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मूत्र परीक्षण पट्टिका के द्वारा मूत्र में निम्नलिखित पदार्थों की उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है- प्रोटीन, ग्लूकोज, कीटोन, हीमोग्लोबिन, बिलिरुबिन (bilirubin), यूरोबिलिनोजेन (urobilinogen), एसीटोन, नाइट्राइट, तथा श्वेतकोशिका। इसके अलावा इससे मूत्र का pH एवं विशिष्ट घनत्व का भी ज्ञान हो जाता है।

पेशाब की जांच (Urinalysis) क्या है?


पेशाब की जांच एक लैब टेस्ट है। इस टेस्ट के जरिए डॉक्टर को पेशाब में दिखने वाली समस्याओं के जरिए शरीर की अन्य समस्याओं का पता लगा लेते हैं। बहुत सी बीमारियां और विकार इस बात को प्रभावित करते हैं कि शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और टॉक्सिन कैसे निकलता है। इसका मतलब यह है कि अगर फेफड़े, किडनी, यूरिनरी ट्रैक्ट, त्वचा और ब्लैडर में किसी प्रकार की समस्या है तो इसका प्रभाव आपकी पेशाब में साफ नजर आने लगता है। पेशाब की जांच ड्रग स्क्रिनिंग या प्रेग्नेंसी टेस्ट के समान नहीं है, हालांकि तीनों ही टेस्ट में पेशाब का नमूना देना होता है।


पेशाब की जांच क्यों की जाती है?

पेशाब की जांच सामान्य परीक्षण है जो कई कारणों से किया जाता है:

संपूर्ण स्वास्थ्य की जांच के लिए। पेशाब की जांच कुछ परिस्थितियों में रूटीन मेडिकल एग्जाम में शामिल होता है जैसे- प्रेग्नेंसी चेकअप, सर्जरी से पहले की तैयारी या हॉस्टिपल में एडमिट होने पर कई तरह की बीमारियों की जांच के लिए जिसमें डायबिटीज, किडनी और लिवर की बीमारियां शामिल हैं।

मेडिकल कंडिशन को डायग्नोस करने के लिए। आपका डॉक्टर पेशाब की जांच की सलाह देगा यदि आपको पेट दर्द, पीठ दर्द, बार-बार या पेशाब में दर्द होता है, पेशाब में खून आता है या पेशाब से जुड़ी दूसरी समस्याएं हैं। पेशाब की जांच के जरिए इन लक्षणों के कारणों को डायग्नोस करने में मदद मिलती है।

मेडकल कंडिशन की निगरानी के लिए। यदि आपको किडनी की बीमारी या यूरिनरी ट्रैक्ट डिसीज है, तो बीमारी की निगरानी और इलाज के लिए डॉक्टर नियमित रूप से पेशाब की जांच की सलाह देगा।

दूसरे टेस्ट जैसे प्रेग्नेंसी टेस्ट और ड्रग स्क्रिनिंग भी पेशाब के नमूने पर भरोसा किया जाता हैं, लेकिन इन परीक्षणों में उन पदार्थों को देखा जाता है जो आमतौर पर पेशाब की जांच में शामिल नहीं होते। उदाहरण के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट में ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी) नामक एक हार्मोन को मापा जाता है। ड्रग स्क्रिनिंग में टेस्ट के उद्देश्य के आधार पर विशिष्ट दवाओं या उनके मेटाबॉलिक प्रोडक्ट्स का पता लगाया जाता है।

पेशाब की जांच के दौरान क्या होता है?
आपको पेशाब का नमूना डॉक्टर के क्लिनिक, अस्पताल या लैब में देना होगा। आपको एक प्लास्टिक कंटेनर दिया जाएगा, जिसमें निजीतौर पर आपको पेशाब का नमूना देना होगा।

आपको क्लीन कैच यूरिन सैंपल के लिए बोला जा सकता है। इस तकनीक से प्राइवेट पार्ट के बैक्टीरया सैंपल में नहीं जा पाएंगे।

डॉक्टर द्वारा दी गई क्लिनिंग वाइप से प्राइवेट पार्ट के आसपास के हिस्से को साफ करें। टॉयलेट में थोड़ा सा पेशाब करें, फिर कप में सैंपल इकट्ठा करें।

कप को अंदर से न छुएं, वरना हाथ के बैक्टीरिया उसमें जा सकते हैं।

नमूना लेने के बाद कम को बंद करके हाथ धो लें। आप कप को बाथरूम से लेकर बाहर आ जाएं, या बताई गई जगह पर रख दें।

कुछ मामलों में डॉक्टर आपको मूत्रमार्ग से ब्लैडर में कैथेटर डालने के बाद पेशाब के लिए कह सकता है। इसमें थोड़ी असुविधा होती है। यदि आपको यह तरीका असहज लगता है तो डॉक्टर से दूसरे वैकल्पिक तरीके के बारे में बात करें। सैंपल देने के बाद आपका काम हो जाता है। उसके बाद सैंपल को लैब में भेजा जाता है या फिर अस्पताल में ही रहता है यदि वहां ज़रूरी उपकरण मौजूद हैं तो।

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