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शिशु के जन्म के बाद जब अपरा (प्लेसेंटा) गर्भाशय से अलग होती है, तो रक्त वाहिकाएं खुली रह जाती है, जिससे गर्भाशय में खून बहता रहता है। प्लेसेंटा की डिलीवरी के बाद गर्भाशय को प्रबल रूप से संकुचित होना चाहिए, ताकि रक्त वाहिकाएं बंद हो सकें और रक्तस्त्राव रुक जाए।
डिलीवरी के तुरंत बाद ब्लीडिंग होना सामान्य है। यह डिलीवरी भले ही नॉर्मल हो या सिजेरियन, बच्चे के जन्म के बाद ब्लीडिंग होती है। ज्यादातर ब्लीडिंग वहां से होती है जहां से प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से अलग होती है। बच्चे के जन्म के बाद होने वाली ब्लीडिंग अत्यधिक भी हो सकती है लेकिन यह धीरे-धीरे समय के साथ कुछ ही हफ्तों में कम हो जाती है। लेकिन नई मांओं के लिए नवजात के रूटीन के साथ इस तकलीफ को सहना भी भारी लगता है।

संक्रमण : नॉर्मल डिलीवरी है तो योनि संक्रमण यानी वेजाइनल इन्फेक्शन होना सामान्य है। ऐसे में महिलाओं को साफ-सफाई का विशेष ध्यान देना होता है। गर्भाशय संक्रमण या किडनी संक्रमण की स्थिति भी पैदा हो सकती है। इनके इलाज के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक्स दवाओं का कोर्स करने के लिए कहते हैं।

डिलीवरी के बाद इतने दिनों से ज्‍यादा हो गई ब्‍लीडिंग, तो तुरंत डॉक्‍टर को लगाएं कॉल
प्रेग्‍नेंसी के दौरान शरीर के अंदर कई तरह के बदलाव आते हैं और ऐसा जरूरी नहीं है कि डिलीवरी के तुरंत बाद ये बदलाव खतम हो जाएं। रिकवर करने के लिए आपके शरीर को थोड़ा समय लगता है। इसका मतलब है कि डिलीवरी के कुछ दिन या हफ्ते बाद भी आपको कुछ लक्षण झेलने पड़ सकते हैं और इन लक्षणों में से एक है ब्‍लीडिंग होना।

नॉर्मल या सिजेरियन डिलीवरी के बाद ब्‍लीडिंग होना नॉर्मल बात है लेकिन आपको पता होना चाहिए कि ये ब्‍लीडिंग कब तक होती है और किस स्‍टेज पर आपको डॉक्‍टर से बात करने की जरूरत है।
​नॉर्मल डिलीवरी के बाद ब्‍लीडिंग

डिलीवरी के बाद पहले से तीन दिन तक चमकीले से गहरे लाल रंग का खून आ सकता है। ये खून पीरियड्स की ब्‍लीडिंग की तरह ही होता है। आपको खून के थक्‍के भी आ सकते हैं।

चौथे और सातवें दिन के बीच में खून का रंग गुलाबी से भूरा हो जाता है और थक्‍के भी छोटे आते हैं या नहीं आते हैं। इस हफ्ते के खत्‍म होने तक डिस्‍चसर्ज सफेद से पीले रंग का हो जाता है। तीन से छह हफ्तों के अंदर ब्‍लीडिंग रूक जाती है।


​सिजेरियन ऑपरेशन के बाद ब्‍लीडिंग

नॉर्मल डिलीवरी के मुकाबले सी-सेक्‍शन के बाद ब्‍लीडिंग कम हो सकती है। फिर भी आपको कुछ हफ्तों तक योनि से खून आ सकता है। खून का रंग लाल से भूरा हो सकता है। इसके बाद वजाइनल डिस्‍चार्ज शुरू हो जाता है।

ऑपरेशन के बाद पहले कुछ दिनों में ब्‍लीडिंग हैवी रहती है और रिकवरी के साथ यह कम होती जाती है। वहीं हर महिला को अलग तरह से ब्‍लीडिंग हो सकती है। यह ब्‍लीडिंग चार से छह हफ्ते तक हो सकती है।
​कब ज्‍यादा हो सकती है ब्‍लीडिंग

डिलीवरी के कुछ हफ्तों के अंदर ब्‍लीडिंग धीमी और फिर बंद हो जानी चाहिए लेकिन कुछ चीजें ब्‍लीडिंग को कुछ समय के लिए बढ़ा सकती हैं, जैसे कि :

सुबह बिसतर से उठने पर
स्‍तनपान करवाते समय
एक्‍सरसाइज करने पर
पेशाब या मल त्‍याग करने पर


​छह हफ्ते से ज्‍यादा ब्‍लीडिंग हो तो

कुछ महिलाओं को नॉर्मल से ज्‍यादा दिनों तक ब्‍लीडिंग हो सकती है। लेकिन अगर आपको प्रसव के 6 हफ्ते बाद भी ब्‍लीडिंग हो रही है तो यह नॉर्मल बात नहीं है। इस बारे में आपको डॉक्‍टर से बात करनी चाहिए।

ब्‍लीडिंग को कंट्रोल करने के लिए अच्‍छी क्‍वालिटी के सैनिटरी पैड पहनें। थोड़ी-थोड़ी देर में पैड चेंज करती रहें।
​डॉक्‍टर से कब करें बात

अगर एक घंटे से भी कम समय में सैनिटरी पैड गीला हो गया है या डिलीवरी के कुछ दिन बाद भी ब्‍लीडिंग कम नहीं हो रही है तो आपको डॉक्‍टर से बात करनी चाहिए। इंफेक्‍शन के संकेत मिलने जैसे कि डिस्‍चार्ज से बदबू आने, 100.4 डिग्री फारेनहाइट से ज्‍यादा बुखार होने या ठंड लगने, खून का रंग लाल बने रहने और दूसरे हफ्ते में भी हैवी ब्‍लीडिंग होने, पेट के एक या दोनों तरफ छूने पर दर्द होना, चक्‍कर आना या दिल की धड़कन तेज चलने पर आपको डॉक्‍टर से कंसल्‍ट करना चाहिए।

वहीं यदि आपको खून के थक्‍के भी ज्‍यादा आ रहे हैं तो इस बारे में भी डॉक्‍टर को जरूर बताएं।

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