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निमोनिया की जांच (Diagnosis of Pneumonia in Hindi)
कुछ सामान्य लक्षणों की मदद से निमोनिया की पहचान की जा सकती है। लेकिन इसके सटीक कारण और गंभीरता की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर विशेष जांच का सुझाव दे सकते हैं। निमोनिया का निदान करने के लिए डॉक्टर निम्न जांच का सुझाव दे सकते हैं:
ब्लड टेस्ट (Blood Test)
निमोनिया के कारण के बारे में पता लगाने के लिए डॉक्टर खून जांच यानी ब्लड टेस्ट करते हैं
छाती का एक्स-रे (Chest X-Ray)
निमोनिया फेफड़ों को प्रभावित करता है. फेफड़ों में सूजन की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर मरीज के छाती का एक्स-रे करते हैं
स्प्यूटम कल्चर (Sputum Culture)
इस टेस्ट के दौरान डॉक्टर मरीज के म्यूकस का जांच करके इंफेक्शन के कारण का पता लगाते हैं
पल्स ओक्सिमेट्री (Pulse Oximetry)
इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर इस बात का पता लगाते हैं कि मरीज के फेफड़े उसके खून में कितने प्रभाव से ऑक्सीजन भेज रहे हैं
सिटी स्कैन (CT Scan)
इस टेस्ट के दौरान डॉक्टर मरीज के फेफड़ों की तस्वीर को साफ रूप से देख पाते हैं. इससे उन्हें फेफड़ों की स्थिति को अच्छी तरह समझने में मदद मिलती है
फ्लूइड सैंपल (Fluids Sample)
इस टेस्ट की मदद से डॉक्टर निमोनिया के कारण को जानने की कोशिश करते हैं
इन सभी जांच की मदद से डॉक्टर को निमोनिया के सटीक कारण का पता चलता है जिसके बाद उपचार के माध्यम का चयन और उपचार प्रक्रिया शुरू होती है।
निमोनिया का उपचार (Treatment of Pneumonia in Hindi)
निमोनिया का उपचार उसके कारणों पर निर्भर करता है। निमोनिया का कारण बैक्टीरिया होने पर डॉक्टर मरीज को एंटीबायोटिक निर्धारित कर सकते हैं। साथ ही, वायरल निमोनिया की स्थिति में एंटीवायरल दवाएं निर्धारित की जा सकती हैं।
निमोनिया का कारण फंगल होने पर डॉक्टर फंगल दवाओं का सुझाव दे सकते हैं। दवाएं निर्धारित करने के साथ-साथ डॉक्टर अधिक से अधिक आराम करने और शरीर को हाइड्रेट रखने का सुझाव देते हैं। इन सबके अलावा, कुछ मामलों में डॉक्टर इंट्रावेनस एंटीबायोटिक्स, रेस्पिरेटरी थेरेपी और ऑक्सीजन थेरेपी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
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