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गर्भाधान का अनुमानित दिन वह होता है, जिस दिन आप पहली बार गर्भवती होती हैं, मगर, अधिकांश लोग गर्भावस्था की गणना इस दिन से नहीं करते। ऐसा इसलिए, क्योंकि वास्तव में आपने कौन से दिन डिंबोत्सर्जन (ओव्यूलेट) किया और किस दिन गर्भधारण किया, यह जानने का कोई विश्वसनीय तरीका नहीं है।
यदि आपने अपने जननक्षम दिनों में केवल एक बार ही संभोग किया हो, तो भी जरुरी नहीं है कि आप तभी गर्भधारण कर लेंगी। संभव है कि शुक्राणु आपकी डिंबवाही नलिका (फैलोपियन ट्यूब) में डिंब के आने के तक कुछ दिन तक रहे। जब डिंब वहां पहुंचता है तो शुक्राणु उसे निषेचित करता है और आपका गर्भधारण होता है।
तो ऐसे में गर्भधारण किस दिन हुआ, यह पता न होने पर प्रसव की नियत तिथि का पता कैसे लगाया जाता है? इसके लिए डॉक्टर जो तरीका अपनाते हैं उसमें वे आपकी आखिरी माहवारी (एलएमपी) के पहले दिन से गणना करते हैं।
आपकी गर्भावस्था लगभग 282 दिन यानि नौ कैलेंडर महीने और सात दिन तक या फिर 40 हफ्तों तक चलनी चाहिए। इसलिए, शिशु के जन्म की संभावित तारीख जानने के लिए गर्भावस्था की इस समयावधि को अपनी पिछली माहवारी के पहले दिन से जोड़ दीजिए।
हालांकि, इस तरीके से एकदम सही नियत तिथि का पता चलना मुश्किल होता है। यदि आपकी माहवारी नियमित रहती है और यह हर बार पूर्वानुमानित 28 दिन में शुरु हो जाती है, तो यह गणना अधिक विश्वसनीय परिणाम देती है। शिशु के जन्म की संभावित तिथि का पता लगाने के लिए आप हमारे ड्यू डेट कैलकुलेटर का इस्तेमाल भी कर सकती हैं।
गर्भावस्था का पता चलने के बाद जब आप डॉक्टर के पास पहले चेकअप के लिए जाती हैं, तब ही वह आपकी अनुमानित देय तिथि की गणना कर लेती हैं। डॉक्टर यह देय तिथि आपकी गर्भावस्था की फाइल पर लिख देंगी। आप देख सकती हैं कि डॉक्टर ने प्रसव की अनुमानित तिथि (एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी) या फिर ईडीडी करके देय तिथि लिखी है।
लेकिन यह बात ध्यान में रखें कि बहुत सी महिलाओं की माहवारी की अवधि अलग-अलग होती है। इसलिए हो सकता है कि पिछली माहवारी के पहले दिन से गणना करने पर आपको विश्वसनीय परिणाम प्राप्त न हों। आपके पहले अल्ट्रासाउंड स्कैन, (छह से नौ हफ्ते के बीच) जिसे डेटिंग और वायबेलिटी स्कैन भी कहा जाता है, उससे शिशु के जन्म की अधिक सटीक नियत तिथि पता चलेगी।
अल्ट्रासाउंड डॉक्टर (सोनोग्राफर) स्क्रीन पर आपके शिशु को देखकर यह पता लगाएंगी कि आप कितनी हफ्तों की गर्भवती हैं। वे स्क्रीन पर ध्यानपूर्वक आपके शिशु को देखकर और उसे मापकर गर्भावस्था के चरण का पता लगाती हैं।
शिशु पहली तिमाही में समान दर से बढ़ते और विकसित होते हैं, इसलिए इस चरण पर आपके शिशु का माप यह जानने का अच्छा तरीका होता है कि आप कितने हफ्तों और दिनों की गर्भवती हैं। सोनोग्राफर यह भी देखेंगी कि आपके गर्भ में जुड़वा या इससे अधिक शिशु तो नहीं पल रहे।
यदि किसी कारण से डॉक्टर को लगे कि ड्यू डेट सही नहीं आ रही है, तो वे इसमें बदलाव भी कर सकती हैं। यदि बताई गई नियत तिथि की तुलना में यदि शिशु काफी बड़ा या छोटा लगे तो डॉक्टर शिशु के विकास के आधार पर ड्यू डेट में बदलाव करेंगी। वे फिर आपकी सभी जांच व चेक-अप भी इस नई नियत तिथि के अनुसार तय करेंगी।
निस्संदेह, आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि ड्यू डेट की गणना हमेशा अनुमानित होती है और कोई भी यह सटीकता से नहीं बता सकता कि शिशु का जन्म कब होगा। बहुत ही कम शिशु अपनी निर्धारित जन्म तिथि के दिन पैदा होते हैं।
अधिकांश महिलाओं का प्रसव अनुमानित तिथि से दो हफ्ते पहले या बाद में शुरु होता है। हालांकि 39 या 40वें हफ्ते तक यदि प्रसव अपने आप शुरु नहीं होता तो आपकी गर्भावस्था को देखते हुए डॉक्टर आपका प्रसव प्रेरित (इंड्यूस्ड लेबर) कर सकती हैं।
इसलिए अपनी ड्यू डेट को केवल अनुमान ही मानें और यह आपको प्रसव और शिशु के जन्म के लिए तैयार करने में मदद कर सकती है।
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