथ-पैरों में जबरदस्त सूजन आ जाती है और टांगों में दर्द होने लगता है। इन सिम्टम्स को नजरअंदाज करने पर समस्या गंभीर हो सकती है।
here are simple and safety tips to reduce water retention know its symptoms cause or treatment
Water Retention: शरीर में पानी के भरने से कहीं हाथ-पैरों में तो नहीं है सूजन? समाधान के लिए अपनाएं ये टिप्स
Water Retention: वाटर रिटेंशन यानी शरीर के आंतरिक भागों में पानी भर जाना। जब व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में आता है तो अक्सर उसके बाहरी हिस्सों जैसे हाथ, पैर, एड़ी और टांगों में सूजन दिखने लगती है। कभी-कभी सूजे हुए अंगों में तेज चुभन और असहनीय दर्द भी उठने लगता है। इस आर्टिकल में हम आपको वाटर रिटेंशन से संबंधित विस्तार से बता रहे हैं।
आपको बता दें कि वाटर रिटेंशन की चपेट में व्यक्ति तभी आता है तो उसका शरीर मिनरल लेवल को संतुलित नहीं कर पाता है। इससे शरीर के टिशूज में पानी भरने लगता है जिसके चलते बॉडी के बाहरी ऑर्गन्स फूलने लगते हैं। शरीर में नमक की मात्रा बढ़ने से भी ये समस्या हो सकती है।
वाटर रिटेंशन के लक्षण
हाथ- पैरों का सूज जाना
भूख न लगना
पैरों, एड़ियों और टांगों में दर्द
फूली हुई उंगलियां
उंगलियों में अंगूठी का टाइट हो जाना
अचानक वजन बढ़ना
त्वाचा पर निशान पड़ना
हाइपोथायराइड की समस्या होना
पेट में भारीपन महसूस होना
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इस सिचुएशन में संभाले अपना दिल, न करें खुद से इलाज
हार्वर्ड अफिलिएटेड बिघ्रम और हर्ट फेलियर और वुमन हॉस्पिटल के स्पेशलिस्ट डॉ एल्ड्रिन लुईस ने हार्वर्ड आर्टिकल ने कहा, 'वाटर रिटेंशन का खुद से इलाज न करें। अगर यह समस्या सीरियस कंडीशन में है तो डॉक्टर को इसका ट्रीटमेंट तय करने दें और ये सिर्फ जीवनशैली में बदलाव का मामला है।
इसमें ऐसे लोगों को बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता है जो पहले से ही दिल की बीमारी जैसे हेल्थ प्राब्लम्स से जूझ रहे हों और फिर उनके शरीर में पानी जमा हो जाए। क्योंकि ऐसे लोगों में पानी के जम जाने यानी लाइफ थ्रिएटिंग सिचुशन में पहुंच जाना है।' आसान भाषा में समझें तो यह मरीज एक खतरनाक स्थिति में पहुंच सकता है।
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डाइट में कम लें नमक की मात्रा
डाइट की गाइडलाइन के अनुसार, हर व्यक्ति को डेली 2,300 मिलीग्राम सोडियम, लगभग 1 चम्मच से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। इसलिए यदि भोजन में नमक कम है, तो खाने के दूसरे टेस्ट का आनंद लें। साथ ही भोजन करते समय नमक को पानी के साथ न घोलें।
बाहर के खाने पर लगाएं बैन
यदि आप वाटर रिटेंशन की चपेट में हैं तो बाहर से खाने का ऑर्डर देने से बचें। इस आदत में सुधार लाने से आप अपनी जीवनशैली में सुधार कर सकते हैं। बाहर के खाने में नमक की मात्रा अधिक होती है जिससे शरीर की कोशिकाओं का संतुलन बिगड़ सकता है और इससे भी पानी जमने लगता है। चीनी का खान-पान भी कम ही रखें।
खूब पिएं पानी और खाएं ये फूड आइटम्स
इस समस्या के दौरान अपको हमेशा हाइड्रेट होने की जरूरत होती है। आपको आश्चर्यचकित लग सकता है कि अधिक पानी के सेवन से शरीर के अंदर जल जमाव को रोकने में मदद मिल सकती है। पानी के अलावा डिटॉक्स करने वाले खाद्य पदार्थ जैसे अजवाइन, तरबूज और खीरा या पानी वाले सूप, दलिया आदि का सेवन भी कर सकते हैं।
बहुत देर तक एक जगह बैठना छोड़ दें
जब भी आप काफी देर तक अपने पैरों को बेड से फर्श की ओर लटकाए हुए बैठते हैं, तब भी तो ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है और एड़ियों में ब्लड जम जाता है। एक ही पोजिशन में लंबे समय तक बैठना ठीक नहीं, इसलिए हमेशा इधर-उधर घूमते रहें।
अपने पैरों को ऊपर उठाएं
अपने पैरों और टखनों से पानी के जमाव को बाहर लाने के लिए दिन में कई बार अपने पैरों को अपने दिल के स्तर से ऊपर लिटाएं। लेटे हुए पैरों को ऊपर कर उठाने से शरीर के अंगों में जमा हुआ जल हिलेगा और ब्लड सर्कुलेशन की स्पीड भी बढ़ेगी।
पीरियड में ऐंठन और सूजन
वाटर रिटेंशन के सिम्टम्स महिलाओं को यदि पीरियड के वक्त नजर आएं तो अपने आहार में कुछ बदलाव लाएं। आप विटामिन सी भरी चीजें खाएं जैसे नींबू, संतरा, गाजर। वहीं, फलों और सब्जियों में सेब, अंगूर, स्ट्रॉबैरी, हरी पत्तेदार सब्जियां, अजमोद, चुकंदर और शतावरी जैसी चीजों को डाइट में शामिल करें।
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