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फंगल इंफेक्शन होने के कारण
फंगल इंफेक्शन होने के बहुत सारे कारण होते हैं, जो फंगस के पनपने या बढ़ने के वजह बन जाते हैं-
-कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली भी फंगल संक्रमण का कारण बनती है।
-ज्यादातर गर्म, नम वातावरण तथा नम त्वचा क्षेत्र इस संक्रमण के होने का प्रमुख कारण होते है।
-एड्स, एच.आई.वी संक्रमण, कैंसर, मधुमेह जैसी बीमारियाँ भी फंगल संक्रमण का कारण बनती है।
-जो लोग एक फंगल संक्रमण (Fungal infection) से पीड़ित व्यक्ति से संपर्क में आते हैं, उन्हें भी संक्रमण हो सकता है।
-अधिक वजन और मोटापा भी इसका एक कारण बन सकता है। जांघों पर अतिरिक्त चर्बी, नियमित और लंबे समय तक साईकिल चलाने या जॉगिंग करने से इस हिस्से में अतिरिक्त नमी और रगड़ होने लगती है। लगातार इस रगड़ से त्वचा में रैशेज हो सकते हैं। इससे फंगल और अन्य संक्रमण हो सकते हैं।
-अधिक पसीना, फंगस के बढ़ने का कारण हो सकते हैं।
-आनुवांशिकी कारक या फंगल संक्रमण (Fungal infection) का पारिवारिक इतिहास भी इस संक्रमण का प्रमुख कारण होता है।
-महिलाओं को सेनेटरी पैड से भी जांघों के आस-पास संक्रमण हो सकता है।
-पाउडर, डियोड्रेंट, कपड़ा धोने के लिए इस्तेमाल होने वाले डिटर्जेंट पाउडर के एलर्जी के कारण भी जांघों के बीच के ग्रोइन एरिया में रैशेज हो सकते हैं।
-कई बार बच्चों को नैपी रैशज़ हो जाते हैं। जब बच्चा अधिक समय तक गीली नैपी पैड के संपर्क में रहता है, तो उसे ऐसी परेशानी हो सकती है।
-आमतौर पर मानसून के दौरान फंगल पैदा करने वले जीवाणु कई गुना तेजी से फैलते हैं। आमतौर पर शरीर के नजर अंदाज किए गए अंगों जैसे पैर की अंगुलियों के आगे का भाग, अंगुलियों के आगे का भाग, अंगुलियों आदि के बीच, कमर का निचला हिस्सा, जहाँ ये संक्रमण बहुत अधिक तेज़ी से होता है। मानसून के दौरान लोग हल्की बूंदा-बांदी में भीगने के बाद अक्सर त्वचा को गीला छोड़ देते हैं। यही छोटी-सी असावधानी कई बार फंगल से संक्रमित होने का कारण बन जाती है, क्योंकि नमी में बढ़ता है त्वचा पर फफूंद संक्रमण यानि बरसाती मौसम, उमस और नमी भरे वातावरण में फंगस का आक्रमण बढ़ जाता है। यही कारण है कि इन दिनों अधिकतर लोग फंगल इंफेक्शन का शिकार होते हैं। इम्यून सिस्टम यानि रोग प्रतिरोधी क्षमता का कमजोर होना-स्किन इंफेक्शन की बड़ी वजह होती है। इस मामले में त्वचा संक्रमण का जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। जून, जुलाई और अगस्त के महीने के दौरान यह समस्या काफी बढ़ जाती है।
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