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पेशाब में प्रोटीन आने के कारण - Peshab Mein Protein Aane Ka Karan in Hindi
किडनी की खराबी: - सामान्यतः जब ब्लड किडनियों से होकर गुजरता है तो किडनी उन्हीं पदार्थ को ब्लड में रहने देती है जो शरीर के लिए जरूरी है और इस जरूरी पदार्थ के अलावा अन्य बेकार पदार्थ को किडनी पेशाब के रास्ते बाहर कर देती है. प्रोटीन जब हमारे शरीर में जरूरत से ज्यादा ली जाती है तो अतिरिक्त प्रोटीन हमारे शरीर में जमा नहीं रहता है बल्कि वह पेशाब के रास्ते से बाहर हो जाती है. पर यदि पेशाब में प्रोटीन की मात्रा अधिक है तो यह किडनी के खराबी के कारण भी हो सकता है. किडनी खराबी के स्थिति में किडनी का एक भाग जिसे ग्लोमेरूलाई (glomeruli) कहते हैं, काम करना बंद कर देता है. ऐसी स्थिति में किडनी के माध्यम से प्रोटीन का फिल्टर नहीं हो पाता है और इस कारण से पेशाब में प्रोटीन अधिक मात्रा में आने लगता है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति को तुरंत उचित इलाज करानी चाहिए.
पेशाब में प्रोटीन के स्तर को अस्थायी रूप से बढ़ाने वाले बीमारियाँ: - शरीर के कुछ स्थिति या कुछ बीमारी ऐसे हैं जिसमें अस्थायी रूप से पेशाब में प्रोटीन का स्तर बढ़ सकता है. पर यहाँ यह जरूरी नहीं होता है कि इस स्थिति में किडनी में खराबी हो ही. ऐसा निर्जलीकरण (शरीर में पानी कम होना), भावनात्मक तनाव, अत्यधिक ठंड, बुखार इत्यादि स्थिति में हो सकता है.
कुछ बीमारी जो पेशाब में प्रोटीन के स्तर को लगातार बढ़ाए रहते हैं: - कुछ बीमारियाँ ऐसे हैं जिसमें पेशाब में प्रोटीन का स्तर लगातार ऊँचा बना हुआ रह सकता है. अतः इस प्रकार के बीमारी में पेशाब में प्रोटीन आने की संभावना बढ़ जाती है और लगातार पेशाब में प्रोटीन का स्तर ऊँचा रहता है तो ऐसी स्थिति में किडनी खराब होने की भी संभावना रहती है. अतः इस प्रकार के बीमारी में यदि पेशाब में प्रोटीन का स्तर लगातार ऊँचा बना रहता है तो किडनी की जाँच करा लेना चाहिए. ऐसे बीमारी हैं:
अमाइलोइडोसिस (Amyloidosis) – इस बीमारी में शरीर के अंगों में असामान्य प्रोटीन का निर्माण होने लगता है. जो पेशाब के रास्ते बाहर आने लगते है.
किडनी के पुरानी बीमारी – किडनी के किसी भी तरह के बीमारी जब बहुत ज्यादा दिनों तक रह जाती है तब पेशाब में प्रोटीन की अत्यधिक मात्रा आना शुरू हो सकता है.
मधुमेह – मधुमेह यानि डाइबिटीज के बीमारी यदि काफी लंबे से रह गया हो तब भी पेशाब में प्रोटीन आना शुरू हो सकता है.
एंडोकार्डिटिस (Endocarditis) – इस बीमारी में हृदय के आंतरिक परत में संक्रमण होता है. इस बीमारी में भी पेशाब में प्रोटीन आने की संभावना रहती है. यदि लगातार प्रोटीन का स्तर ऊँचा बना रहता है तब किडनी खराब होने की संभावना रहती है.
ग्लोमेरूलोनेफाइटिस (Glomerulonephritis) – इस बीमारी में किडनी के उन कोशिकाओं में सूजन हो जाती है जो रक्त से अपशिष्ट को फिल्टर करते हैं. अतः इस बीमारी में प्रोटीन का फिल्टर नहीं हो पाता है जिस कारण से पेशाब में प्रोटीन आने लगता है.
दिल की बीमारी
हार्ट अटैक (हृदय का रुक जाना)
उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)
होजकिन रोग
पाइलोफोर्टिस
लुपुस (Lupus)
मलेरिया
मयलोमा (Myeloma)
नेफ्रोटिक सिंड्रोम – इस बीमारी में किडनी में छानने वाले छोटे रक्त वाहिकाओं का नुकसान हो जाता है. जिस कारण से प्रोटीन का फिल्टर नहीं हो पाता है और पेशाब में में प्रोटीन आने लगता है.
ओर्थोस्टैटिक प्रोटीन्यूरिया (Orthostatic Proteinuria)
प्रकगर्भाक्षेपक (Preeclampsia)
गर्भावस्था
रुमेटियड गठिया – इस बीमारी में जोड़ों में सूजन हो जाती है.
सर्कोइडोसिस – इस बीमारी में शरीर में सूजी हुयी कोशिकाओं का अत्यधिक संग्रह हो जाता है.
सिकल सेल एनीमिया
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