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बेहतर पाचन के लिए रात में सोएं इस करवट, पेट की सेहत होगी दुरुस्त, हार्टबर्न से भी होगा बचाव
डिनर करने और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का गैप होना चाहिए ताकि एसिड रिफ्लक्स की समस्या से बचा जा सके.
आजकल अधिकतर लोग पाचन संबंधित समस्याओं से परेशान रहते हैं. इसमें गैस, पेट में जलन, ब्लोटिंग, कब्ज आदि बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम हैं, जो आज अनहेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के कराण लोगों को काफी होती है. हालांकि, यदि कुछ बातों का ध्यान दिया जाए तो डाइजेस्टिव प्रॉब्लम से काफी हद तक बचा जा सकता है. यदि आप पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, एक्सरसाइज करें, भोजन को अच्छी तरह से चबाकर खाएं, फाइबर से भरपूर फूड्स का सेवन करें तो हाजमा सही रहेगा. ये सभी चीज़ें पाचन संबंधित समस्याओं को सुधारती हैं. इसके अलावा, आप रात में किस पोजीशन में सोते हैं, इससे भी आपकी पाचन क्रिया में सुधार होता है. इंडियनएक्सप्रेस डॉट कॉम में छपी एक खबर के अनुसार, रात में आपकी स्लीपिंग पोजीशन पेट की सेहत को काफी हद तक प्रभावित करती है. इससे डाइजेशन और सीने में जलन की समस्या भी कम हो सकती है. ऐसे में आपको यदि पाचन संबंधित समस्याएं बनी रहती हैं तो ये जानना जरूरी है कि रात में किस पोजीशन में सोने से इस समस्या को दूर किया जा सकता है.
क्या बाईं करवट सोने से डाइजेशन में होता है सुधार?
बेहतर पाचन बनाए रखने के लिए आप बाईं करवट सोएं. इस पोजीशन में सोने के कई सेहत लाभ भी होते हैं. ये स्लीपिंग पोजीशन पचने वाले भोजन को छोटी आंत से बड़ी आंत में आसानी से स्थानांतरित कर देती है. बाईं ओर सोने से गैस्ट्रो-इसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज से भी बचाव होता है. इस बीमारी के होने से भी पेट में जलन, गैस, ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है.
ऐसे में बेहतर पाचन के लिए बाईं ओर सोने का सुझाव एक्सपर्ट भी देते हैं. हमारे शरीर के बाईं तरफ इसोफेगल के नीचे पेट होता है. जब हम बाईं करवट सोते हैं, तो पेट में मौजूद एसिड के लिए पाचन तंत्र को ग्रैविटी के खिलाफ ऊपर उठाने में समस्या आती है. दूसरी ओर, ग्रैविटी पेट में एसिड को बनाए रखती है, जो सीने में जलन और अपच के लक्षणों के जोखिम को कम करता है.
खाने के बाद किस करवट सोना है अनहेल्दी?
जब आप रात में खाना खाने के बाद दाईं करवट, पीठ या पेट के बल सोते हैं तो ये सेहत के लिए अनहेल्दी होता है. इससे हार्टबर्न और अपच की समस्या होने लगती है. इतना ही नहीं, पीठ या पेट के बल सोना भी उचित नहीं है. यदि आपको एसिड रिफ्लक्स के कारण हार्टबर्न होता है तो पीठ के बल सोना आपके लिए ठीक नहीं है. पीठ के बल सोने से एसिड गले तक पहुंच जाता है, जिससे रात भर जलन और बेचैनी महसूस हो सकती है. यदि आप जीईआरडी या एसिड रिफ्लक्स के प्रति अतिसंवेदनशील हैं तो एसिड रिफ्लक्स एपिसोड और भी अधिक बढ़ सकती है.
ध्यान रखें कि आप रात में भोजन करते ही बेड पर सोने के लिए ना जाएं. डिनर करने और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का गैप होना चाहिए, ताकि एसिड रिफ्लक्स की समस्या से बचा जा सके.
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