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डिलीवरी के बाद के पहले छह हफ्तों को पोस्टपार्टम पीरियड कहा जाता है। शिशु का जन्म लेना हर मां के लिए खास और खुशी का पल होता है लेकिन इस समय में महिलाओं के शरीर को डिलीवरी के कई घावों को भरना होता है।
इस वजह से नॉर्मल डिलीवरी के बाद महिलाओं को अपने शरीर की खास देखभाल करनी चाहिए। डिलीवरी के बाद रोजमर्रा के कामों के लिए खुद को तैयार करना चुनौतीपूर्ण होता है। वहीं, शिशु की देखभाल के साथ साथ आपको अपना भी ध्यान रखना पड़ेगा।
अधिकतर मांएं डिलीवरी के बाद कम से कम छह हफ्तों तक काम करना शुरू नहीं करती हैं। इस समय में शरीर के घाव भी भर जाते हैं और पूरी तरह से रिकवरी हो जाती है।
रात को बार बार शिशु को दूध पिलाने की वजह से महिलाओं की रात को नींद पूरी नहीं हो पाती है जिससे उन्हें थकान महसूस होने लगती हैं। हालांकि, बच्चे के रूटीन में आने के साथ आपकी ये परेशानी भी दूर हो जाती है, लेकिन तब तक के लिए आप कुछ बातों का ध्यान रखकर डिलीवरी के बाद अपनी देखभाल कर सकती हैं।
पर्याप्त आराम करें : थकान को दूर करने के लिए जितना हो सके आराम करें। दूध पीने के लिए बच्चा हर दो से तीन घंटे में नींद से जागता है। इसलिए जब भी आपका बच्चा सोए, तभी आप भी झपकी ले लें। इससे आपकी थकान भी दूर हो जाएगी।
किसी की मदद लें : डिलीवरी के बाद शिशु को संभालने के लिए परिवार के किसी सदस्य की मदद ले सकते हैं। डिलीवरी के बाद शरीर को रिकवर करने की जरूरत होती है इसलिए किसी की मदद लेने से आपको ज्यादा आराम मिल पाएगा।
संतुलित आहार लें : शरीर को जल्दी स्वस्थ करने के लिए संतुलित आहार लें। अपनी डायट में साबुत अनाज, सब्जियां, फल और प्रोटीन को शामिल करें। इस दौरान खूब पानी पिएं। वहीं स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को भी खूब पानी पीने की जरूरत होती है।
व्यायाम करें : स्वस्थ और फिट रहने के लिए आप डॉक्टर की सलाह पर एक्सरसाइज कर सकती हैं लेकिन ज्यादा कठिन व्यायाम न करें। थोड़ा-सा टहल लें या घर से बाहर निकलें। बाहर खुली हवा में जाने से आपकी एनर्जी बढ़ेगी और मन भी शांत रहेगा।
डिलीवरी के बाद कब्ज सताए तो घरेलू उपाय अपनाएं
- अगर आपको बच्चा पैदा करने के बाद कब्ज की समस्या हो रही है तो फलों का रस पिएं। सेब और नाशपाती जैसे फलों में सोर्बिटोल नामक तत्व होता है जो कब्ज को दूर करता है।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से मल पतला होकर शरीर से बाहर निकल जाता है। इसके अलावा अपने आहार में अघुलनशील फायबर युक्त आहार को शामिल करें। फाइबर कब्ज को दूर कर पेट साफ रखता ह
शिशु के आने के बाद महिलाओं की जिंदगी काफी व्यस्त हो जाती है। वो न तो ठीक से सो पाती हैं और न ही अपनी पसंद का कोई काम कर पाती हैं। वहीं बच्चे की रूटीन के हिसाब से खुद को ढालना भी स्ट्रेस देता है।
स्ट्रेस और एंग्जायटी में नींद कम आने लगती हैं और कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होता है। इस स्ट्रेस हार्मोन के ज्यादा बनने पर कुछ लोगों को दस्त तो कुछ को कब्ज हो जाती है। कब्ज दूर करने के लिए स्ट्रेस या तनाव को कम करना बहुत जरूरी है।
ऊपर बताए गए कब्ज दूर करने के तरीकों के अलावा मालिश भी कारगर उपाय है। आंतों के अलग-अलग हिस्सों की मालिश करने से आंतों की दीवारें मजबूत होती हैं और मल पतला होता है।
कब्ज से राहत पाने के लिए प्राकृतिक रेचक का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अलसी के बीज और नारियल पानी प्राकृतिक रेचक यानी मल को पतला कर कब्ज से बचाए रखने का काम करते हैं।
शारीरिक गतिविधियों से शरीर के सभी अंगों में खून और ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है। इन अंगों में पेट भी शामिल है। नियमित व्यायाम से बड़ी आसानी से कब्ज को दूर किया जा सकता है।
डिलीवरी के बाद डॉक्टर की सलाह पर हल्के व्यायाम शुरू कर सकती हैं। रोजाना 30 मिनट पैदल चलने से पाचन तंत्र को ठीक से काम करने में मदद मिल सकती है।
अदरक की चाय हल्के रेचक की तरह काम करती है और भूख को बढ़ाती एवं पाचन को बेहतर करती है। हालांकि, अगर आपको डायबिटीज है तो अदरक की चाय डायबिटीज की दवा के अवशोषण को प्रभावित कर सकती है इसलिए इस स्थिति में अदरक की चाय न लें।
इसके अलावा नींबू पानी भी कब्ज की दवा का काम करता है। इसमें एसिड ज्यादा होता है जिससे पाचन तंत्र तेज होता है और कब्ज से राहत मिलती है।
डॉक्टर को कब दिखाएं
आमतौर पर डिलीवरी के छह सप्ताह के बाद डॉक्टर के पास चेकअप के लिए जाया जाता है। डॉक्टर योनि, गर्भाशय ग्रीवा और गर्भाशय के साथ साथ वजन और ब्लड प्रेशर चेक करते हैं। अगर सब कुछ ठीक हो तो इसके बाद महिलाएं सेक्स कर सकती हैं और अपने नॉर्मल रूटीन में वापस आ सकती हैं।
वहीं, अगर डिलीवरी के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होने पर वजाइनल ब्लीडिंग, तेज सिरदर्द, टांग में दर्द के साथ लालिमा या सूजन, ब्रेस्ट में दर्द, सूजन और लालिमा दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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