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सिर पर लगने वाली चोट का दिमाग पर कैसे पड़ता है असर, जानें इसके खतरे और इलाज

सिर में लगने वाली चोट कई बार खतरनाक हो सकती है। सिर की चोट कई बार गंभीर नहीं भी दिखे, पर मस्तिष्क को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। जानें ब्रेन इंजरी के क्या हैं खतरे और इससे कैसे कर सकते हैं बचाव।

रोड एक्सीडेंट या किसी अन्य दुर्घटना में अगर सिर पर गहरी चोट लग जाए, तो इससे व्यक्ति का दिमाग बुरी तरह प्रभावित होता है। कई बार खेल खेलते हुए, गिरने, टकराने या लड़ाई-झगड़े के कारण सिर में चोट लग जाती है। सिर की चोट गंभीर न दिखते हुए भी गंभीर हो सकती है। सिर पर लगने वाली चोट के कारण तंत्रिकाओं और टिशूज को नुकसान पहुंच सकता है और ब्रेन इंजरी हो सकती है। इस तरह की चोट को ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी कहते हैं। चोट अगर मस्तिष्क तक पहुंच जाए, तो ये बेहद खतरनाक हो सकती है। इसके कारण व्यक्ति अपना मानसिक संतुलन खो सकता है या उसके शरीर के अंग खराब हो सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कि सिर पर चोट लगना क्यों खतरनाक है और चोट लग जाने पर क्या करना चाहिए।


सिर पर चोट क्यों खतरनाक?

सिर पर लगने वाली चोट खतरनाक होती है क्योंकि मस्तिष्क के जिस हिस्से में चोट लगी हो, उसके नियंत्रण वाले अंग पर भी चोट का असर दिख सकता है। आमतौर पर सिर पर अचानक तेज चोट लग जाने पर व्यक्ति को अंधेरा दिखाई देता है और कुछ सेकेंड्स के लिए आंखों की रोशनी चली जाती है। इसके अलावा कई बार खड़े होने, बोलने और सोचने में भी परेशानी होने लगती है। आमतौर पर सिर पर चोट लगने के कारण व्यक्ति के सिर में तेज दर्द होता है और आंखें चौंधिया जाती हैं।


जा सकती है याददाश्त

हाल में 'हेलसिंकी एंड द हेलसिंकी' यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन में बताया गया है कि डिमेंशिया के ज्यादातर मरीजों में याददाश्त जाने की वजह कोई न कोई पुरानी चोट होती है। इसके अलावा युवाओं में डिमेंशिया का मुख्य कारण सिर पर लगने वाली चोट ही है। हालांकि शोधकर्ता यह भी बताते हैं कि सिर की चोट से सिर्फ डिमेंशिया का खतरा होता है, पार्किंसन्स रोग का नहीं। कुछ अन्य गंभीर मामलों में व्यक्ति कोमा भी जा सकता है।
ध्यान लगाने में हो सकती है समस्या

सिर पर लगने वाली चोट के कारण भले ही आपको ज्यादा देर तक दर्द न हो, मगर कई बार ये चोट आपकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर देती है। चोट के कारण आपमें किसी काम में ध्यान लगाने की शक्ति बिल्कुल कम हो सकती है या खत्म हो सकती है। दरअसल काम पर फोकस करने के लिए मस्तिष्क का एकाग्रचित्त होना बहुत जरूरी है। मगर चोट के कारण तंत्रिकाएं प्रभावित होती हैं, और व्यक्ति को ध्यान लगाने में परेशानी होने लगती है।
बोलने और सोचने में परेशानी

कई बार खेलते-कूदते के दौरान सिर के पीछे के हिस्से में चोट लग जाती है या गुस्से में मां-बाप, दोस्त और टीचर आदि सिर पर जोर से मार देते हैं। इस तरह लगने वाली चोट भी गंभीर हो सकती है और इससे बच्चे की सोचने की क्षमता अविकसित रह सकती है या कमजोर हो सकती है। कई बार ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी के कारण व्यक्ति को बोलने और समझने में भी परेशानी होने लगती है। कुछ लोग चोट लगने के बाद धीरे-धीरे और असपष्ट बोलने लग जाते हैं।


सिर की चोट से कैसे बचें?

सिर पर चोट लगने से बचाने के लिए जरूरी है कि बाइक चलाते समय आप हेलमेट पहनकर ही बाइक चलाएं।+
खेल के दौरान सभी सुरक्षा उपकरण पहनें या सिर के हिस्से में कोई मोटा कपड़ा बांधकर खेलें।
कार चलाते समय सीट बेल्ट जरूर लगाएं। दुनियाभर में कार एक्सीडेंट ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी का एक प्रमुख कारण हैं।
सिर पर चोट लगते ही तुरंत जमीन पर बैठकर आंखें बंद कर लेनी चाहिए और थोड़ी देर आराम करना चाहिए।
अगर चोट के कारण सिर से खून निकलने लगा है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से मिलना चाहिए, न कि स्वयं से दवा लेनी चाहिए।
भूकंप की खबर सुनते ही किसी सुरक्षित स्थान जैसे- टेबल, डेस्क, आलमारी आदि के नीचे छिप जाना चाहिए और अपने दोनों हाथों से सिर को बचाते हुए रोके रखना चाहिए।
सिर में चोट लगने के बाद अगर दिखाई देना या बोलने, हाथ-पैर हिलाने में परेशानी हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर को बताएं।

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