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दिमाग की नसें कमजोरी होती हैं, तो इसका असर आपके चलने-फिरने पर भी पड़ सकता है. दिमाग नसों के कमजोर होने से कई बार आपकी सोचने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है. साथ ही कई बार ये याददाश्त को भी प्रभावित करता है, इससे व्यक्ति को चीजें याद करने और बोलने में मुश्किल हो सकती है. इससे शरीर का तालमेल नहीं बैठ पाता है.
1. मांसपेशियों की कमजोरी
मांसपेशियों की कमजोरी नसों की कमजोरी का ही एक लक्षण है। दरअसल, इससे शरीर में तालमेल की कमी नजर आती है। होता यह है कि दिमाग से शरीर के सभी अंग जुड़े होते हैं। जब ब्रेन में कमजोरी होती है मांसपेशियों का तालमेल बिगड़ने लगता है। ऐसे में कई बार आम कामों को करने में भी समस्या होने लगती है।
2. अचानक सिरदर्द
अचानक से सिरदर्द या लगातार सिरदर्द होना दिमाग की नसों की कमजोरी के लक्षण हो सकते हैं। दरअसल, दिमाग में कमजोरी होने पर ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन का सर्कुलेशन सही तमाम कोशिकाओं में ऑक्सीजन सही से नहीं पहुंच पाता है। इससे अचानक से तेज सिर दर्द होने लगता है। इसके अलावा कई बार दिमाग के किसी खास हिस्से में भी दर्द होने लगता है।
3. झुनझुनी महसूस करना
नसों की कमजोरी के कारण कई बार झुनझुनी महसूस होती है। इसके अलावा कई बार ऐसा लगता है कि शरीर ने अचानक से अपना आपा खो दिया है। अगर उठने और बैठने में आपको ये समस्या होने लगे तो ये नसों की कमजोरी के लक्षण हो सकते हैं। इसे नजरअंदाज ना करें और डॉक्टर को दिखाएं।
4. पीठ दर्द
नसों की कमजोरी के कारण मांसपेशियों की कठोरता बढ़ते हैं। साथ ही कई बार अचानक से झटके लगते हैं जो कि पीठ दर्द का कारण बन सकता है। इन तमाम स्थितियों में ध्यान देने वाली बात ये है कि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं। इन तमाम लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और समय रहते ही इसका इलाज जरूरी है।
5. झटके या दौरे होना
ब्रेन की नसों में कमजोरी होने से शरीर में झटके या दौरे आते हैं। इसके अलावा बोलचाल और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं भी होने लगती हैं। अगर आपको उपरोक्त लक्षण दिखाई देते हैं, तो सलाह दी जाती है कि आप किसी चिकित्सक से उनकी जांच कराएं। प्रारंभिक इलाज आपकी स्थिति से ठीक होने में मदद कर सकता है।
नसों को स्वस्थ रखने के लिए फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन से भरपूर आहार लें। मांस, मछली, अंडे, कम वसा वाले डेयरी खाद्य पदार्थ खाएं। साथ ही विटामिन बी-12 की कमी से बचें। अगर आप शाकाहारी हैं, तो फाइबर से भरपूर फूड्स का सेवन करें। नियमित रूप से व्यायाम करें। सप्ताह में कम से कम तीन बार कम से कम 30 मिनट से एक घंटे तक व्यायाम करने का प्रयास करें। इसके अलावा जहरीले रसायनों के संपर्क से बचें और धूम्रपान और शराब में का सेवन ना करें।
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