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हृदय गति का कम होना इस गंभीर रोग का है संकेत, जानिए Low Heart Rate का कारण और उपचार
ब्राडीकार्डिया यानी कम हृदय की दर (Bradycardia: Low Heart Rate) एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिल की धड़कने की दर प्रति सेकंड 60 बीट से भी कम हो जाती है। जिसके चलते व्यक्ति को तमाम तरह की समस्याएं होने लगती हैं। हृदय की दर 60 से कम होने पर व्यक्ति को बेहोशी, अस्थिर रक्तचाप, चक्कर आना और हृदय में दर्द जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। ब्राडीकार्डिया का उपचार करने के लिए कई बार चिकित्सकों को सर्जरी की भी मदद लेनी पड़ती है। ब्राडीकार्डिया क्या होता है और इसके कारण क्या हैं, के बारे में जानने के लिए हमने मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर संतोष कुमार डोरा से बातचीत की; जिन्होंने हमें ब्राडीकार्डिया के बारे में विस्तार से बताया है। साथ ही उन्होंने ब्राडीकार्डिया के उपचार के तरीकों के भी बारे में जानकारी दी है। विश्व हृदय दिवस (World Heart Day 2021) के मौके पर ब्राडीकार्डिया के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।
कम हृदय दर (ब्राडीकार्डिया) का कारण - Bradycardia: Low Heart Rate Causes In Hindi
आराम की स्थिति में जब हमारा हृदय प्रति मिनट 60 से 100 बार धड़कता है तो इस हृदय दर (Heart Rate) को सामान्य माना जाता है। शरीर में ब्राडीकार्डिया (मंदनाड़ी) की समस्या तब मानी जाती है जब विश्रांति के समय ह्रदय दर प्रति मिनट 60 से भी कम होती है। इसके कुछ कारण निम्नलिखित हैं:
हृदय में संपूर्ण अवरोध या ब्लॉक- Complete Heart Block
यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें विद्युत स्पंद अलिंद (हृदय का ऊपर वाला कक्ष) से निलय (हृदय का निचला कक्ष) की ओर प्रवाहित नहीं होता है। ऐसे मामलों में निचले कक्ष की गतिविधि संपूर्ण रूप से इसके अपने प्रतिस्थापी धड़कन पर निर्भर करती है जो आम तौर पर काफी कम होती है, लगभग 30 से 40 प्रति मिनट। यह सामान्य तौर पर बढ़ती उम्र के साथ एट्रियोवेंट्रिक्यूलर नोड (AV Node) यानि अलिंद निलय पर्व के अपकर्ष के कारण होता है, जिसके माध्यम से विद्युत स्पंद अलिंद से निलय की ओर प्रवाहित होता है। यह आमतौर पर बढ़े हुए आयु वर्ग (70 की उम्र से आगे) में होता है। बहुत ही कम मामलों में यह कम उम्र में होता है। जन्मजात संपूर्ण हृदय अवरोध एक ऐसी स्थिति है जिसमें ऊपर बताई गई स्थिति जन्म से ही जारी रहती है। अन्य स्थितियाँ जिसके कारण हृदय में पूरी तरह अवरोध उत्पन्न हो सकता है वे हैं इस्केमिक या कोरोनरी ह्रदय रोग, मायोकार्डिटिस (ह्रद्पेशीशोथ), वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद एट्रियोवेंट्रिक्यूलर नोड (AV Node) को असावधानीवश हुई चोट, दवाईयां इत्यादि।
साइनस ब्राडीकार्डिया- Sinus Bradycardia
इस स्थिति में साइनस नोड, दाहिना ऊपरी कक्ष का एक क्षेत्र जहाँ स्पंद शुरु होता है, कमज़ोर होता है और इस वजह से स्पंद प्रति मिनट 60 से भी कम की दर में उत्पन्न होता है। इसे सिक साइनस सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है जिसमें स्पंद का धीमे तरीके से उत्पन्न होना किसी और द्वितीयक कारक की वजह से नहीं है। द्वितीयक कारक जो साइनस दर को कम कर सकते हैं वे हैं दवाई प्रेरित साइनस ब्राडीकार्डिया, हाइपोथाइरॉडिज़म, इलेक्ट्रॉलाइट असंतुलन, मायोकार्डिटिस (ह्रद्पेशीशोथ), किसी भी कारण से होने वाला इंट्राक्रेनियल (आंतरकपालीय) दबाव इत्यादि। युवा एथलीटों में वेगस तंत्रिका संबंधी गतिविधि के पूर्व प्रभावी होने के कारण ह्रदय दर कम रहता है (प्रति मिनट 40 से 60 के बीच)। यह एक सामान्य शरीर क्रियात्मक स्थिति है और किसी भी लक्षणों की अनुपस्थिति में किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती।
उच्च श्रेणी का एट्रियोवेंट्रिक्यूलर ब्लॉक यानि अलिंद निलय रोध - High Grade Atrioventricular Block
इस स्थिति में स्पंद अनिश्चित ढंग से ऊपरी कक्ष (अलिंद) से निचले कक्ष (निलय) में प्रवाहित होता है। कई बार यह सामान्य रुप से प्रवाहित होता है और कई बार इसमें अवरोध आ जाता है, जिसकी वजह से निलय दर कम हो जाता है। यह सामान्य तौर पर बढ़ती उम्र के साथ एट्रियोवेंट्रिक्यूलर नोड (AV Node) यानि अलिंद निलय पर्व के अपकर्ष के कारण भी होता है।
कम हृदय दर के कारण दिखाई देने वाले लक्षण - Bradycardia: Low Heart Rate Symptoms In Hindi
कम हृदय दर (Heart Rate) के कारण विभिन्न लक्षण सामने आते हैं:
मूर्छा: चेतना का क्षणिक गायब होना और गिरने को मूर्छा कहा जाता है। यह कम हृदय दर के कारण हो सकता है।
चक्कर आना, क्षणिक अंधेरा छा जाना: कम हृदय दर के कारण मरीज़ों में विभिन्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
आसानी से थक जाना या थकावट: कम हृदय दर के कारण कभी कभी मरीज़ आसानी से थक जाने की शिकायत करते हैं भले ही काम का बोझ बहुत ही कम हो। अक्सर मरीज़ शिकायत करते हैं कि वे थोड़ा दूर भी पैदल नहीं चल पाते और उन्हें बार-बार आराम करने की आवश्यकता पड़ती है।
कम हृदय दर का उपचार - (Bradycardia: Low Heart Rate Treatment In Hindi)
यदि कम हृदय दर किसी सेकेंड्री कारण से है तो उस समस्या को सुधारने से हृदय दर सामान्य स्थिति में वापस लौट सकती है। यदि साइनस ब्राडीकार्डिया (Sinus Bradycardia) की शिकायत ध्यान में आती है तो कभी-कभी एक आपातकालीन उपाय के तौर पर तीव्रता से हृदय दर को बढ़ाने के लिए एट्रोपिन जैसी दवाई नस के माध्यम से दी जाती है। यदि यह उम्र से संबंधित अपकर्ष है या फिर साइनस नोड या एट्रियोवेंट्रिक्यूलर नोड (AV Node) यानि अलिंद निलय पर्व को हुई क्षति के कारण है-जिसे ठीक नहीं किया जा सकता, तो ऐसी स्थिति में पेसमेकर (Pacemaker Surgery) लगाना आवश्यक हो जाता है।
स्थायी पेसमेकर एक छोटा उपकरण होता है जिसे कॉलर बोन के नीचे त्वचा और वसा ऊतक के नीचे इम्प्लांट किया जाता है। एक नस के माध्यम से एक या दो लीड्स को दाएं ऊपरी और निचले कक्ष में पास किया जाता है और हृदय पेशी की आंतरिक परत में फिक्स कर दिया जाता है। लीड्स को पेसमेकर से जोड़ दिया जाता है। पेसमेकर हृदय की विद्युत गतिविधि को महसूस कर सकते हैं। जब तक यह हृदय के विद्युत स्पंद को महसूस करता है तब तक यह स्टैंडबाय मोड पर रहता है और यदि इसे महसूस नहीं होता हो तो फिर यह कृत्रिम रुप से विद्युत स्पंद उत्पन्न करता है ताकि ह्रदय मांसपेशी को उत्तेजन दिया जा सके और इस प्रकार सामान्य हृदय दर बनाए रखा जाता है।
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