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पीरियड्स जितना कॉमन है व्हाइट डिस्चार्ज, प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं तो जरूर जानें इससे जुड़ी बातें
महिलाओं में वजाइनल डिस्चार्ज काफी कॉमन है, हालांकि ये हर महिला में ये अलग तरीके से दिखाई दे सकता है, जो पूरी तरह से होर्मोन पर डिपेंड करता है। यहां समझिए वजाइनल डिस्चार्ज से जुड़ी सभी जानकारी।
वजाइना से सफेद डिस्चार्ज महिलाओं में काफी कॉमन है। लेकिन बहुत कम महिलाएं इसके बारे में जानती हैं। 13 से 14 साल की उम्र में शुरू होने वाला वजाइनल डिस्चार्ज मैनोपॉज तक होता है। अगर आप कंसीव करने की प्लानिंग कर रही हैं तो आपको जरूर इसके बारे में समझना चाहिए। यहां जानें क्या है वजाइनल डिस्चार्ज और ये क्यों क्यों होता है।
वजाइनल डिस्चार्ज कई रंगों में होता है ऐसे में आप इस रिपोर्ट में जानिए कि आखिर किस रंग का डिस्चार्ज इमफेक्शन की ओर इशारा करता है।
क्या है वजाइनल डिस्चार्ज ?
ल्यूकोरिया यानि व्हाइट डिस्चार्ज औरतों में काफी कॉमन है, खासकर भारत और एशिया के दूसरे देशों में। इतना ज्यादा कॉमन होने के बावजूद महिलाओं को इसके बारे में काफी कम जानकारी होती है। प्रेग्नेंट महिला हो या फिर आप प्रेग्नेंट होना चाह रही हैं। टीनेजर हों या फिर मिड एज। हर मामले में वजाइनल डिस्चार्ज पर ध्यान देना जरूरी होता है। रिपोर्ट्स की मानें तो एक दिन में एक से पांच मिलीलिटर का डिस्चार्ज नॉर्मल होता है। हालांकि कंसिस्टेंसी अलग होती है और ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप पीरियड्स में आप कहां पर हैं। कभी ये बहुत पतला और कभी गाढ़ा हो सकता है। इसकी वजह सिर्फ एक है और वो है हॉर्मोन्स।
क्यों होता है व्जाइनल डिस्चार्ज
पीरियड्स के ठीक बाद एस्ट्रोजन का लेवल गिर जाता है क्योंकि अब शरीर के अंदर कोई एग है ही नहीं जो स्पर्म का इंतजार कर रहा हो। वजाइनल डिस्चार्ज ल्यूब्रिकेटिंग फ्लूयड की तरह काम करता है। लेकिन जब इसकी जरूरत ही नहीं तो डिस्चार्ज भी ना के बराबर ही होता है। जैसे-जैसे ओवयूलेशन नजदीक होता है। एस्ट्रोजजन का लेवल बढ़ जाता है और डिस्चार्ज भी। ये शरीर का कुदरती तरीका होता है जो आपको इंफेक्शन से बचाता है।
क्या होता है ओवयूलेशन?
ओवयूलेशन वह समय है जब एग रिलीज होता है और इस दौरान ही आपके प्रेग्नेंट होने के चांस कुछ ज्यादा होते हैं। इस दौरान डिस्चार्ज कुछ एग व्हाइट की तरह दिखता है। यानी इस तरह के डिस्चार्ज को देख कर आप समझ सकते हैं कि आप अपने सबसे फर्टाइल विंडो में हैं। और स्पर्म अब आसानी से एग तक पहुंच सकता है। जब ये विंडो खत्म होती है तो एस्ट्रोजन का लेवल भी गिर जाता है और इसकी मात्रा कम हो जाती है और कंसीसटेंसी गाढ़ी और चिपचिपी हो जाती है।
प्रेग्नेंसी में व्हाइट डिस्चार्ज
फिर प्रेग्नेंसी में भी डिस्चार्च होता रहता है। कोख में पल रहे बच्चे को इंफेक्शन से बचाने के लिए वजाइना एक सेफ्टी शिल्ड बना लेती है । ऐसे में डिस्चार्ज की मात्रा बढ़ जाती है और ज्यादा एसिडिक भी हो जाता है। इसलिए अंडरवियर से स्मेल भी आ जाती है। इस दौरान इसका रंग भी बदल जाता है और फिर ये कुछ काले रंग का हो सकता है।
इंफेक्शन की जानकारी देता है वजाइनल डिस्चार्ज
वजाइनल डिस्चार्ज से आपको इस बात की जानकारी भी होती है कि आपको इंफेक्शन हो गया है। पीला या हरे रंग का डिस्चार्ड अगर हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। इसी के साथ अगर डिस्चार्ज बहुत ज्यादा ग्रे या फिर गाढ़ा सफेद जिसमें ठक्के जमे हो तो ऐसा डिस्चार्ड इंफेक्शन की ओर इशारा करता है। इसके अलावा अगर पीरियड्स से ठीक पहले या फिर ठीक बाद में लाल या ब्राउन डिस्चार्ज हो तो चिंता की बात नहीं है। हालांकि अगर ऐसा किसी ओर समय होता है तो डॉक्टर के पास जाएं।
कुल मिलाकर वजाइनल डिस्चार्ज वजाइना को इंफेक्शन से बचाने में मदद करता है। हां आपको सभी बातों का ध्यान रखना होगा।
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